उज्जैन

सम्राट विक्रमादित्य विवि में टीचर भर्ती लोकायुक्त में फंसी , मात्र 2 शिक्षकों के भरोसे चल रहा लॉ डिपार्टमेंट

सम्राट विक्रमादित्य विवि के विधि छात्रों की पढ़ाई कानूनी प्रक्रिया में उलझी, आंदोलन किया

उज्जैन: सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के विधि (Law) विभाग में शुक्रवार 7 नवंबर 2025 को उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। करीब डेढ़ साल से पढ़ाई नहीं होने और शिक्षकों की भारी कमी से नाराज़ विद्यार्थियों ने पहले विभाग पर ताला जड़ा और फिर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन पहुँचकर जमकर प्रदर्शन किया। विधि विभाग की शुरुआत करीब 3 वर्ष पहले हुई थी, जिसमें बी.ए. एलएलबी, एलएलएम प्लेन और एलएलएम साइबर लॉ जैसे कोर्स चलाए जा रहे हैं।

विरोध की मुख्य वजह: लोकायुक्त में फंसी नियुक्ति

विश्वविद्यालय ने विधि विभाग जैसे कई पाठ्यक्रमों में शिक्षक तो शुरू कर दिए, लेकिन पर्याप्त फैकल्टी की व्यवस्था नहीं की। वर्तमान में यह अध्ययनशाला सिर्फ 2 शिक्षकों के भरोसे चल रही है, जबकि इसमें 635 विद्यार्थी विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हैं।

  • प्रतिनियुक्ति समाप्त: दो वर्ष पहले विभाग में प्रतिनियुक्ति पर 5 शिक्षक पदस्थ किए गए थे, जिनकी सेवा जून 2024 में समाप्त हो गई।
  • लोकायुक्त का पेंच: विक्रम विश्वविद्यालय ने सितंबर में 70 पदों पर अतिथि विद्वानों की नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया था, लेकिन कुछ लोगों ने इसकी लोकायुक्त में शिकायत कर दी। लोकायुक्त ने विवि प्रशासन से जवाब माँगा है। विवि ने जवाब भेज दिया है, लेकिन लोकायुक्त ने अभी तक भर्ती करने या न करने पर कोई मत नहीं दिया है। इसी वजह से सारी नियुक्तियाँ रुकी पड़ी हैं।

कुलगुरु के आश्वासन पर थमा प्रदर्शन

नाराज विद्यार्थियों ने अपनी फीस चुकाने के बावजूद कक्षाएं न लगने पर प्रशासनिक भवन के बाहर धरना दिया।

  • कुलगुरु से चर्चा: कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा, और विभागाध्यक्ष प्रो. डीडी बेदिया ने मौके पर पहुंचकर छात्रों से बातचीत की।
  • आश्वासन: कुलगुरु ने उन्हें आश्वासन दिया कि विभागीय समिति बुलाकर शिक्षकों की व्यवस्था जल्द ही की जा रही है। करीब एक घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद इस आश्वासन पर विद्यार्थी शांत हुए।

कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज का वक्तव्य: “विद्यार्थियों की कठिनाई समझ रहे हैं। अतिथि विद्वानों की नियुक्ति के संबंध में लोकायुक्त से मत मांगा है।”

-हरिओम राय

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