
उज्जैन। धार्मिक पर्यटन और विकास के मामले में नित नए आयाम स्थापित कर रही बाबा महाकाल की नगरी अब हवाई ब्रिज यानी ‘एलिवेटेड ब्रिज’ के युग में प्रवेश करने जा रही है। शहर की यातायात व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों (सिंहस्थ-2028) के अनुरूप ढालने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) के सिंहस्थ डिवीजन ने दो विशाल एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है। विभाग ने इसके लिए आधिकारिक टेंडर जारी कर दिए हैं, जिनकी बिड 15 अप्रैल 2026 को खोली जाएगी।
दो कॉरिडोर से बदलेगी पुराने शहर की सूरत
टेंडर प्रक्रिया के अनुसार, शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों को जोड़ने के लिए दो अलग-अलग एलिवेटेड ब्रिज का निर्माण किया जाएगा:
1. मकोड़ियाआम से हरिफाटक (फोरलेन कॉरिडोर)
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लंबाई: 3.5 किलोमीटर।
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रूट: यह ब्रिज मकोड़ियाआम (इंदिरानगर चौराहा) से शुरू होकर इंदौरगेट होते हुए सीधे हरिफाटक ओवरब्रिज तक आएगा।
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विशेषता: यह पूरी तरह फोरलेन होगा और इसके निर्माण में नीचे की ओर सर्विस रोड का प्रावधान भी किया गया है ताकि स्थानीय यातायात बाधित न हो।
2. निकास से इंदौरगेट (टू-लेन कॉरिडोर)
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लंबाई: 1.732 किलोमीटर।
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रूट: यह ब्रिज निकास चौराहे से शुरू होकर नई सड़क, फव्वारा चौक और दौलतगंज चौराहे के ऊपर से होता हुआ इंदौरगेट पर आकर मिलेगा।
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विशेषता: पुराने शहर के संकरे इलाकों के ऊपर से गुजरने वाला यह ब्रिज टू-लेन होगा, जिससे व्यावसायिक क्षेत्रों में जाम की समस्या खत्म हो जाएगी।
₹416 करोड़ का प्रोजेक्ट, 15 अप्रैल को ‘फैसला’
सिंहस्थ डिवीजन द्वारा जारी इन दोनों ब्रिज की कुल अनुमानित लागत 416.37 करोड़ रुपये आंकी गई है।
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टेंडर प्रक्रिया: इच्छुक कंपनियां 15 अप्रैल तक आवेदन कर सकती हैं। टेंडर का मूल्य 50,000 रुपये रखा गया है।
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निर्माण का समय: बिड खुलने और योग्य फर्म के चयन के बाद जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा, जिसे सिंहस्थ-2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य है।
जाम से मिलेगी मुक्ति: 15 से अधिक चौराहों पर नहीं रुकना होगा
ये ब्रिज क्यों जरूरी हैं, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि उज्जैन में वर्तमान में सुबह से रात तक ट्रैफिक का भारी दबाव रहता है।
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इंदिरानगर जाने वालों को राहत: वर्तमान में हरिफाटक से इंदिरानगर जाने के लिए गदापुलिया, इंदौरगेट, रेलवे स्टेशन, देवासगेट, चामुंडा माता, चरक अस्पताल, कोयलाफाटक, गाड़ी अड्डा और चिमनगंज मंडी जैसे एक दर्जन से अधिक व्यस्ततम चौराहों को पार करना पड़ता है। ब्रिज बनने के बाद यह सफर बिना किसी क्रॉसिंग के मिनटों में पूरा होगा।
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पुराना शहर होगा जाम मुक्त: निकास से हरिफाटक जाने वाले वाहन चालकों को तेलीवाड़ा, कंठाल, नई सड़क और दौलतगंज के जाम में नहीं फंसना होगा।
सिंहस्थ-2028 के लिए मील का पत्थर
2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व के दौरान शहर में आने वाली करोड़ों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ये ब्रिज ‘लाइफलाइन’ साबित होंगे। ये न केवल शहर की आंतरिक कनेक्टिविटी को सुधारेंगे, बल्कि उज्जैन को एक आधुनिक मेट्रो सिटी का लुक भी देंगे।
एलिवेटेड ब्रिज का निर्माण पुराने उज्जैन के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। हालांकि, निर्माण के दौरान होने वाली असुविधा से निपटने के लिए प्रशासन को एक ठोस ‘ट्रैफिक डायवर्जन प्लान’ पर भी काम करना होगा।



