CM मोहन यादव ने सिंहस्थ लैंड पुलिंग योजना रद्द की
CM मोहन यादव ने लैंड पुलिंग रद्द कर किसानों की भावना का किया सम्मान

भोपाल/उज्जैन: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आगामी सिंहस्थ की लैंड पुलिंग योजना को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। सोमवार 17 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री निवास पर हुई उच्च-स्तरीय बैठक में, डॉ. यादव ने किसानों की मांगों को मानते हुए सिंहस्थ लैंड पुलिंग योजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्णय लिया।
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आयोजन को “दिव्य, भव्य और विश्वस्तरीय” बनाने के साथ-साथ साधु-संतों और किसानों के हितों को सर्वोपरि रखने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
किसानों की जीत: निरस्त हुई लैंड पुलिंग
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निर्णय: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चर्चा के बाद सिंहस्थ लैंड पुलिंग योजना को निरस्त करने की घोषणा की।
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निर्देश: उन्होंने नगरीय प्रशासन विकास विभाग और उज्जैन जिला प्रशासन को इस संबंध में तत्काल आदेश जारी करने के निर्देश दिए।
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किसानों की प्रतिक्रिया: इस फैसले का किसान संघ ने गर्मजोशी से स्वागत किया और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।
हाई-लेवल बैठक में कौन-कौन थे शामिल?
मुख्यमंत्री निवास पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में किसान संघ के प्रतिनिधि, भाजपा पदाधिकारी, और उज्जैन के जनप्रतिनिधि एवं जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।
| समूह | उपस्थित प्रमुख सदस्य |
| किसान संघ | महेश चौधरी, कमल सिंह आँजना, अतुल माहेश्वरी, लक्ष्मी नारायण पटेल, भरत बैस, रमेश दाँगी। |
| बीजेपी/प्रतिनिधि | बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, बीजेपी नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, जिला महामंत्री कमलेश बैरवा, महामन्त्री जगदीश पांचाल और आनंद खींची। |
अमित शाह ने भी देखा था प्रेजेंटेशन, इंटेलिजेंस रिपोर्ट ने हिलाया सरकार को!
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सिंहस्थ 2028 के लिए प्रस्तावित लैंड पुलिंग योजना को निरस्त करने के पीछे केंद्र सरकार के हस्तक्षेप और जमीन पर किसानों के उग्र विरोध की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस योजना के तहत उज्जैन में 2,376 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना था, जिसका किसान स्थायी निर्माण के कारण लगातार विरोध कर रहे थे।
भारतीय किसान संघ (बीकेएस) की शिकायतों को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया था।
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शीर्ष नेतृत्व को जानकारी: भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने अपनी शिकायतें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष तक पहुंचाई थीं।
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शाह ने देखा प्रेजेंटेशन: गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन की मौजूदगी में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का प्रेजेंटेशन देखा था।
उग्र प्रदर्शन और खुफिया रिपोर्ट का असर
किसानों का विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा था, जिसने सरकार को अपना फैसला बदलने पर मजबूर कर दिया।
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जल समाधि प्रदर्शन: स्थायी कुंभ नगरी बनाने का विरोध करते हुए तीन महीने पहले किसानों ने चक्रतीर्थ श्मशान घाट में पानी में खड़े होकर प्रदर्शन किया था और आगर रोड पर चक्काजाम भी किया था।
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आंदोलन स्थगित: मुख्यमंत्री के निर्णय के बाद, भारतीय किसान संघ ने कल (18 नवंबर 2025) को होने वाला प्रदर्शन स्थगित कर दिया है, हालांकि वे कम संख्या में एक रैली निकालेंगे।
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खुफिया रिपोर्ट: किसान संघ की ओर से बताया गया कि सरकार के पास आ रही इंटेलिजेंस (खुफिया) की रिपोर्ट ने सरकार को हिलाकर रख दिया था। रिपोर्ट में उज्जैन में अव्यवस्था फैलने की आशंका जताई गई थी, जिसके बाद सरकार ने लैंड पुलिंग एक्ट को खत्म करने का फैसला लिया।
जानिए क्या थी 2000 करोड़ की ‘स्थायी कुंभ नगरी’ योजना?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए स्थायी कुंभ नगरी विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की थी।
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लक्ष्य: हर 12 साल में करोड़ों रुपये खर्च कर अस्थायी निर्माण करने की जगह स्थायी सड़कें, बिजली के पोल और अन्य निर्माण कार्य किए जाने थे।
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लैंड पुलिंग का तरीका: उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) इस योजना के लिए 1806 किसानों की करीब 5000 सर्वे वाली जमीन की लैंड पुलिंग करने वाला था।
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संरचना: यह मध्य प्रदेश में अपनी तरह की पहली योजना थी, जिसमें इतने बड़े क्षेत्र में 60 से 200 फीट तक की इंटरकनेक्टेड स्थायी सड़कें बनाई जानी थीं।
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फायदा: इससे भीड़ बढ़ने पर क्राउड को समय रहते शिफ्ट किया जा सकता था।
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अनुमानित खर्च: इस योजना पर करीब ₹2000 करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान था।



