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1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे 4 नए लेबर कोड्स: अब 5 नहीं, सिर्फ 1 साल की सर्विस पर मिलेगी ग्रेच्युटी

सरकार जल्द प्री-पब्लिश करेगी मसौदा नियम; 50 करोड़ से ज्यादा श्रमिकों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में श्रम कानूनों को सरल और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट मिनिस्टर मनसुख मांडविया ने बुधवार को घोषणा की कि चार नए लेबर कोड्स के ड्राफ्ट रूल्स जल्द ही प्री-पब्लिश कर दिए जाएंगे, जिसके बाद ये कानून अगले वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2026) से पूरे देश में लागू हो जाएंगे।

इन कोड्स के लागू होने से देश के 50 करोड़ से अधिक संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के अधिकारों, वेतन और सामाजिक सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे।


क्या हैं चार नए लेबर कोड्स?

केंद्र सरकार ने 29 पुराने और जटिल केंद्रीय श्रम कानूनों को मिलाकर चार सरल कोड्स में बदल दिया है:

  1. कोड ऑन वेजेज 2019 (मजदूरी संहिता)

  2. इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020 (औद्योगिक संबंध संहिता)

  3. कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020 (सामाजिक सुरक्षा संहिता)

  4. ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड 2020 (व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता)

चूँकि श्रम ‘समवर्ती विषय’ है, इसलिए राज्यों को भी अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार नियमों में मामूली बदलाव करते हुए इन्हें अधिसूचित करना होगा।


नए लेबर कोड्स में होने वाले 5 बड़े बदलाव

नए नियमों से कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे, जबकि कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ेगी:

1. ग्रेच्युटी के नियम बदले: 1 साल की सर्विस पर लाभ

  • सेवा की अवधि: अब कर्मचारी को 5 साल की जगह सिर्फ 1 साल की नौकरी पूरी करने पर भी ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा।

  • टैक्स-फ्री लिमिट: टैक्स-फ्री ग्रेच्युटी की सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख कर दी गई है।

  • देरी पर जुर्माना: नियोक्ता (Employer) को ग्रेच्युटी 30 दिनों के अंदर देनी होगी। देरी होने पर 10% सालाना ब्याज लगेगा और मुआवजा दोगुना तक हो सकता है।

  • नियम: एक दिन में 9 घंटे या हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम करने पर कर्मचारी को दोगुना दर पर भुगतान (Double Rate) मिलेगा।

  • सुविधा: वर्कर्स को पैसे के बजाय कंपेंसेटरी ऑफ (छुट्टी) लेने का विकल्प भी मिल सकता है।

1 साल की नौकरी पर कितनी ग्रेच्युटी मिलेगी?

ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन करने का फॉर्मूला वही है…

ग्रेच्युटी = अंतिम बेसिक सैलरी × (15/26) × कुल सर्विस (साल में)

मान लीजिए किसी कर्मचारी की अंतिम बेसिक सैलरी 50,000 रुपए है और वह 1 साल काम करके नौकरी छोड़ देता है तो ग्रेच्युटी इस हिसाब से मिलेगी…

50,000 × (15/26) × 1 = 28,847 रुपए

यानी एक साल की नौकरी पर कर्मचारी को लगभग 28,800 रुपए तक की ग्रेच्युटी मिल सकती है।

ग्रेच्युटी क्या होती है?

ग्रेच्युटी कंपनी की तरफ से अपने कर्मचारियों को दी जाने वाली एक आर्थिक सहायता है, जिसे एक तरह से सराहना राशि भी कहा जा सकता है। यह आपकी सर्विस और सैलरी के आधार पर तय होती है।

3. लंबी मैटरनिटी और पैटरनिटी लीव

  • मैटरनिटी लीव: महिलाओं के लिए मैटरनिटी लीव को 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दिया गया है।

  • पैटरनिटी लीव: पहली बार पुरुषों के लिए 15 दिन की पैटरनिटी लीव और अडॉप्शन लीव भी लागू की गई है।

  • अर्न्ड लीव: हर 20 दिन काम करने पर 1 दिन की पेड लीव मिलेगी। सालाना अर्न्ड लीव को 15 से बढ़ाकर 30 दिन किया गया है (1 साल की सर्विस के बाद)।

4. गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी

  • दायरा: असंगठित क्षेत्र के श्रमिक (Unorganized Workers) और गिग वर्कर्स (जैसे फूड डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर) को पहली बार सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाया गया है।

  • लाभ: इन्हें हेल्थ इंश्योरेंस, एक्सीडेंट कवर और जीवन बीमा जैसे लाभ मिलेंगे।

  • कंपनी का योगदान: एम्प्लॉयर्स को लाइफ और डिसेबिलिटी कवर (ईडीएलआई स्कीम) के लिए वेज का 0.65% कंट्रीब्यूट करना अनिवार्य होगा।

5. फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयमेंट को समान अधिकार

  • समान बेनिफिट: 3 महीने की सर्विस पूरी करने के बाद फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयीज (निश्चित अवधि के लिए काम करने वाले) को भी स्थायी कर्मचारियों के बराबर ही सभी लाभ (ग्रेच्युटी, लीव आदि) मिलेंगे।

लेबर मिनिस्ट्री के अनुसार, इन कोड्स से ‘बिजनेस ईज’ (व्यापार करने में आसानी) बढ़ेगी, जबकि श्रमिकों के अधिकार मजबूत होंगे। हालांकि, कंपनियों का कंट्रीब्यूशन और पेनल्टी का खर्च बढ़ने की उम्मीद है।

देशव्यापी लैंड पुलिंग कानून हो पूरी तरह समाप्त

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