
उज्जैन, समाचार आज। महाकाल की नगरी में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उज्जैन पुलिस ने इस बार डंडे के बजाय ‘डेटा’ का सहारा लिया है। पहली बार हाईटेक ‘क्राउड मैनेजमेंट’ का प्रयोग करते हुए पुलिस ने गूगल मैप के एल्गोरिदम में ही बदलाव कर दिया है। अब शहर में घुसने वाले बाहरी श्रद्धालुओं को गूगल मैप संकरी गलियों या जाम वाले रास्तों के बजाय सीधे पार्किंग वाले रूट दिखा रहा है। इसके अलावा भीड़ नियंत्रण के लिए एआई सुरक्षा चक्र भी बनाया है। जिसके तहत प्रमुख मार्गों पर ड्रोन के जरिए निगरानी की गई।
IIT धनबाद के बीटेक और IPS राहुल देशमुख की रणनीति
इस पूरे डिजिटल मिशन की कमान सीएसपी राहुल देशमुख (IPS) संभाल रहे हैं। आईआईटी धनबाद से बीटेक कर चुके देशमुख ने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए गुरुग्राम की एक निजी आईटी कंपनी और पुलिस की 10 सदस्यीय टीम के साथ मिलकर यह सिस्टम तैयार किया है।
कैसे काम करता है यह ‘डिजिटल चक्रव्यूह’?
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रियल-टाइम मॉनिटरिंग: टीम सुबह 8 से रात 10 बजे तक गूगल डेटा पर नजर रखती है।
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रूट ब्लॉकिंग: जैसे ही किसी भीड़ भरे इलाके या सड़क (जैसे मालीपुरा, तोपखाना या गुदरी चौराहा) पर वाहनों का दबाव बढ़ता है, टीम तकनीकी बदलाव कर उस मार्ग को गूगल मैप से अस्थायी रूप से ‘गायब’ कर देती है।
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स्मार्ट नेविगेशन: अब जब भी कोई श्रद्धालु ‘महाकाल मंदिर’ सर्च करता है, तो मैप उसे शहर के अंदरूनी जाम में फंसाने के बजाय सीधे चारधाम या हरसिद्धि स्मार्ट पार्किंग वाले चौड़े रास्तों पर ले जाता है।
आंकड़ों में समझिए चुनौती
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श्रद्धालुओं की संख्या: रोजाना 2 से 3 लाख (1 जनवरी को 6 लाख पार)।
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वाहनों का दबाव: सामान्य दिनों में 6 हजार फोर-व्हीलर आते हैं, जो अभी बढ़कर 12 हजार हो गए हैं।
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निगरानी टीम: 10 सदस्यों की स्पेशल टीम लगातार काम कर रही है।
5 ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से हो रही भीड़ की हेड-काउंटिंग
भीड़ नियंत्रण के लिए उज्जैन पुलिस ने एक और प्रयोग 1 जनवरी 2026 को किया है। ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) और अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक को मैदान में उतारा है। पहली बार उज्जैन में सुरक्षा और क्राउड मैनेजमेंट के लिए ऐसी हाईटेक प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे न केवल भीड़ की गिनती की जा रही है, बल्कि संभावित खतरों और जाम की रियल-टाइम जानकारी भी मिल रही है।
ड्रोन से 20 किमी तक की लाइव फीड अफसरों के मोबाइल पर
पुलिस ने मंदिर परिसर और शहर के प्रमुख मार्गों पर 5 अत्याधुनिक ड्रोन तैनात किए हैं।एक ड्रोन लगभग 4 किलोमीटर के दायरे को कवर करता है, जिससे कुल 20 किलोमीटर तक के क्षेत्र की लाइव फीड मिलती है। इन ड्रोनों की लाइव फीड सीधे महाकाल मंदिर के कंट्रोल रूम के साथ-साथ पुलिस अधीक्षक के मोबाइल पर भी उपलब्ध है, जिससे वे कहीं से भी स्थिति पर नजर रख पा रहे हैं।
AI सिस्टम की 4 बड़ी खासियतें
भोपाल की ‘दृष्टि एआई’ और ‘इनसाइट एविएशन’ की टीम के सहयोग से संचालित यह सिस्टम केवल वीडियो नहीं दिखाता, बल्कि डेटा का विश्लेषण भी करता है:
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हेड काउंटिंग: यह सिस्टम रियल-टाइम में बता रहा है कि एक निश्चित समय में कितने श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं।
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पैनिक डिटेक्शन: यदि भीड़ में अचानक कोई भगदड़ या असामान्य हलचल (Panic) होती है, तो एआई तुरंत अलर्ट जारी कर देता है।
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सिंगल पॉइंट जाम: भीड़ के एक ही जगह जमा होने या ‘बॉटलनेक’ बनने की स्थिति में पुलिस को तुरंत सूचना मिल जाती है।
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ट्रैफिक ट्रैकिंग: इंदौर और देवास रोड पर तैनात ड्रोन वाहनों की संख्या गिन रहे हैं, जिससे शहर में आने वाले ट्रैफिक का अनुमान पहले ही लग जाता है।
इंदौर-देवास रोड पर विशेष नजर
बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के दबाव को देखते हुए इंदौर और देवास रोड पर विशेष ड्रोन पेट्रोलिंग की जा रही है। इससे वाहनों की लाइव काउंटिंग हो रही है, जिससे ट्रैफिक डायवर्जन में आसानी हो रही है।
कुंभ (सिंहस्थ 2028) के लिए ‘लिटमस टेस्ट’
सीएसपी राहुल देशमुख के अनुसार गूगल मैप एल्गोरिदम मैनेजमेंट का प्रयोग पूरी तरह सफल रहा है, इसे सिंहस्थ 2028 में बहुत बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा। इससे करोड़ों की भीड़ के दौरान भी शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू रखा जा सकेगा। वहीं 1 जनवरी पर किया गया ड्रोन का प्रयोग भी सिंहस्थ में करोड़ों की भीड़ को नियंत्रित करने के उपयोगी होगी। सिंहस्थ में एआई-ड्रोन तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग करने की योजना है।



