अमानवीयता की इंतेहा! सर्द रात में दो मासूमों के साथ एम्बुलेंस में बैठी रही पत्नी, शव रखने से उज्जैन के पामेचा अस्पताल का इनकार
स्वास्थ्य विभाग ने पामेचा अस्पताल को नोटिस जारी किया
उज्जैन: धार्मिक नगरी उज्जैन में शनिवार 22 नवंबर 2025 की रात इंदौर रोड स्थित पामेचा अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। पामेचा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रबंधन पर आरोप है कि उन्होंने एक मरीज की मौत के बाद उसके शव को अस्पताल परिसर में रखने से साफ इनकार कर दिया। इसके चलते, मृतक की पत्नी अपने दो छोटे बच्चों के साथ, पति का शव लेकर, सर्द रात में घंटों एम्बुलेंस के अंदर ग्वालियर से आने वाले परिजनों का इंतजार करने को मजबूर रही। क्षेत्रीय पार्षद ने इस कृत्य को अमानवीय बताया है। सीएमएचओ डॉ. अशोक पटेल ने मामले में स्वत: ही संज्ञान लेते हुए पामेचा अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया है।
शाम को हुई मौत, रात भर बाहर छोड़ा शव
आगर के रहने वाले एक युवक को हार्ट अटैक आने के बाद उसकी पत्नी उसे शाम 5 बजे पामेचा अस्पताल लेकर आई थीं। आईसीयू में इलाज शुरू किया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश शाम 6:15 बजे मरीज की मौत हो गई। महिला के नजदीकी रिश्तेदार ग्वालियर में रहते हैं, जिन्हें आने में समय लगना था। महिला ने अस्पताल प्रबंधन से रोते हुए गुहार लगाई कि सुबह होने तक शव को अस्पताल के मोर्चरी (या कहीं भी सुरक्षित स्थान) में रख लिया जाए, लेकिन प्रबंधन ने इनकार कर दिया।
पार्षद ने कहा : हाथ-पैर जोड़ने पर भी नहीं सुनी बात
अस्पताल की इस कार्रवाई की खबर सुनकर क्षेत्रीय पार्षद गब्बर कुवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के रवैये को अमानवीय बताते हुए कहा, “महिला बार-बार रोती-बिलखती रही और हाथ-पैर जोड़ती रही कि सुबह तक का इंतजार करने दिया जाए, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई।”
पार्षद कुवाल ने अस्पताल के डॉ. पामेचा को फोन पर भी निवेदन किया कि शव को सुबह तक रख लिया जाए, लेकिन उनकी बात भी अनसुनी कर दी गई। कुवाल ने इस घटना को ‘शर्मनाक’ करार देते हुए ऐसे डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष
पामेचा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉ. हर्षल पामेचा ने अपने बचाव में दावा किया कि उन्होंने मरीज के परिजनों के साथ पूरा सहयोग किया। डॉ. पामेचा के अनुसार हमारे अस्पताल में शव रखने की व्यवस्था नहीं है। आईसीयू में शव रखने से अन्य मरीज ‘साइकोलॉजी ट्रॉमा’ में आ सकते हैं। मृत्यु शाम 6:15 बजे हुई थी, लेकिन हमने शव को रात 10 बजे तक आईसीयू में रखा। अटेंडर के साथ 10-15 लोग मौजूद थे। उन्होंने यह भी बताया कि मरीज आगर के नवजीवन अस्पताल से रैफर किए गए थे और वेंटिलेटर पर थे, उन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया गया था। बहरहाल, अस्पताल के दावों के बावजूद, एक महिला को अपने दो मासूम बच्चों के साथ सर्द रात में एम्बुलेंस में पति के शव के साथ इंतजार करना पड़ा, जिसने शहर में चिकित्सा क्षेत्र के व्यावसायिक और अमानवीय चेहरे को उजागर किया है।



