
उज्जैन। । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की अचल संपत्ति, दान-दक्षिणा और आय-व्यय के लेखा-जोखा को लेकर अब अपनों ने ही सवाल खड़े करना शुरू कर दिए हैं। उज्जैन उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने विधानसभा में अतारांकित प्रश्न के जरिए मंदिर प्रबंध समिति और विभाग से मंदिर की चल-अचल संपत्ति का पूरा ब्योरा मांग लिया है। विधायक के इस कदम को मंदिर प्रबंधन की ‘घेराबंदी’ के तौर पर देखा जा रहा है।
26 फरवरी को धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग से पूछे गए सवाल के जवाब में विभाग के राज्य मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने फिलहाल संक्षिप्त जवाब दिया है। मंत्री ने कहा कि विधायक द्वारा मांगी गई जानकारी अत्यंत विस्तृत है और वर्तमान में इसे ‘एकत्रित किया जा रहा है’। जानकारी मिलते ही इसे पटल पर रखा जाएगा।

विधायक कालूहेड़ा ने उठाए ये 7 सवाल
विधायक अनिल जैन ने मंदिर की पारदर्शिता को लेकर विभाग को कठघरे में खड़ा किया है। उनके प्रमुख सवाल इस प्रकार हैं:
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मंदिर के नाम पर मध्य प्रदेश और प्रदेश के बाहर कितनी कृषि, व्यावसायिक और आवासीय भूमि दर्ज है?
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वर्तमान में मंदिर की कुल चल-अचल संपत्ति का मूल्य और विवरण क्या है?
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इन संपत्तियों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) पिछली बार कब हुआ था?
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संपत्तियों का उपयोग कौन और किस प्रकार कर रहा है?
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क्या दान देने वाले हर श्रद्धालु को पावती (Receipt) दी जाती है? यदि नहीं, तो दान का हिसाब कैसे रखा जाता है?
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वित्त वर्ष 2024-25 में मदवार आय और खर्च का पूरा विवरण क्या है?
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क्या मंदिर की आय को जिला रेडक्रॉस या कलेक्टर के माध्यम से खर्च किया जाता है? यदि हाँ, तो पिछले 5 साल का विवरण दें।
घेराबंदी या पारदर्शिता? क्या है सियासी मायने
राजनैतिक जानकारों की मानें तो यह मामला केवल ‘जानकारी’ तक सीमित नहीं है। अनिल जैन कालूहेड़ा पहली बार के विधायक हैं और महाकाल मंदिर उनके ही विधानसभा क्षेत्र में आता है। चर्चा है कि मंदिर की व्यवस्थाओं और निर्णयों में स्थानीय विधायक और उनके समर्थकों को उचित तवज्जो नहीं मिल रही है। ऐसे में विधानसभा में सवाल पूछकर उन्होंने मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन पर सीधा दबाव बनाने की कोशिश की है।
वहीं, इस मामले पर अनिल जैन कालूहेड़ा ने मीडिया को बताया कि “महाकाल मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता होनी चाहिए और जनता को पता होना चाहिए कि बाबा के दरबार की संपत्ति और दान का उपयोग किस तरह हो रहा है।”
📍 मंदिर की वर्तमान स्थिति: एक नजर में
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श्रद्धालु: ‘श्री महाकाल लोक’ बनने के बाद सालाना करीब 5 करोड़ लोग दर्शन कर रहे हैं।
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आय: मंदिर की वार्षिक आय करीब 105 करोड़ रुपये से अधिक पहुँच चुकी है।
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दान: नकद के अलावा सोना, चांदी और कीमती रत्नों का भंडार भी मंदिर के पास है।
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जमीन: उज्जैन शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मंदिर के नाम पर सैकड़ों एकड़ बेशकीमती जमीन दर्ज है।
समाचार आज (samacharaaj.com) ।



