रतलाम रेल मंडल में अब ‘पूर्व सैनिक’ संभालेंगे सुरक्षा की कमान
रतलाम रेल मंडल में पॉइंट्समैन के रूप में 100 जवानों की होगी तैनाती

उज्जैन, समाचार आज। पश्चिम रेलवे के रतलाम रेल मंडल ने रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित और अनुशासित बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब रेलवे स्टेशनों पर ट्रैफिक गेटमैन और पॉइंट्समैन के महत्वपूर्ण पदों पर भारतीय सेना के पूर्व सैनिक तैनात नजर आएंगे। रतलाम मंडल ऐसा समझौता करने वाला पश्चिम रेलवे का पहला मंडल बन गया है।
सेना और रेलवे के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता
रतलाम मंडल और आर्मी वेलफेयर प्लेसमेंट ऑर्गनाइजेशन (AWPO) के बीच एक एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में किए गए। मंडल रेल प्रबंधक अश्विनी कुमार के नेतृत्व में हुई इस पहल का मुख्य उद्देश्य पूर्व सैनिकों के अनुभव और अनुशासन का लाभ रेल सुरक्षा में लेना है।
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रोजगार के अवसर: इस समझौते के माध्यम से लगभग 100 पूर्व सैनिकों को पॉइंट्समैन के रूप में सीधे रोजगार मिलेगा।
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अनुबंध पर हस्ताक्षर: रेलवे की ओर से वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक आलोक चतुर्वेदी और वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी अविनाश कुमार ने, जबकि एडब्ल्यूपीओ की ओर से कर्नल मुकेश कुमार तिवारी (सेवानिवृत्त) ने अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।
15 दिनों में शुरू होगी तैनाती
जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने जानकारी दी कि समझौते की शर्तों के अनुसार, चयनित पूर्व सैनिकों की भौतिक तैनाती की प्रक्रिया अगले 15 दिनों के भीतर शुरू कर दी जाएगी। इन्हें मंडल के विभिन्न संवेदनशील स्टेशनों और रेलवे गेटों पर तैनात किया जाएगा, जहाँ सुरक्षा और सतर्कता की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।
अनुशासित हाथों में होगा रेल परिचालन
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि सेना से सेवानिवृत्त जवान न केवल शारीरिक रूप से फिट होते हैं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने में भी सक्षम होते हैं।
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सुरक्षा में वृद्धि: पॉइंट्समैन का काम ट्रेन के परिचालन में दिशा परिवर्तन और सिग्नलिंग से जुड़ा होता है, जिसमें एक छोटी सी चूक बड़े हादसे का कारण बन सकती है। सैनिकों की तैनाती से मानवीय भूलों की आशंका कम होगी।
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सराहनीय पहल: भारतीय रेलवे के इतिहास में पूर्व सैनिकों को पॉइंट्समैन जैसे तकनीकी और सुरक्षात्मक पदों पर नियुक्त करना एक अनूठी और अनुकरणीय पहल मानी जा रही है।
देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों को रेल सुरक्षा की जिम्मेदारी देना एक स्वागत योग्य कदम है। इससे न केवल पूर्व सैनिकों का पुनर्वास होगा, बल्कि रेल यात्रियों का सफर भी पहले से अधिक सुरक्षित हो सकेगा।


