सरोकार

अब वंदे भारत और राजधानी में ‘छिलकों’ से बनी थाली में मिलेगा खाना

भारतीय रेलवे का बड़ा फैसला: ; प्लास्टिक मुक्त होगा सफर

उज्जैन/नई दिल्ली। ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों के लिए IRCTC नए साल में एक बड़ा और स्वास्थ्यवर्धक नवाचार करने जा रहा है। आगामी मार्च 2026 से वंदे भारत, शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में प्लास्टिक की जगह फल और सब्जियों के छिलकों से बनी बायोडिग्रेडेबल (Biodegradable) थालियों में भोजन परोसा जाएगा।

प्लास्टिक की खपत होगी कम, प्रदूषण में आएगी कमी

रेलवे और आईआरसीटीसी लंबे समय से रेल परिसरों को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

  • भारी बचत: शुरुआती चरण में ही हर महीने 300 किलो से अधिक प्लास्टिक की खपत कम होगी।

  • प्रदूषण पर लगाम: प्लास्टिक के कम उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।

  • विस्तार: इन तीन ट्रेनों के सफल परीक्षण के बाद इसे अन्य लंबी दूरी की ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा।

क्यों खास है यह बायोडिग्रेडेबल थाली?

यह केवल एक प्लेट नहीं, बल्कि विज्ञान और पर्यावरण का अनूठा मेल है:

  1. प्राकृतिक निर्माण: यह थाली फल-सब्जियों के अवशेषों और कागज से बनाई जाती है।

  2. जल्द निस्तारण: प्लास्टिक की थाली जहाँ सैकड़ों साल तक नष्ट नहीं होती, वहीं यह थाली मिट्टी में मिलने के बाद मात्र 3 से 6 महीने में पूरी तरह नष्ट हो जाती है।

  3. माइक्रोप्लास्टिक से मुक्ति: यह थाली जहरीले रसायन या माइक्रोप्लास्टिक नहीं छोड़ती, जिससे जल और जमीन प्रदूषित नहीं होते।

यात्रियों की सेहत के लिए ‘वरदान’

अक्सर देखा गया है कि प्लास्टिक की थाली में गर्म खाना परोसने से खतरनाक रसायन भोजन में मिल जाते हैं। रेलवे के इस कदम से:

  • कैंसर का खतरा कम: प्लास्टिक से निकलने वाले रसायनों के कारण होने वाली कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कम होगा।

  • सुरक्षित भोजन: यात्रियों को अब अधिक स्वच्छ और रसायनों से मुक्त भोजन प्राप्त होगा।

IRCTC का इतिहास: इससे पहले रेलवे ने प्लास्टिक कप बंद कर कागज के कप और कुछ स्थानों पर कुल्हड़ को बढ़ावा दिया था। अब बायोडिग्रेडेबल थाली इस दिशा में सबसे बड़ा क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

📊 रेलवे ‘ग्रीन मिशन’ 2026

विशेषता पुरानी व्यवस्था (प्लास्टिक) नई व्यवस्था (बायोडिग्रेडेबल)
नष्ट होने का समय 400 – 500 साल 3 – 6 महीने
सेहत पर असर रसायनों और कैंसर का खतरा पूरी तरह सुरक्षित व प्राकृतिक
प्रदूषण माइक्रोप्लास्टिक और टॉक्सिन्स पर्यावरण के लिए अनुकूल
शुरुआत मार्च 2026 से वंदे भारत, राजधानी, शताब्दी

रेलवे का यह कदम न केवल पर्यावरण को बचाएगा, बल्कि ‘स्वच्छ भारत मिशन’ को पटरियों पर भी उतारने का काम करेगा। उम्मीद है कि जल्द ही सभी ट्रेनों में प्लास्टिक का नामोनिशान मिट जाएगा।

समाचार आज (samacharaaj.com) की विशेष रिपोर्ट।
उज्जैन के जलाशयों में ‘विदेशी मेहमानों’ का डेरा

Related Articles

Back to top button