दवाइयों पर ‘ओवररेटिंग’ का खेल: उज्जैन के पाटीदार मेडिकोज को नोटिस, बिल में हेराफेरी कर वसूले ज्यादा दाम

उज्जैन। फ्रीगंज क्षेत्र के पाटीदार अस्पताल परिसर में स्थित पाटीदार मेडिकोज द्वारा एमआरपी से अधिक दाम वसूलने का गंभीर मामला सामने आया है। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के निर्देश पर हुई जांच में पाया गया कि मेडिकल स्टोर संचालक बिल में बैच नंबर बदलकर ग्राहकों से अधिक पैसे वसूल रहा था। प्रशासन ने स्टोर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और लाइसेंस निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई की तैयारी है।
फ्रीगंज स्थित पाटीदार अस्पताल परिसर में संचालित पाटीदार मेडिकोज द्वारा मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर दवाइयों पर निर्धारित एमआरपी (MRP) से अधिक दाम वसूलने का मामला सामने आया है। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के निर्देश पर हुई जांच में धांधली की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए मेडिकल स्टोर संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
ऐसे पकड़ी गई ‘टेक्निकल हेराफेरी’
जिला औषधि निरीक्षक देशराज सिंह द्वारा की गई जांच में पता चला कि मेडिकल स्टोर संचालक मुनाफाखोरी के लिए बिलिंग में चालाकी कर रहा था।
धोखाधड़ी का तरीका:
एक ग्राहक ने यहाँ से Linezolid IV Injection खरीदा था। स्टोर ने जो खेल किया वह नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:
| विवरण | दिया गया इंजेक्शन (Batch: ABB1040) | बिल पर दर्ज इंजेक्शन (Batch: ABB1062) |
| वास्तविक MRP | ₹812.65 | ₹893.91 |
| वसूली गई राशि | – | ₹893.91 |
नतीजा: पुराने बैच की सस्ती दवा देकर बिल पर नए बैच का नंबर डाल दिया गया, जिससे ग्राहक से प्रति इंजेक्शन लगभग 81.26 ज्यादा वसूले गए।
पुरानी शिकायतों का काला इतिहास
जांच में यह भी सामने आया है कि यह पहली बार नहीं है जब पाटीदार मेडिकोज के खिलाफ इस तरह की शिकायत मिली है।
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पूर्व में भी इसी तरह की अनियमितताओं पर इस स्टोर के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।
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औषधि विभाग की जांच में स्टोर संचालन से जुड़ी अन्य कई खामियां भी उजागर हुई हैं।
प्रशासन का रुख: रद्द हो सकता है लाइसेंस
प्रशासन ने इसे गंभीर अपराध और नियमों का उल्लंघन माना है।
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नोटिस: संचालक से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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संभावित कार्रवाई: संतोषजनक जवाब न मिलने पर मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निलंबित (Suspend) किया जा सकता है या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अपील: प्रशासन ने नागरिकों से कहा है कि दवा खरीदते समय हमेशा बिल पर लिखे बैच नंबर और एमआरपी का मिलान दवा के पैकेट से जरूर करें। किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तत्काल औषधि विभाग या जिला प्रशासन को सूचित करें।



