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महाभारत के शकुनि मामा नहीं रहे, 78 साल की उम्र में निधन

समाचार आज

महाभारत में शकुनि का किरदार निभाने वाले गूफी पेंटल का सोमवार 5 जून 2023 की सुबह निधन हो गया। वे 78 साल के थे। पेंटल पिछले दो हफ्ते से मुंबई के अंधेरी स्थित अस्पताल में भर्ती थे। गूफी को दिल और किडनी संबंधी बीमारी थी। गूफी के भतीजे, हितेन पेंटल और महाभारत में उनके साथी कलाकार सुरेंद्र पाल ने निधन की पुष्टि की है।

महाभारत में अर्जुन का किरदार निभाने वाले एक्टर फिरोज खान ने कहा, “गूफी को पिछले दो दिनों से होश नहीं था। वे ICU में थे। महाभारत में उन्हें गूफी की वजह से ही काम मिला था। उन्होंने ही अर्जुन के किरदार के लिए मेरा ऑडिशन कराया था। मैं इसके लिए हमेशा गूफी का शुक्रगुजार रहूंगा।” बता दें कि फिरोज ने अर्जुन का किरदार निभाने के बाद अपना नाम फिरोज से अर्जुन रख लिया था। आज वे अर्जुन के नाम से ही जाने जाते हैं।

परिवार के साथ

15 दिन से थे बीमार

महाभारत में द्रोणाचार्य का किरदार निभाने वाले एक्टर सुरेंद्र पाल का कहना है कि “गूफी की तबीयत 15 दिन पहले खराब हुई थी। वे अचानक अपने घर में गिर पड़े थे। इसकी वजह से उनके दिमाग में में कुछ प्रॉब्लम आ गई थी। वे कोमा में चले गए थे। हालांकि रविवार की सुबह उन्हें होश भी आया था, लेकिन आज ये दुखद खबर सुनने को मिली। उनके परिवार में उनकी पत्नी हैं, साथ ही एक बेटा है जिसका नाम हैरी पेंटल है।

शकुनी के किरदार से ठीक विपरीत थे गूफी

महाभारत में उनका जो कैरेक्टर था गुफी पेंटल रियल लाइफ में वे ठीक इसके विपरीत थे। उनके छोटे भाई कंवरजीत सिंह पेंटल जिन्हें पेंटल के नाम से जाना जाता है, उन्होंने महाभारत में शिखंडी का रोल किया था। वे भी काफी पॉपुलर एक्टर हैं।”

फौजी से कलाकार बने पेंटल को महाभारत से घर-घर पहचान मिली

80 के दशक में गूफी कई फिल्मों और टीवी शोज में नजर आए। हालांकि, गूफी को असल पहचान 1988 में बीआर चोपड़ा के सुपरहिट शो ‘महाभारत’ से मिली थी। शो में उन्होंने शकुनि मामा का किरदार निभाया था। गूफी आखिरी बार स्टार भारत के शो ‘जय कन्हैया लाल की’ में नजर आए थे। एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने से पहले गुफी पेंटल आर्मी में थे। उनका असली नाम सरबजीत सिंह पेंटल था। मीडिया इंटरव्‍यू में उन्‍होंने कहा था, “1962 में भारत-चीन के बीच जब युद्ध चल रहा था, तब मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। युद्ध के दौरान भी कॉलेज में आर्मी की भर्तियां चल रही थीं। मैं हमेशा से आर्मी में जाना चाहता था। पहली पोस्टिंग चीन बॉर्डर पर आर्मी आर्टिलरी में हुई थी।बॉर्डर पर मनोरंजन के लिए टीवी और रेडियो नहीं होता था इसलिए हम बॉर्डर पर (सेना के जवान) रामलीला करते थे। रामलीला में मैं सीता का रोल करता था और रावण बना शख्स स्कूटर पर आकर मेरा अपहरण करता था। मुझे एक्टिंग का शौक तो था ही, इससे कुछ ट्रेनिंग भी मिल गई।” “एक्टिंग में इंटरेस्ट बढ़ने लगा तो अपने छोटे भाई कंवरजीत पेंटल के कहने पर 1969 में मुंबई आ गया था। मॉडलिंग और एक्टिंग सीखी और कई फिल्मों में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर भी काम किया। इस दौरान बीआर चोपड़ा की महाभारत में कास्टिंग डायरेक्टर के तौर पर काम करने का मौका मिला। मैं महाभारत में शकुनि के कैरेक्टर के लिए परफेक्ट फेस की तलाश में थे। मैंने शो के लिए सभी कैरेक्टर्स का ऑडिशन लिया था। मैंने इस रोल के लिए तीन लोगों को चुना था। इस बीच शो की स्क्रिप्ट लिख रहे मासूम रजा की नजर मुझ पर पड़ी और उन्होंने मुझे ही शकुनि का रोल करने की सलाह दी। इस तरह मैं महाभारत का मामा शकुनि बन गया। मैंने इससे पहले टीवी सीरियल बहादुर शाह जफर में लार्ड मेटक्लैफ का रोल प्ले किया था। शकुनि का किरदार मिलने पर इस बात की चिंता थी कि परिवार वालों की नाराजगी झेलनी पड़ेगी। उनके किरदार को सभी ने पसंद किया और तारीफ भी की।”

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