
उज्जैन: गुरुकुल शिक्षा यात्रा से द्वापर युग का इतिहास एक बार फिर जीवंत होने जा रहा है। भगवान श्री कृष्ण ने जिस मार्ग से अपनी शिक्षा ग्रहण करने के लिए मथुरा से उज्जैन तक की यात्रा की थी, ठीक उसी ऐतिहासिक मार्ग पर 5 से 9 अक्टूबर तक भव्य ‘श्री कृष्ण गुरुकुल शिक्षा यात्रा’ निकाली जाएगी। इस यात्रा का संयोजन तीर्थ पुरोहित महासंघ, धर्म यात्रा महासंघ और विश्व हिंदू परिषद कर रहे हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करेगा, बल्कि उज्जैन की शिक्षा नगरी की प्राचीन पहचान को भी देश भर में फिर से स्थापित करेगा।
यात्रा संयोजक सुरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने द्वापर युग में 11 वर्ष 7 दिन की आयु में कंस का वध करने के बाद अपनी शिक्षा के लिए मथुरा से उज्जैन की यात्रा की थी। यह यात्रा उसी ऐतिहासिक मार्ग का अनुसरण करेगी, जो मथुरा से जयपुर, कोटा, झालावाड़, रणथंभौर और आगर होते हुए उज्जैन आता है।
108 ज्ञान के प्रतीक, 108 यात्री
यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ज्ञान की खोज का प्रतीक है। संयोजक सुरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि भगवान कृष्ण ने अपनी शिक्षा के दौरान 108 दिनों में 108 तरह के ज्ञान प्राप्त किए थे—जिसमें 4 वेद, 6 शास्त्र, 16 विद्या, 18 पुराण और 64 कलाएं शामिल थीं।
- यात्रियों का चयन: इसी 108 शिक्षाओं के प्रतीक के रूप में 108 यात्रियों को इस यात्रा के लिए चुना गया है।
- सफर का अंदाज़: सभी यात्री अपने निजी फोर-व्हीलर वाहनों से यह 5 दिन की यात्रा करेंगे। उनके चाय, नाश्ता, भोजन और विश्राम की व्यवस्था पूरी तरह निःशुल्क रहेगी।
मथुरा से महाकाल तक का ऐतिहासिक रूट
4 अक्टूबर को मां यमुना मैया की आरती और पूजन के साथ यात्रा का शुभारंभ होगा। एक रथ पर भगवान कृष्ण और बलराम की मूर्तियां विराजित रहेंगी।
- प्राचीन मार्ग का अनुसरण: यात्रा उसी प्राचीन मार्ग पर चलेगी, जिस पर 11 वर्ष 7 दिन की आयु में भगवान कृष्ण कंस का वध करने के बाद शिक्षा के लिए उज्जैन आए थे।
- प्रमुख पड़ाव: मथुरा से शुरू होकर, यह यात्रा जयपुर, कोटा, झालावाड़, और रणथंभौर होते हुए आगे बढ़ेगी।
- एमपी में एंट्री: 8 अक्टूबर को यह यात्रा मध्य प्रदेश के आगर में प्रवेश करेगी। सभी पड़ाव स्थानों पर धर्म सभाएं आयोजित की जाएंगी।
उज्जैन में होगा भव्य समापन
यात्रा 9 अक्टूबर को सुबह 9 बजे उज्जैन में प्रवेश करेगी और सीधे महर्षि सांदीपनि आश्रम पहुँचेगी।
- सीएम करेंगे अगवानी: आश्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं यात्रा का स्वागत और अगवानी करेंगे।
- धर्म सभा: सांदीपिन आश्रम में एक विशाल धर्म सभा का आयोजन होगा, जिसे सीएम सहित कई संत महात्मा संबोधित करेंगे।
- समापन: अंत में यह यात्रा श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुँचकर विधिवत संपन्न होगी।



