मध्यप्रदेश

उज्जैन का कोठी महल सुनायेगा भारत के वीरो की महागाथा

कोठी महल पर वीर भारत संग्रहालय का भूमि पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री श्री मेघवाल ने किया

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में रविवार 30 मार्च 2025 को उज्जैन के कोठी महल पर युगयुगीन भारत के कालजयी महानायकों की तेजस्विता की महागाथा का वर्णन करने वाले वीर भारत संग्रहालय Veer Bharat Museum का भूमि पूजन किया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अर्जुनराम मेघवाल भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

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प्राचीन भारत के वीर महापुरूषों की गौरव गाथा संग्रहालय में मिलेगी

महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा सम्राट विक्रमादित्य, Vikramaditya उनके युग, भारत उत्कर्ष, नवजागरण और भारत विद्या पर एकाग्र विक्रमोत्सव 2025 अंतर्गत विक्रम सम्वत, भारतीय नव वर्ष अभिनंदन व सृष्टि आरंभ दिवस वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर वीर भारत संग्रहालय का भूमिपूजन सम्पन्न हुआ। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने इस अवसर पर कहा कि उज्जैन का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। हर कल्प में उज्जैनी का अपना इतिहास रहा है। प्राचीन भारत के वीर महापुरूषों की गौरव गाथा की जानकारी इस संग्रहालय में प्रदान की जाएगी। संग्रहालय का निर्माण भव्य स्तर पर किया जाएगा। प्राचीन काल की सभी प्रमुख घटनाओं की जानकारी प्रदान की जाएगी। संग्रहालय का निर्माण लगभग 20 करोड़ रूपए की लागत से किया जाएगा। इसके अतिरिक्त आवश्यकता पडने पर और धन राशी भी प्रदान कि जाएगी। हमें अपनी विरासत पर गर्व करने का एक और अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने अपनी ओर से संग्रहालय के निर्माण हेतु शुभकामनाऐं दी।  कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि सांसद उज्जैन आलोट संसदीय क्षेत्र अनिल फिरोजिया, सांसद राज्यसभा बालयोगी उमेशनाथ महाराज, विधायक उज्जैन-उत्तर अनिल जैन कालूहेड़ा, संजय अग्रवाल, महापौर मुकेश टटवाल निगम अध्यक्ष नगर पालिक निगम श्रीमती कलावती यादव और संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला शामिल हुए। कार्यक्रम में सर्वप्रथम पंडित चंदन व्यास एवं उनके दल के द्वारा स्वस्ति पाठ किया गया।

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भारत के तेजस्वी नायकों के योगदान का संग्रहालय में समावेश होगा

वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने कहा कि भारतवर्ष के गौरवशाली और पराक्रमी अतीत से सुपरिचय तथा प्रेरणा हमारे समय की अपरिहार्य आवश्यकता है। यह एक राष्ट्रव्यापी, महत्वाकांक्षी स्वप्र है जिसे चरितार्थ करने के लिए वीर भारत संग्रहालय में भारत की तेजस्विता और पराक्रम के विभिन्न आयामों को व्यापक रूप से प्रस्तुत किये जाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार संकल्पित है। तेजस्विता और शौर्य हमारे जीवन, परंपरा, चित्त-वृत्ति, चिंतन-प्रकृति, दर्शन, जीवन मूल्य, आस्था और विश्वासों का स्वर है। हमारा प्रयास है कि वीर भारत संग्रहालय में राष्ट्र की सभी मंगलकारी दृष्टियों का प्रतिबिंबन हो। भारत वर्ष का प्रागैतिहास-पुरापाषाण काल, पूर्व वैदिक, वैदिक/उपनिषद, सरस्वती सिंधु घाटी सभ्यता, उत्तर वैदिक, श्रीराम के पूर्वज, श्रीकृष्ण के पूर्वज, रामायण काल, महाभारत काल, प्राचीन भारत की जनजातियों, महाजनपद काल, गौतम बुद्ध, महावीर, आदिशंकराचार्य, चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट विक्रमादित्य काल, सातवाहन, गुप्त साम्राज्य, चोल, पल्लव, भोजदेव, मध्ययुग, भक्ति काल, भारत के शूरवीर, पराधीनता के विरूद्ध सिंहनाद करते हुए भारत की सुदीर्घ परंपरा में तेजस्वी नायकों, चिंतकों, दार्शनिकों, मंत्रद्रष्टा, ऋषियों, संतों, मनीषियों, कवियों, लेखकों, कलाकारों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों के अनुपम योगदान को रेखांकित किया जायेगा।

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महानायकों की महागाथा का यह अनूठा केंद्र बनेगा

संग्रहालय युगयुगीन भारत के महानायकों की महागाथा का यह अनूठा केंद्र बनने जा रहा है। प्रदेशवासियों के लिए गर्व की बात है कि यह उज्जैन में स्थापित होने जा रहा है। क्योंकि सनातन परंपरा से ही, सृष्टि के आरंभ से ही बाबा महाकाल और उनकी प्रिय उज्जयिनी विराजित है। भारत वर्ष प्रागैतिहासिक-पुरापुरापाषाण काल से ही मानव सभ्यता और संस्कृति के विकास की कर्मभूमि रहा है। वीर भारत संग्रहालय में चाहे वैदिक काल हो , उपनिषद काल हो, रामायण महाभारत काल हो, हमारे ऋषि वैज्ञानिक हों, हमारे राष्ट्र के महानायक हों या फिर वे राजा महाराजा रहे हों, वैज्ञानिक रहे हों, साहित्यकार, इतिहासकार, खगोलविद हों, योद्धा हों, संन्यासी हों, उद्यमी रहे हों ऐसे सभी प्रेरक चरित्रों को यादगार बनाने की कोशिश की जायेगी जिन्होंने भारत को तेजस्वी भारत बनाने का काम किया हो। मैंने निर्देश दिए हैं कि इस संग्रहालय जो दुनिया में अपनी तरह का सबसे अकेला होगा, इसे समय सीमा में पूरा किया जाए, सिंहस्थ के पहले पूरा किया जाये। भारत वर्ष में विक्रमादित्य युग परिवर्तन और नवजागरण की एक महत्वपूर्ण धुरी रहे हैं, और उनके द्वारा प्रवर्तित विक्रम सम्वत् हमारी एक अत्यंत मूल्यवान धरोहर है। कार्यक्रम में वीर भारत संग्रहालय कि रुप रेखा पर आधारित फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। अतिथीयों द्वारा इस दौरान कोठीमहल का अवलोकन भी किया गया।

– हरिओम राय

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