उज्जैनमध्यप्रदेश

महाकाल की नगरी का ‘महानगर’ अवतार: उज्जैन बनेगा देश का मॉडल मेट्रो सिटी

महाकाल नगरी में इंजीनियरों की 'फौज' तैनात: नगर निगम और UDA को मिले नए हाथ

उज्जैन। विशेष कवरेज। महाकाल की नगरी उज्जैन के इतिहास में विकास का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार उज्जैन को केवल एक धार्मिक नगरी के रूप में नहीं, बल्कि एक आधुनिक ‘मेट्रो सिटी’ के रूप में स्थापित करने के लिए संकल्पबद्ध है। बुधवार 11 फरवरी 2026 को उज्जैन नगर निगम के सभाकक्ष में आयोजित सिंहस्थ-2028 की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब विकास की गति ‘फाइलों’ की रफ्तार से नहीं, बल्कि ‘युद्ध स्तर’ के संकल्प से तय होगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि सिंहस्थ मध्यप्रदेश की साख का सवाल है और इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई अक्षम्य होगी।

समीक्षा बैठक में यह बात उभरकर सामने आई कि नगर निगम और उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) में तकनीकी अमले, विशेषकर इंजीनियरों की भारी कमी है। इस वजह से एक ही इंजीनियर पर कई निर्माण कार्यों का बोझ है, जिससे काम की गुणवत्ता और गति प्रभावित हो रही है। इस समस्या को मुख्यमंत्री ने तत्काल हल किया और बैठक खत्म होने के कुछ ही घंटों के भीतर तबादला और नई पदस्थापना के आदेश जारी हो गए।

नगर निगम उज्जैन की मजबूती: निगमायुक्त अभिलाष मिश्रा की मांग पर नगर निगम को अनुभवी इंजीनियर मिले हैं। दतिया RES के प्रभारी EE हिमांशु तिवारी और पावर जनरेटिंग कंपनी के राजेश कुमार जैन को सहायक यंत्री (AE) के पद पर तैनात किया गया है। निगम का लक्ष्य है कि अब एक इंजीनियर के पास दो से अधिक सड़कों का कार्यभार न हो, ताकि वे साइट पर रहकर काम की बारीकी से निगरानी कर सकें।

उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) में नई नियुक्तियां: प्राधिकरण को भी नए सहायक यंत्री और उपयंत्री मिले हैं। भिंड से अवनीश ठाकुर, नर्मदापुरम से अंबक पाराशर और जावरा से शुभम सोनी को उज्जैन भेजा गया है। इन अधिकारियों को विशेष रूप से उन परियोजनाओं में लगाया जाएगा जो सिंहस्थ के मुख्य बुनियादी ढांचे से जुड़ी हैं।

मुख्यमंत्री का कड़ा रुख: “सक्षम नहीं तो कुर्सी छोड़ें अफसर”

बैठक की शुरुआत ही मुख्यमंत्री की सख्त नाराजगी के साथ हुई। उज्जैन के पुराने शहर के क्षेत्रों में सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्यों में हो रही लेटलतीफी को लेकर डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों की क्लास ली। उन्होंने कहा कि जनता धूल, सीवरेज और टूटी सड़कों के बीच जीने को मजबूर है, यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीएम ने दो-टूक कहा, “अगर वर्तमान अफसर इन चुनौतियों को संभालने में सक्षम नहीं हैं, तो हमें नए और ऊर्जावान अफसर भेजने में देर नहीं लगेगी।”

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सिंहस्थ-2028 के सभी निर्माण कार्य न केवल समय पर पूरे हों, बल्कि उनकी गुणवत्ता ऐसी हो कि उज्जैन आने वाले श्रद्धालु इसे ‘आधुनिक भारत की धार्मिक राजधानी’ के रूप में याद रखें।

अब ‘माइक्रो’ नहीं ‘नैनो मैनेजमेंट’ का दौर: CM हाउस में बनेगा सिंहस्थ सेल

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण फैसला सिंहस्थ कार्यों की मॉनिटरिंग के स्तर को बदलना रहा। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब सिंहस्थ की तैयारियों की निगरानी केवल स्थानीय स्तर पर या संभागायुक्त कार्यालय से नहीं होगी, बल्कि सीधे मुख्यमंत्री निवास से की जाएगी।

  • विशेष सिंहस्थ सेल: दिल्ली और भोपाल की तर्ज पर सीएम हाउस में एक हाई-टेक ‘सिंहस्थ सेल’ गठित किया जाएगा। यह सेल प्रतिदिन होने वाली प्रगति की रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री को सौंपेगा।

  • रिवर्स कैलेंडर: मुख्यमंत्री ने ‘रिवर्स कैलेंडर’ (उलटी गिनती) पद्धति लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि सिंहस्थ से पहले हमारे पास केवल दो वर्षाकाल (Monsoon) शेष हैं। इसलिए अब हर दिन, हर घंटे का महत्व है। अधिकारियों को 24×7 सक्रिय रहने को कहा गया है।

पुराने उज्जैन की सड़कों का कायाकल्प: जनता की पीड़ा पर मरहम

उज्जैन के पुराने क्षेत्रों जैसे तेलीवाड़ा, कंठाल, केडी गेट और जयसिंहपुरा में सड़कों की खुदाई के कारण रहवासी नरकीय जीवन जी रहे हैं। धूल और गंदगी के कारण बीमारियां फैल रही हैं। मुख्यमंत्री ने इन क्षेत्रों के लिए विशेष निर्देश दिए:

