आरटीओ बनाम बस ऑपरेटर : “जब आपने ही पास की थीं बसें, तो अब अवैध क्यों?”
RTO की कार्रवाई के खिलाफ लामबंद हुए बस ऑपरेटर: उज्जैन में जुटी प्रदेशभर की एसोसिएशन;

उज्जैन, समाचार आज। प्रदेश सरकार द्वारा 2/2 स्लीपर कोच बसों पर अचानक लगाई गई रोक के बाद अब प्रदेशभर के बस ऑपरेटरों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार 31 जनवरी 2026 को उज्जैन में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में टूरिस्ट बस ऑपरेटरों ने निर्णय लिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर सबसे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात करेंगे। यदि वहां से कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो प्रदेश व्यापी आंदोलन किया जाएगा और कोर्ट की शरण ली जाएगी।
रातों-रात 839 बसों को पोर्टल पर ब्लॉक किया
स्लीपर कोच बसों पर आरटीओ (RTO) की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के बाद अब टूरिस्ट बस ऑपरेटरों ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। उज्जैन आरटीओ ने पिछले महीने जनवरी 2016 में रातों-रात 839 बसों को पोर्टल पर ब्लॉक कर दिया था। इसके विरोध में एसोसिएशन ने जंग शुरू की है। संचालकों का सीधा सवाल है कि जो बसें सालों से आरटीओ द्वारा पास की जा रही थीं, वे अचानक अनफिट कैसे हो गईं?
6 साल तक ‘ओके’ थी बसें, अब 10 लाख का बोझ
टूरिस्ट बस ऑपरेटर एसोसिएशन इंदौर के अध्यक्ष अनिल भावसार ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि 2/2 स्लीपर बसों के नियम 2019 से प्रभावी हैं, फिर भी आरटीओ ने पिछले 6 सालों में इनका भौतिक सत्यापन (Physical Check) कर फिटनेस पास किया और परमिट जारी किए। कई बसों का रजिस्ट्रेशन तो दिसंबर 2025 तक वैध है। अब अचानक इन बसों को 2/1 स्लीपर में बदलने का आदेश देना आर्थिक रूप से आत्मघाती है, क्योंकि एक बस को मॉडिफाई कराने में 7 से 10 लाख रुपये का खर्च आएगा।
दूसरे राज्यों में फंसी हैं गाड़ियां, यात्री परेशान
टूरिस्ट बस ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल भावसार ने बताया कि आरटीओ द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के रातों-रात बसों को पोर्टल पर ब्लॉक करने से गंभीर संकट पैदा हो गया है। वर्तमान में कई बसें 40 से 50 दिनों की लंबी धार्मिक यात्राओं पर तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में हैं। अचानक पोर्टल ब्लॉक होने से न केवल हजारों तीर्थयात्री बीच रास्ते में परेशान हो रहे हैं, बल्कि विवाह समारोहों के लिए पहले से बुक की गई बसों के निरस्त होने से आम जनता को भारी असुविधा हो रही है।
“जब आरटीओ ने ही पास की बसें, तो अब अवैध क्यों?”
बस ऑपरेटरों ने प्रशासन की दोहरी नीति पर तीखा प्रहार किया है। उनका सबसे बड़ा तर्क यह है कि उज्जैन आरटीओ ने ही इन बसों की विधिवत जांच की, टैक्स वसूला और फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर संचालन की अनुमति दी थी। संचालकों का कहना है कि जब सरकार ने ही इन्हें नियमों के तहत पंजीयन दिया था, तो अब अचानक इन्हें अवैध घोषित करना पूरी तरह अनैतिक है। इस निर्णय से ड्राइवर, कंडक्टर और एजेंटों सहित हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है।
7 दिन का अल्टीमेटम अव्यावहारिक
एसोसिएशन ने प्रशासन द्वारा दिए गए 7 दिनों के अल्टीमेटम को पूरी तरह अव्यावहारिक बताया है। संचालकों का कहना है कि रातों-रात बस का ढांचा बदलना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। उज्जैन में करीब 839 बसें ब्लॉक की गई हैं, जबकि पूरे प्रदेश में ऐसी 8 हजार बसें हैं। यदि समाधान नहीं निकला, तो प्रदेशभर में चक्का जाम की स्थिति बन सकती है।
अब आगे क्या? मुख्यमंत्री से गुहार और कोर्ट का रास्ता
शनिवार को उज्जैन में हुई बैठक में निर्णय लिया गया है कि बस ऑपरेटरों का प्रतिनिधिमंडल सबसे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलकर अपनी व्यथा सुनाएगा। यदि वहां से राहत नहीं मिली, तो ऑपरेटर प्रदेशव्यापी आंदोलन करेंगे और कानूनी लड़ाई के लिए कोर्ट की शरण लेंगे।
ऑपरेटरों के प्रमुख सवाल
-
अगर बस बॉडी गलत थी, तो आरटीओ ने रजिस्ट्रेशन और इतने सालों तक फिटनेस सर्टिफिकेट कैसे जारी किए?
-
क्या आरटीओ ने अपनी पिछली गलतियों को छिपाने के लिए सारा बोझ बस मालिकों पर डाल दिया है?
-
जो यात्री इस समय देश के दूसरे कोनों में यात्रा कर रहे हैं, उनके लौटने की जिम्मेदारी किसकी होगी?



