उज्जैनमध्यप्रदेश

उज्जैन में स्लीपर बसों पर ‘ब्रेक’: 838 बसें सिस्टम में लॉक, मानकों पर खरी उतरीं तभी मिलेंगी सड़कें

उज्जैन, समाचार आज। स्लीपर बसों में यात्रियों की जान जोखिम में डालकर सफर कराने वाले बस संचालकों पर परिवहन विभाग ने ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की है। पिछले तीन दिनों से जारी सघन जांच के बाद आरटीओ (RTO) ने उज्जैन जिले में पंजीकृत सभी 838 स्लीपर बसों को सरकारी कंप्यूटर सिस्टम में ‘लॉक’ कर दिया है। इसका मतलब है कि अब इन बसों का न तो फिटनेस बनेगा, न परमिट और न ही बीमा रिन्यू हो पाएगा।

जांच में खुली पोल: मौत के साये में सफर!

रविवार18 जनवरी 2026 को नानाखेड़ा और उन्हेल बस स्टैंड पर जब आरटीओ अमले ने बसों की जांच की, तो स्थिति भयावह मिली। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की गाइडलाइन का पालन करने वाली एक भी बस नहीं पाई गई।

  • खतरनाक बदलाव: मालिकों ने ज्यादा कमाई के लिए इमरजेंसी गेट के आगे ही स्लीपर सीटें लगा दीं।

  • सफेद हाथी साबित हुए सुरक्षा उपकरण: फायर अलार्म सिस्टम बंद मिले और ड्राइवर अलर्ट सिस्टम (जो नींद आने पर ड्राइवर को जगाता है) तो नदारद ही थे।

क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई? 

उज्जैन आरटीओ संतोष मालवीय के नेतृत्व में हुई जांच में AIS-052 बस बॉडी कोड की धज्जियां उड़ती मिलीं:

सुरक्षा मानक नियम के मुताबिक हकीकत (बसों में क्या मिला)
इमरजेंसी गेट 4 द्वार + छत पर 2 निर्गम गेट के आगे सीटें लगी मिलीं, रास्ता ब्लॉक था।
पैदल रास्ता 450 MM चौड़ा होना चाहिए मात्र 250 से 300 MM (बेहद संकरा)।
फायर सिस्टम 10 किलो का अग्निशमन यंत्र केवल 1 या 2 किलो के छोटे सिलेंडर।
ड्राइवर अलर्ट अनिवार्य (नींद/ऊँघ रोकने हेतु) लगभग सभी बसों से गायब।
बर्थ की ऊंचाई लोअर 300+50 MM / अपर 800 MM तकनीकी माप में बड़ी गड़बड़ियां मिलीं।

क्या होगा ‘लॉक’ होने का असर?

  1. टोल नाके पर पकड़: जैसे ही बस किसी टोल नाके से गुजरेगी, सिस्टम उसे ‘लॉक’ दिखाएगा और तत्काल कार्रवाई होगी।

  2. कागजी कार्रवाई ठप: बस का डेटा लॉक होने से अब इसका कोई भी दस्तावेज वैधानिक रूप से अपडेट नहीं होगा।

  3. अनिवार्य चेकिंग: बस संचालक को अब बस आरटीओ कार्यालय लाकर चेक करवानी होगी। मानक पूरे होने और बॉडी कोड दुरुस्त होने पर ही लॉक खोला जाएगा।

आरटीओ का सख्त संदेश

आरटीओ संतोष मालवीय ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई बसें बंद करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित बनाने के लिए है। 1 सितंबर 2025 से लागू नए मानकों के अनुसार, अब केवल मान्यता प्राप्त बॉडी बिल्डर ही स्लीपर बसें बना सकते हैं। घर में या निजी वर्कशॉप में बनवाई गई ‘जुगाड़ू’ बसें अब सड़कों पर नहीं चलेंगी।

-हरिओम राय, समाचार आज (samacharaaj.com)
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