  1. जल्द निर्माण: खुदी हुई सड़कों पर पाइपलाइन और सीवरेज का काम अगले 15 दिनों में पूरा कर सड़क निर्माण शुरू किया जाए।

  2. नल कनेक्शन: खुले पड़े नल कनेक्शनों को तुरंत व्यवस्थित किया जाए ताकि पेयजल की बर्बादी न हो और गंदगी घरों तक न पहुँचे।

  3. धूल नियंत्रण: निर्माण क्षेत्रों में नियमित पानी का छिड़काव किया जाए ताकि उड़ती धूल से नागरिकों को राहत मिले।

शिप्रा और नर्मदा का संगम: किसानों के लिए संवेदनशीलता

मुख्यमंत्री समीक्षा के दौरान एक संवेदनशील अभिभावक के रूप में भी नजर आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंहस्थ के लिए बन रहे नए घाटों और विकास कार्यों का असर किसानों की गेहूं की फसल पर नहीं पड़ना चाहिए।

  • सिंचाई की सुरक्षा: सिंचाई के लिए पानी की कोई कमी न हो, इसके लिए जल संसाधन विभाग को सतर्क किया गया है।

  • नर्मदा जल: शिप्रा नदी में नर्मदा का जल निरंतर बना रहे, ताकि जल स्तर में कमी न आए और धार्मिक व कृषि जरूरतें पूरी होती रहें।


सिंहस्थ-2028 के लिए CM के 5 महा-मंत्र

मुख्यमंत्री ने उज्जैन के विकास के लिए एक व्यापक विजन साझा किया है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

1. होम स्टे और ग्रामीण सशक्तिकरण

सिंहस्थ के दौरान होटलों की कमी को देखते हुए शहर के आसपास के 20-30 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों में ‘होम स्टे’ विकसित किए जाएंगे। इसके लिए ग्रामीणों को प्रशिक्षित किया जाएगा कि वे श्रद्धालुओं का स्वागत कैसे करें। इससे ग्रामीणों की आय बढ़ेगी और सिंहस्थ में आवास की समस्या हल होगी।

2. त्यौहारों से लें सीख (Trial Run)

महाशिवरात्रि, सावन मास और नागपंचमी जैसे बड़े त्यौहारों को सिंहस्थ के ‘ट्रायल रन’ के रूप में देखा जाए। इन पर्वों पर जो भीड़ आती है, उसके प्रबंधन (Crowd Management) के अनुभवों को डायरी में दर्ज करें और सिंहस्थ की योजना में शामिल करें।

3. स्मार्ट ट्रैफिक और गूगल मैपिंग

उज्जैन को अन्य जिलों (इंदौर, आगर, देवास) से जोड़ने वाले सभी वैकल्पिक मार्गों को चिन्हित कर उन्हें गूगल मैप पर अपडेट किया जाएगा। महाकाल मंदिर पहुँचने के लिए नए रास्ते बनाए जाएंगे ताकि मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति न बने।

4. उच्च गुणवत्ता के लिए ‘इनाम’

जो निर्माण एजेंसियां या ठेकेदार तय समय सीमा से पहले और उच्च गुणवत्ता का कार्य पूरा करेंगे, उन्हें राज्य सरकार सार्वजनिक रूप से पुरस्कृत करेगी। यह कदम स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा।

5. घाटों का कायाकल्प और विस्तार

श्री मंगलनाथ, भूखीमाता और रामघाट के आसपास के घाटों को आपस में जोड़ने के लिए नए रास्तों का निर्माण होगा। इन घाटों पर प्रकाश, स्वच्छता और सुरक्षा के आधुनिक इंतजाम किए जाएंगे।

Metropolis उज्जैन: भविष्य की तस्वीर

सिंहस्थ-2028 उज्जैन के लिए केवल एक मेला नहीं, बल्कि आधुनिक महानगर बनने का अवसर है। मुख्यमंत्री के विजन के अनुसार, उज्जैन में मेट्रो ट्रेन का विस्तार, रिवर फ्रंट का विकास और मल्टी-लेवल पार्किंग जैसी सुविधाएं इसे देश के सबसे आधुनिक धार्मिक केंद्रों में शुमार कर देंगी। सरकार का लक्ष्य है कि जब सिंहस्थ खत्म हो, तब भी उज्जैन एक आत्मनिर्भर और व्यवस्थित मेट्रो सिटी बना रहे।

अब किसी भी गलती की गुंजाइश नहीं

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सख्ती और विजनरी अप्रोच ने प्रशासन में नई ऊर्जा भर दी है। “नैनो मैनेजमेंट” और “रिवर्स कैलेंडर” जैसे शब्द दर्शाते हैं कि सरकार अब किसी भी गलती की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती। लेकिन असली चुनौती इन योजनाओं को धरातल पर उतारने की है। नगर निगम और प्राधिकरण को मिले नए इंजीनियरों को अब दिन-रात एक करना होगा ताकि उज्जैन की जनता को विकास के नाम पर हो रही असुविधा से मुक्ति मिल सके।

-हरिओम राय, समाचार आज (samacharaaj.com), उज्जैन

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