मध्यप्रदेश

होटल में चेक-इन करते ही उज्जैन पुलिस को पहुंचेगा मैसेज, 350 होटल जुड़े

उज्जैन: महाकाल की नगरी उज्जैन में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस ने एक बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। शहर में रुकने वाले यात्रियों की जानकारी अब मैनुअल रजिस्टर की जगह एक विशेष ‘GuestReport.in’ ऐप के माध्यम से सीधे पुलिस के पास उपलब्ध होगी। यह पहल उज्जैन आ रहे संदिग्ध लोगों पर तुरंत नज़र रखने और महाकुंभ सिंहस्थ 2028 के दौरान भीड़ प्रबंधन में निर्णायक साबित होगी।

रियल टाइम डेटा से संदिग्धों पर तुरंत नज़र

एसपी प्रदीप शर्मा के निर्देश पर तैयार किए गए इस ऐप से उज्जैन के 350 होटल जुड़ चुके हैं।

  • तत्काल डेटा: होटल संचालक को जैसे ही कोई यात्री चेक-इन करता है, उसकी पहचान, मोबाइल नंबर सहित अन्य जानकारी ऐप में दर्ज करनी होती है। यह डेटा तत्काल पुलिस थाने, थाना प्रभारी और जिले के एसपी तक रियल टाइम में पहुंच जाता है।

  • पेपरलेस सुविधा: पहले 7 करोड़ श्रद्धालुओं का डेटा खंगालने में पुलिस को हफ्तों लग जाते थे, लेकिन यह ऐप अब मिनटों में सारा काम आसान कर देगा।

  • अलर्ट सिस्टम: एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि अगर कोई यात्री संदिग्ध अलर्ट सूची में है और उज्जैन आकर रुकता है, तो पुलिस को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा।

गेस्ट रिपोर्ट इन एप में ये भी फीचर

  • Surveillance फीचर: संदिग्ध नाम या आधार नंबर जैसे ही किसी होटल में रिकॉर्ड हों, सिस्टम तुरंत हाईलाइट करता है।
  • Centralised Data System: पूरे शहर के होटल रिकॉर्ड एक स्थान पर, तेज जांच और आसान मॉनिटरिंग।
  • Zero Check-In Monitor: कौन-कौन से होटल ने रिपोर्ट भेजी या नहीं भेजी, पुलिस एक क्लिक में ट्रैक कर सकती है।
  • Run-Time Hotel Audit: अधिकारी मौके पर होटल जाते समय मोबाइल से ही रिपोर्ट, आईडी और एंट्रीज चेक कर सकते हैं।
  • Advanced Search: नाम, मोबाइल, आधार कुछ भी सर्च करें, सेकेंडों में पूरा डेटा सामने।
  • रियल-टाइम डेटा एक्सेसः शहर, जोन या थाना जिस भूमिका में अधिकारी हों, उन्हें उसी अनुसार लाइव डेटा मिलता है।

सिंहस्थ 2028 में होगा सबसे बड़ा उपयोग

यह डिजिटल प्लेटफॉर्म आगामी सिंहस्थ कुंभ 2028 के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है।

  • 30 करोड़ श्रद्धालुओं की निगरानी: माना जा रहा है कि सिंहस्थ के दौरान करीब 30 करोड़ श्रद्धालु उज्जैन आएंगे। इन करोड़ों लोगों की रियल टाइम ट्रेसेबिलिटी इस ऐप के माध्यम से हो सकेगी।

  • सुरक्षा और सुविधा: कौन कहाँ ठहरा है, इसका डेटा तुरंत उपलब्ध होगा। यह न केवल सुरक्षा और निगरानी के लिए उपयोगी है, बल्कि गुमशुदा व्यक्तियों की तुरंत पहचान करने और यदि कोई यात्री अपनी होटल का पता भूल जाए तो उसे ढूंढने में भी मदद मिलेगी।

होटल संचालकों को भी मिली राहत

यह ऐप सिर्फ पुलिस के लिए ही नहीं, बल्कि होटल संचालकों के लिए भी बड़ी राहत लेकर आया है।

  • दौड़भाग खत्म: जो होटल इस ऐप से जुड़ गए हैं, उन्हें अब रोजाना सुबह पुलिस थाने जाकर गेस्ट की डिटेल नोट करवाने के झंझट से मुक्ति मिल गई है। पहले उन्हें एक कर्मचारी को मैन्युअली कागज भरकर थाने भेजना पड़ता था।

  • डिजिटल विस्तार: पुलिस ने बताया है कि फिलहाल होटलों को जोड़ा गया है, लेकिन आने वाले समय में आश्रमों और अखाड़ों को भी इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।

महाकाल मंदिर क्षेत्र में लगातार दूसरे दिन ‘फर्जी आईडी’ कांड, तपोवन होटल में ‘राहुल गुप्ता’ बनकर रुका था ‘आसिफ शेख’

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