
उज्जैन, समाचार आज। ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि महापर्व की तैयारियों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा भीड़ प्रबंधन का हवाला देकर अभिषेक-पूजन की रसीदें बंद करने और पहले से बुक की गई रसीदों को निरस्त करने के फैसले पर मंदिर के अधिकृत पुरोहितों ने कड़ा आक्रोश जताया है। 22 पुरोहितों ने कलेक्टर एवं अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस निर्णय को तत्काल बदलने की मांग की है।
बुकिंग निरस्त कर लौटाई राशि, पुरोहितों में रोष
मंदिर प्रशासन ने आगामी 15 और 16 फरवरी 2016 (महाशिवरात्रि पर्व) के लिए नंदी हॉल में प्रवेश और अभिषेक की रसीदें नहीं काटने का निर्णय लिया है। प्रशासन का तर्क है कि भारी भीड़ के चलते गर्भगृह और नंदी हॉल में पूजन व्यवस्था संभालना कठिन होगा। इसी के चलते जिन श्रद्धालुओं ने पहले ही ऑनलाइन या ऑफलाइन बुकिंग करा ली थी, उन्हें राशि वापस कर बुकिंग कैंसिल कर दी गई है।
महाकालेश्वर मंदिर पुरोहित समिति के अध्यक्ष पं. लोकेंद्र व्यास एवं सचिव पं. दीपक शर्मा ने इस पर आपत्ति लेते हुए कहा कि महाकाल मंदिर शैव परंपरा का प्रमुख केंद्र है। यहां शास्त्रोक्त विधि से अभिषेक करना ही मुख्य पूजा है, इसे बंद करना धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ है।
“जब महाकाल लोक बना, तो व्यवस्था क्यों नहीं?”
पुरोहितों ने अपने पत्र में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं:
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क्षेत्रफल का तर्क: पुरोहितों का कहना है कि ‘श्री महाकाल लोक’ बनने के बाद मंदिर का क्षेत्रफल पहले के मुकाबले 8 गुना बढ़ चुका है। जब जगह इतनी बढ़ गई है, तो श्रद्धालुओं के लिए पूजन की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकती?
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दान पर जोर, भक्ति पर रोक?: पुरोहित समिति का आरोप है कि प्रशासन लड्डू प्रसाद और ‘शीघ्र दर्शन’ (250 रुपये वाली रसीद) के लिए तो कई काउंटर लगा देता है, लेकिन जब बात अभिषेक-पूजन की आती है, तो व्यवस्था का बहाना बनाया जाता है।
पुरोहितों की प्रमुख मांगें
पुरोहितों ने कलेक्टर को सौंपे पत्र में दो मुख्य सुझाव दिए हैं:
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अभिषेक काउंटर बढ़ाएं: जिस तरह दर्शन के टिकट काउंटर बढ़ाए जाते हैं, उसी तरह अभिषेक के विशेष काउंटर लगाए जाएं ताकि दूर-दराज से आए श्रद्धालु पूजन कर सकें।
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परंपरा का सम्मान: अधिकृत 22 पुरोहितों को विश्वास में लेकर पूजा की रसीदें पुनः शुरू की जाएं ताकि सदियों पुरानी परंपरा खंडित न हो।



