उज्जैन

त्यौहार के दिन शव वाहन में देरी से आक्रोशित लोगों ने नगर निगम अधिकारी को थप्पड़ मारा

नगर निगम कर्मचारियों ने आक्रोशित होकर चक्काजाम किया

उज्जैन: नगर निगम के फायर ब्रिगेड दफ्तर में रविवार शाम उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शव वाहन की बुकिंग को लेकर हुए विवाद में एक नगर निगम अधिकारी पर हाथ उठा दिया गया।

आरोप है कि कुछ लोगों ने फायर अधिकारी लक्ष्मण प्रसाद साहू के साथ न केवल बदसलूकी की, बल्कि उन्हें थप्पड़ भी मार दिया, जिससे उनका चश्मा टूट गया। फायर ब्रिगेड प्रभारी लक्ष्मण प्रसाद साहू ने बताया कि यह पूरा विवाद शव वाहन की टाइमिंग को लेकर शुरू हुआ। नगर निगम डिप्टी कमिश्नर पवन कुमार सिंह ने घटना की निंदा की है और पुलिस जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है। फिलहाल, पुलिस मामले की तह तक जाने के लिए दोनों पक्षों के बयानों की जाँच कर रही है।

वीडियो व्यक्त कर रहा सच्चाई

घटना के वक्त का एक वीडियो भी रात तक वायरल हुआ है। जिसमें बताया गया है कि कैंपस में तीन शव वाहन खड़े होने के बाद भी लोगों को शव वाहन देने से इंकार किया जा रहा था। उनके साथ अभद्रता की गई। इसके बाद आक्रोश भड़का। त्यौहार के वक्त घर में माैत हो जाने के कारण लोग समय से पहले शवयात्रा ले जाना चाहते थे। प्रभारी इन लोगों को समय के पहले आने का कहकर वाहन देने से मना कर रहे थे।

विवाद की वजह: समय के पहले वाहन लेने पहुंचे

पार्षद राजेश बाथम के सहयोगी ने शव वाहन शाम 6 बजे के लिए बुक किया था, लेकिन वे शाम 4 बजे ही दफ्तर पहुँच गए और वाहन तुरंत ले जाने की जिद करने लगे। जब साहू ने उन्हें समझाने की कोशिश की, तो उनके साथ अभद्रता की गई और एक युवक ने उन्हें थप्पड़ जड़ दिया। साहू की शिकायत पर पार्षद बाथम और तीन अन्य लोगों के खिलाफ कोतवाली थाने में FIR दर्ज की गई है।

सुरक्षा की मांग पर निगम कर्मचारियों का ‘चक्काजाम’

इस घटना से नाराज नगर निगम के कर्मचारी अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए। रात करीब 8 बजे कर्मचारियों ने आगर रोड पर वाहन खड़े कर चक्काजाम कर दिया, जिससे करीब 45 मिनट तक यातायात बाधित रहा। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी ड्यूटी के दौरान इस तरह की मारपीट स्वीकार्य नहीं है।

पार्षद सहयोगी का पलटवार: ‘जातिसूचक शब्द’ का आरोप

मामले में पार्षद प्रतिनिधि आनंद सुनेरे ने मारपीट के आरोप से इनकार कर दिया है और अधिकारी पर ही पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि त्योहार के चलते वे वाहन जल्दी लेने गए थे, लेकिन दफ्तर के कर्मचारी जानबूझकर वाहन नहीं दे रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया था।

– हरिओम राय

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