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महाकाल मंदिर में मिल रहा सेहतमंद श्री अन्न लड्डू प्रसाद, जानिए कैसे बनता है

महाकाल मंदिर में अब रागी का लड्डू प्रसाद मिलेगा, मुख्यमंत्री ने दीपावली पर किया शुभारंभ

उज्जैन। श्री महाकाल भक्तों के लिए अच्छी खबर यह है कि मंदिर पर उन्हें अब सेहतमंद प्रसाद भी मिलेगा। जिसका उपयोग मीठा से परहेज करने वाले भक्त भी खुलकर कर सकते हैं।

श्री महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने दीपावली 20 अक्टूबर 2025 काे मंदिर में श्री अन्न लड्डू प्रसाद का शुभारंभ किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसका शुभारंभ किया। दीपावली की रात महाकाल महालोक में हुए शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को दीपावली की शुभकामनाएं दी। इसके पहले उन्होंने भगवान महाकाल का दर्शन-पूजन किया। गर्भगृह से उन्होंने भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना की और बाबा का आशीर्वाद लिया। बाद में नंदी हाल से श्री महकाल का ध्यान लगाया। इसके बाद उन्होंने महाकाल मंदिर के गादीपित महंत विनीत गिरी महाराज से आशीर्वाद लिया।

रागी को मध्य भारत में मंडुआ कहा जाता है। भारतीय पारंपरिक अनाजों में सबसे पौष्टिक माने जाने वाले इस अनाज में कैल्शियम, फाइबर आयरन की मात्रा गेहूं से कहीं ज्यादा होती है। रागी से बने लड्डू को आयुर्वेद में शक्ति और शुद्धता का प्रतीक कहा गया है। इसी वजह से महाकाल नगरी उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में रागी के लड्डू को भोग लगाने और प्रसाद के रूप में बिक्री करने रखा गया है। मंदिर समिति के मुताबिक महाकाल का प्रसाद केवल आस्था नहीं बल्कि, जीवनशक्ति देने वाला भी होना चाहिए। रागी लड्डू इसी से प्रेरित है। आने वाले समय में ऐसे ही पारंपरिक प्रसाद भी महाकाल के भोग में शामिल हो सकते हैं।

महाकाल को लगा पहला भोग

दीवाली (Diwali 2025) से एक दिन पहले यानी अमावस्या की पूर्व संध्या पर विशेष पूजन के दौरान महाकाल को रागी के लड्डुओं का पहला भोग लगाया गया। यह भोग परंपरागत पंचामृत के साथ महाकाल को अर्पित किया गया।

क्या है रागी का लड्डू का प्रसाद

रागी को सरकार ने श्री अन्न के रूप मेें मान्यता दी है। पौष्टिक होने के कारण सरकार श्री अन्न के उपयोग को बढ़ावा देने के कई प्रयास कर रही है। श्री महाकाल मंदिर में रागी के लड्डू का प्रसाद भी इसी प्रयासों का हिस्सा है। रागी का लड्डू शुद्ध देसी घी में रागी आटे की सिंकाई कर बनाया जा रहा है। आटा सेंकने के बाद इसमें गुड़ और ड्रायफ्रूट्स मिलाकर लड्डू बनाए जाते हैं। मंदिर समिति सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने बताया आम दर्शनार्थियों को यह प्रसाद 400 रुपए किलो के भाव से मंदिर के लड्डू प्रसाद काउंटर से मिलेगा। फिलहाल 100, 200  500 ग्राम की पैकिंग में तैयार किया जा रहा है।

आसपास के गांवों से आएगी रागी

मंदिर (Mahakaleshwar Mandir Ujjain) समिति का उद्देश्य न केवल भक्तों को सात्विक प्रसाद देना है, बल्कि स्थानीय किसानों को बढ़ावा देना भी है, ये आसपास के गांवों में रागी की खेती करते हैं। इन्हीं से रागी खरीदी जाएगी। बता दें कि रागी को बेहद पौष्टिक अनाज में शामिल किया जाता है। स्वास्थ्यवर्धक रागी बीपी, ब्लड शुगर लेवल, वजन को कंट्रोल रखने में मदग करती है। वहीं ये श्रीअन्न कैल्शियम रिच फूड में गिना जाता है।

नए अन्नक्षेत्र भवन में बन रहे है रागी लड्डू

रागी के लड्डुओं का निर्माण नए अन्नक्षेत्र भवन की दूसरी मंजिल पर किया जा रहा है। इसके लिए राजस्थान के हलवाइयों को बुलाया था। ट्रेनिंग के बाद अब स्थानीय हलवाई ही इसे तैयार कर रहे हैं। मंदिर समित ने इसके लिए करीब 20 लोग आउटसोर्स कंपनी के जरिए नियुक्त किए हैं।

अभी तक मिलता था बेसन का लड्डू जिसकी देश -विदेश में मांग

महाकाल मंदिर में अभी तक बेसन का लड्डू प्रसाद मिलता रहा है। जो सिर्फ देशभर में ही नहीं, बल्कि विदेशों से आए भक्तों की भी पहली पसंद है। त्योहारों और विशेष आयोजनों पर लड्डुओं की मांग और ज्यादा बढ़ जाती है, इसलिए समिति अतिरिक्त स्टॉक पहले से तैयार रखती है। यह लड्डू भी मंदिर काउंटर पर उपलब्ध रहेगा। यह लड्‌डू चिंतामन गणेश स्थित लड्डू यूनिट पर तैयार किया जाता है। लड्डू प्रसाद बनाने के लिए जरूरी सामग्री टेंडर प्रक्रिया से खरीदी जाती है। इसमें देसी घी, चने की दाल, रवा और ड्रायफ्रूट शामिल होते हैं। हर सामान की गुणवत्ता जांची जाती है। यह जांच खाद्य विभाग की टीम करती है। अगर कोई सामग्री खराब या मानक से कम होती है, तो उसे तुरंत वापस लौटा दिया जाता है। बेसन बनाने के लिए पहले सूखी चने की दाल खरीदी जाती है। उसे अच्छी तरह साफ किया जाता है, फिर मंदिर परिसर में ही चक्की से पीसकर बेसन तैयार किया जाता है। रवा सीधा फैक्ट्री से आता है। देसी घी सांची (उज्जैन दुग्ध संघ) से खरीदा जाता है। काजू, किशमिश और इलायची जैसी चीजें भी अच्छी तरह जांचने के बाद ही इस्तेमाल की जाती हैं।

-हरिओम राय
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