मध्यप्रदेश

जबलपुर के धान घोटाला में उज्जैन की 5 मिलें शामिल; स्कूटर-कार से धान परिवहन का रिकॉर्ड

चावल मिल संचालकों पर 7.83 करोड़ के चावल घोटाला का आरोप

उज्जैन। सरकारी राशन वितरण के लिए तैयार किए जाने वाले चावल निर्माण से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. रवि राय ने गंभीर आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जबलपुर से उज्जैन के मिल संचालकों को आवंटित 34 हजार क्विंटल धान, जिसका अनुमानित मूल्य 7 करोड़ 83 लाख 35 हजार 700 रुपए है, उसे जबलपुर में ही बेच दिया गया और उज्जैन की मिलों ने सिर्फ कागजों पर चावल का निर्माण दिखाया।

जबलपुर जांच में पांच मिलें दोषी

डॉ. रवि राय ने कहा कि मध्य प्रदेश की धान/चावल मिलिंग नीति के तहत पूरे प्रदेश के मिलरों द्वारा की गई गड़बड़ी का खुलासा जबलपुर में हुई जांच में हुआ। जबलपुर कलेक्टर की जांच में उज्जैन की पांच प्रमुख मिलें दोषी पाई गईं:

  • श्री कृष्णा राइस एंड पोहा इंडस्ट्रीज
  • श्रीराम एग्रो इंडस्ट्रीज
  • मे. शिप्रा इंटरप्राइजेस
  • रुक्मणी राइस एवं पोहा इंडस्ट्रीज
  • मारुति ट्रेडर्स

इन फर्मों पर लगभग 37 हजार क्विंटल धान की हेराफेरी का आरोप है। सभी के खिलाफ जबलपुर के विभिन्न थानों में धान की हेराफेरी के चार-चार प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिसमें से अधिकतर संचालक जेल यात्रा भी कर चुके हैं।

स्कूटर, कार से धान परिवहन का रिकॉर्ड

जांच में धान परिवहन के रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल उठे हैं। जबलपुर कलेक्टर की जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि धान उज्जैन नहीं पहुंचा। मिल संचालकों ने परिवहन के लिए जो नंबर दिए थे, वे स्कूटर, कार और ऐसे ट्रकों के थे जो उज्जैन आए ही नहीं। इससे स्पष्ट है कि शासन से प्राप्त धान उज्जैन नहीं आया, फिर भी कागजों पर चावल का निर्माण दिखाया गया।

उज्जैन कमेटी की रिपोर्ट पर सवाल

जबलपुर कलेक्टर की शिकायत के बाद, उज्जैन कलेक्टर ने 11 अप्रैल 2025 को एक जांच कमेटी (जिसमें जिला खाद्य नियंत्रक, उपायुक्त सहकारिता आदि अधिकारी शामिल थे) का गठन किया।  कमेटी ने 5 अगस्त 2025 को अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें स्पष्ट कहा गया कि मिल संचालकों द्वारा जमा किए गए चावल का स्रोत स्पष्ट किया जाना संभव नहीं है और मिल संचालकों के बयानों को विश्वसनीय नहीं माना गया है।

दोषी होते हुए भी कार्रवाई का प्रस्ताव नहीं

डॉ. राय ने आरोप लगाया कि गंभीर गड़बड़ी सामने आने और कमेटी द्वारा चावल के स्रोत को अविश्वसनीय बताए जाने के बावजूद, उज्जैन में किए गए इस बड़े घोटाले के संदर्भ में कलेक्टर को पेश रिपोर्ट में मिल संचालकों पर किसी प्रकार की कार्रवाई करने संबंधी कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया।

उच्च स्तरीय जांच और FIR की मांग

नेता प्रतिपक्ष डॉ. रवि राय ने मुख्यमंत्री के शहर में हुए इस 7.83 करोड़ रुपए के घोटाले की उच्च स्तर पर जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मुख्य सचिव और कलेक्टर उज्जैन से किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी से जांच कराने हेतु आग्रह किया है। साथ ही, उन्होंने उपरोक्त सभी पाँच मिल संचालकों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज करने और इस मामले में जांचकर्ता अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करने की मांग की है।

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