
उज्जैन: संक्रांति के पावन पर्व पर धर्मधानी उज्जैन के ‘श्री महाकाल महालोक’ में पांच दिवसीय महाकाल महोत्सव की शानदार शुरुआत 14 जनवरी 2026 को हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भगवान महाकाल का पूजन कर इस महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। 18 जनवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में भक्ति, कला और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
CM की बड़ी घोषणाएं: भोपाल जैसा ‘वन मेला’ अब उज्जैन में भी
शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैनवासियों के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं:
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वन मेला: भोपाल की तर्ज पर अब उज्जैन में भी ‘वन संपदा’ का वन मेला आयोजित किया जाएगा।
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वाहन छूट: ग्वालियर मेले की तरह उज्जैन के व्यापार मेले में भी वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर मिलने वाली छूट जारी रहेगी।
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विकास कार्य: 25 जनवरी 2026 को सीएम दोबारा उज्जैन आएंगे और हरिफाटक ब्रिज को सिक्स लेन करने, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और सिंहस्थ बायपास रोड का भूमि पूजन करेंगे।
डिजिटल महाकाल: नई वेबसाइट और पोर्टल लॉन्च
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मुख्यमंत्री ने महाकाल मंदिर की नई आधिकारिक वेबसाइट (www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in) और नए दान पोर्टल का शुभारंभ किया। इस वेबसाइट के जरिए भक्त घर बैठे कई सुविधाएं पा सकेंगे:
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भस्म आरती, शीघ्र दर्शन, पूजन और अतिथि निवास (भक्त निवास) की ऑनलाइन बुकिंग।
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दान के लिए नया और सुरक्षित पोर्टल।
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मंदिर का प्रामाणिक इतिहास और उज्जैन के अन्य धार्मिक स्थलों का विवरण।
- ज्ञान एवं सूचना आधारित सामग्री
- उज्जैन नगरी की प्राचीन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता।
- श्री महाकालेश्वर मंदिर का विस्तृत एवं प्रमाणिक इतिहास।
- महाकाल मंदिर परिसर में स्थित अन्य मंदिरों की जानकारी।
- उज्जैन में स्थित प्रमुख छोटे-बड़े मंदिरों का विवरण।
- धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्यों का समावेश।
शंकर महादेवन की ‘शिवोऽहम्’ प्रस्तुति से गूंजा महाकाल लोक
महोत्सव की पहली शाम पद्मश्री गायक शंकर महादेवन और उनके पुत्रों (सिद्धार्थ और शिवम) के नाम रही। उन्होंने ‘शिवोऽहम्’ शीर्षक से विशेष संगीतमय प्रस्तुति दी, जिससे पूरा परिसर शिव भक्ति में सराबोर हो गया।
शंकर महादेवन ने मंदिर की व्यवस्थाओं की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “महाकाल मंदिर का मैनेजमेंट, सफाई और व्यवस्थाएं किसी इंटरनेशनल लेवल के कार्यक्रम जैसी हैं।” उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर ‘शिव भोला भंडारी’ भजन भी गाया।
जनजातीय और लोक कलाओं का संगम
‘स्वाभिमान पर्व–2026’ के तहत आयोजित इस महोत्सव में हर दिन शाम 4 से 6 बजे तक त्रिवेणी संग्रहालय में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इनमें प्रमुख जनजातीय नृत्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे:
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भड़म नृत्य: भारिया जनजाति (छिंदवाड़ा)
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ठाठ्या नृत्य: गोंड जनजाति (बैतूल)
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काठी नृत्य: (हरदा)
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भगोरिया नृत्य: भील जनजाति (धार)



