उज्जैन

प्रतिमा विसर्जन के दौरान हादसे में तीसरे बच्चे का शव मिला, CM डॉ. मोहन यादव पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचे, 4-4 लाख रुपए देने की घोषणा

प्रतिमा विसर्जन के वक्त 12 बच्चे ट्रेक्टर ट्राली सहित कालीसिंध नदी में डूबे थे, CM डॉ. मोहन यादव ने जाँच के आदेश भी दिए

उज्जैन: उज्जैन जिले में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान ट्रैक्टर ट्रॉली दुर्घटना में जान गंवाने वाले परिवारों के साथ संवेदना व्यक्त करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए। मुख्यमंत्री सीधे बड़नगर के ग्राम पीरझलार पहुँचे और प्रभावित परिवारों से मिलकर शोक संवेदना प्रकट की।

“आप सब लोग ही मेरा परिवार हैं, मुझे अभी तक नींद नहीं आई है”

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि यह घटना अत्यंत हृदय विदारक है, और छोटे बच्चों की अकाल मृत्यु दुखदाई है। भावुक होते हुए उन्होंने कहा, “आप सब लोग ही मेरा परिवार है। इस हृदय विदारक घटना के बाद से मुझे अभी तक नींद नहीं आई है।” मुख्यमंत्री ने परिवारजनों को आश्वस्त किया कि दुख की इस घड़ी में राज्य सरकार पूरी तरह से उनके साथ खड़ी है और हर संभव मदद करेगी।

पीड़ित परिवारों के लिए सहायता राशि और जाँच के निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घटनास्थल पर ही सहायता राशि देने की घोषणा की और वितरित भी की:

  • मृतकों के लिए: प्रत्येक दिवंगत व्यक्ति के परिवार को ₹4-4 लाख की राशि प्रदान की गई।
  • गंभीर घायलों के लिए: गंभीर घायलों के इलाज के लिए ₹1-1 लाख की राशि दी जाएगी।
  • उपचार का खर्च: सरकार ने घोषणा की कि घायलों के उपचार का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

इसके साथ ही, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घटना की विस्तृत जाँच के आदेश भी दिए हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन में सहयोगियों को मिलेगा पुरस्कार

मुख्यमंत्री ने संकट में फंसे लोगों की सहायता करने वालों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने रेस्क्यू ऑपरेशन में सक्रिय सहयोग दिया है, उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। ऐसे सहयोगियों को आगामी गणतंत्र दिवस पर सम्मान-पत्र प्रदान किए जाएंगे।

21 घंटे बाद लापता शुभम चौहान का शव मिला

चंबल नदी में ट्रैक्टर-ट्रॉली गिरने से हुए दर्दनाक हादसे में लापता चल रहे तीसरे बच्चे शुभम चौहान (16) का शव शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे बरामद कर लिया गया है। हादसे के लगभग 21 घंटे बाद एसडीईआरएफ (SDRF) की टीम ने गहन तलाशी अभियान के बाद शव को पानी से निकाला।

चाबी घुमाने से हुआ हादसा

यह दर्दनाक हादसा गुरुवार 2 अक्टूबर 2025 की दोपहर करीब 12 बजे हुआ था। पीरझलार गांव से कुछ लोग देवी प्रतिमा विसर्जन के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर चंबल नदी पहुँचे थे। विसर्जन के बाद, बताया जा रहा है कि किसी बच्चे ने ट्रैक्टर में लगी चाबी घुमा दी, जिससे ट्रैक्टर-ट्रॉली आगे बढ़ी और अनियंत्रित होकर नदी में जा गिरी। हादसे के समय ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार करीब 12 बच्चे पानी में गिर गए थे। स्थानीय लोगों की मदद से 11 बच्चों को तुरंत बाहर निकाल लिया गया था।

मृतकों की संख्या हुई तीन, दो घायल अस्पताल में भर्ती

इस हादसे में अब तक तीन बच्चों की मौत हो चुकी है:

  1. पृथ्वीराज पिता दिनेश चौहान (16)
  2. अंश पिता अर्जुन चौहान (8)
  3. शुभम चौहान (16) (लापता थे, अब शव मिला)

पहले मृत घोषित किए गए पृथ्वीराज और अंश का अंतिम संस्कार गुरुवार शाम को ही उनके गांव पीरझलार में कर दिया गया था। वहीं, हादसे में घायल हुए दो बच्चों आदित्य पिता लाखन गुरवाड़िया (10) और वंश पिता अर्जुन चौहान (6) को गंभीर हालत में इंदौर के चोइथराम अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

मृतकों के परिवार को 25 लाख और घायलों को 10 लाख रुपए की राहत राशि की मांग

घटना की जानकारी मिलने के बाद कांग्रेस विधायक और कांग्रेस जिला अध्यक्ष महेश परमार भी पीरझालर गांव पहुंचे। यहां उन्होंने तीनों बच्चों के परिवार से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त की। विधायक परमार ने कहा कि इस बुरे समय में हम राजनीति नहीं करना चाहते हैं लेकिन सरकार को मृतकों के परिवार वालों को 25 लाख रुपए और घायलों को 10 लाख रुपए की राहत राशि देना चाहिए।

विसर्जन स्थल पर सुरक्षा नदारद, प्रशासन पर उठे सवाल

चंबल नदी में ट्रैक्टर-ट्रॉली गिरने से हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब स्थानीय प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। पता चला है कि जिस पुल (ब्रिज) से ट्रैक्टर नदी में गिरा, वह न केवल विसर्जन स्थलों की आधिकारिक सूची में शामिल नहीं था, बल्कि वहाँ सुरक्षा के कोई इंतजाम भी नहीं थे।

सुरक्षा इंतजामों की कमी

हादसे के बाद ग्रामीण और स्थानीय लोग प्रशासन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

  • प्रतिबंध की सूचना नहीं: पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इंगोरिया थाने में बनी विसर्जन स्थलों की लिस्ट में इस ब्रिज का नाम नहीं है। इसके बावजूद, ब्रिज पर प्रतिमा विसर्जन प्रतिबंधित होने की कोई सूचना या बोर्ड नहीं लगा था।
  • ग्रामीणों का दावा: ग्रामीणों ने बताया कि हर साल आसपास के गांवों (पीरझलार, दौलतपुर, तलावली, नरसिंगा) के लोग इसी ब्रिज से मूर्तियों का विसर्जन करते हैं। इतने वर्षों से लगातार विसर्जन होने के बावजूद, यहाँ कोई सुरक्षा उपाय नहीं किए गए थे।
  • लापरवाही: लोगों का कहना है कि अगर दुर्घटनास्थल पर एक भी पुलिसकर्मी मौजूद होता तो ट्रैक्टर को लापरवाही से खड़ा करने या बच्चों द्वारा चाबी घुमाने जैसी घटना को रोका जा सकता था, और इतने बड़े हादसे से बचा जा सकता था।

हादसे के बाद चिपका ‘प्रतिबंध’ का पंपलेट

स्थानीय प्रशासन ने हादसे के बाद अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए तुरंत कार्रवाई की। घटना के बाद, ब्रिज पर आनन-फानन में एक छोटा पंपलेट चिपका दिया गया है, जिस पर लिखा है: “ब्रिज से प्रतिमा विसर्जन करना प्रतिबंधित है।” प्रशासन की यह ‘हादसे के बाद की कार्रवाई’ सवालों के घेरे में है।

-हरिओम राय
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