सीवर टैंक में जहरीली गैस से दो निगमकर्मियों की मौत
सीवर टैंक में सफाई करने उतरे थे, CM ने किया 30-30 लाख की सहायता का ऐलान

इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से सोमवार 2 मार्च 2026 की शाम एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। चोइथराम मंडी गेट (जोन-13) के पास सीवर चैंबर की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से नगर निगम के दो कर्मचारियों की मौत हो गई। 25-30 फीट गहरे मौत के इस गड्ढे ने करण यादव और अजय डोडिया नाम के युवाओं की जिंदगी लील ली। घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शोक जताते हुए मृतकों के परिजनों के लिए भारी मुआवजे की घोषणा की है।
हादसे की वजह: एक पाइप निकालने की कोशिश और चली गई जान
जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम करीब 6:30 बजे नगर निगम की टीम सक्शन मशीन के जरिए नियमित सफाई कर रही थी। इसी दौरान मशीन के पाइप का एक हिस्सा चैंबर के भीतर गिर गया।
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पाइप निकालने के लिए कर्मचारी करण यादव बिना सुरक्षा उपकरणों के चैंबर में उतरा, लेकिन जहरीली गैस के कारण वह तुरंत बेहोश हो गया।
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अपने साथी को संकट में देख अजय डोडिया ने उसे बचाने के लिए चैंबर में छलांग लगा दी, लेकिन गैस इतनी घातक थी कि वह भी खुद को नहीं बचा सका।
‘अमन’ ने जान पर खेलकर शवों को निकाला
मौके पर मौजूद कुली का काम करने वाले अमन सेम ने बहादुरी का परिचय दिया। अमन ने बताया, “जब मुझे पता चला कि दो लोग अंदर डूब गए हैं, तो मैंने कमर में रस्सी बांधी और नीचे उतरा। मैंने एक कर्मचारी की बेल्ट में हुक फंसाया। उस दौरान मेरे मुंह में भी जहरीली गैस भर गई थी, जिससे दम घुटने लगा था।” पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मुख्यमंत्री की घोषणा: परिजनों को 30-30 लाख की सहायता
हादसे का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रशासन को निर्देश जारी किए हैं।
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मुआवजा: सुप्रीम कोर्ट के 2023 के दिशा-निर्देशों के आधार पर दोनों मृतक कर्मचारियों के परिजनों को 30-30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
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जांच के आदेश: मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और इसकी उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
प्रशासन और निगम की सफाई: “बिना बताए उतरे कर्मचारी”
इंदौर नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारी बिना किसी सूचना या सुरक्षा प्रोटोकॉल के चैंबर में उतरे थे। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या कर्मचारियों के पास जरूरी सेफ्टी गियर्स (गैस मास्क, ऑक्सीजन किट) मौजूद थे? क्या शाम 5 बजे ड्यूटी खत्म होने के बाद भी उन पर काम का दबाव था?
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और हकीकत
यह हादसा फिर से याद दिलाता है कि मशीनीकृत सफाई के दौर में भी मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से सफाई) के जोखिम खत्म नहीं हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सीवर मौतों के मामले में नगर निगम की सीधी जवाबदेही होती है।
समाचार आज (samacharaaj.com) की विशेष रिपोर्ट।



