
उज्जैन। रविवार 21 sep. 2025 को सर्वपितृमोक्ष अमावस्या के अवसर पर भूतों का मेला दिन भर चलता रहा। उज्जैन में आस्था और विश्वास का अद्भुत नजारा देखने को मिला। शिप्रा नदी के तट, खासकर रामघाट पर, हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। उन्होंने अपने दिवंगत पितरों को याद करते हुए स्नान, तर्पण और पिंडदान जैसे श्राद्ध कर्म किए। घाट पर दान-पुण्य का सिलसिला भी दिन भर चलता रहा।
इस दिन, सिद्धवट घाट और गया कोठा पर भी भारी भीड़ देखी गई। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे, ताकि किसी तरह की असुविधा न हो।

स्कंद पुराण में भी इस दिन के महत्व का उल्लेख
शहर से कुछ दूर, केडी पैलेस के 52 कुंडों पर एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। मान्यता के अनुसार, बुरी आत्माओं से मुक्ति पाने के लिए लोग यहां डुबकी लगाने आते हैं। इसे भूतड़ी अमावस्या’ भी कहा जाता है, और यही वजह है कि यहां एक तरह का ‘भूतों का मेला’ लगता है। इस दौरान कुछ लोग पूजा के समय अजीबोगरीब हरकतें करते भी दिखाई दिए। स्कंद पुराण में भी इस दिन के महत्व का उल्लेख है। कहा जाता है कि इन कुंडों में स्नान करने से आत्मा और शरीर से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। केडी पैलेस में सूर्य कुंड, ब्रह्म कुंड और सूर्य मंदिर जैसे पवित्र स्थल भी मौजूद हैं, जो इस परंपरा को और भी खास बनाते हैं।



