उज्जैन

उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज में छुट्टी के दिन बिना अनुमति तीन प्रोफेसर घुसे, प्रिंसिपल ने पुलिस बुलाई

डॉक्यूमेंट से छेड़छाड़ का आरोप, पुलिस पहुंची मौके पर; एक प्रोफेसर की एमटेक डिग्री पर उठे सवाल

उज्जैन: शासकीय उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज (GEC) उज्जैन में रविवार 23 नवंबर 2025 की देर रात बड़ा हंगामा खड़ा हो गया।प्राचार्य डॉ. जेके श्रीवास्तव ने कॉलेज के तीन लेक्चरार और पूर्व प्राचार्य पर रविवार रात कॉलेज भवन में बगैर अनुमति घुसने और दस्तावेज बदलकर सबूत नष्ट करने का आरोप लगाया। उन्होंने इस संबंध में नानाखेड़ा थाने को भी सूचना दी। पूर्व प्राचार्य डॉ. उमेश पेंढारकर ने प्राचार्य के आरोप को नकार दिया है। उनका कहना है कि लेक्चरार परीक्षा के पेपर तैयार कर रहे थे।

प्रिंसिपल डॉ. जितेंद्र श्रीवास्तव ने मीडिया को बताया कि उन्हें सूचना मिली कि छुट्टी के दिन, रविवार की रात को तीन प्रोफेसर बिना किसी आधिकारिक अनुमति के कॉलेज में दाखिल हुए हैं। ये तीनों प्रोफेसर गणित विभाग के एचओडी डॉ. एच.के. पटेल, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर सुभाषचंद्र सोलंकी और केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर लोकेंद्र सिंह ठाकुर थे। प्रिंसिपल के अनुसार, वहां जाकर देखा तो तीनों प्रोफेसर गणित विभाग के एचओडी डॉ. पटेल के कक्ष में बैठकर कंप्यूटर सिस्टम पर कुछ टाइप कर रहे थे, और उन पर कॉलेज के महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने का संदेह है।  प्रिंसिपल ने तुरंत मेन गेट पर ताला लगवाया और नानाखेड़ा थाना पुलिस को सूचना दी। रात करीब 1 बजे पुलिस और प्रिंसिपल डॉ. श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे। ताला खोलकर तीनों प्रोफेसरों के लैपटॉप और बैग जब्त किए गए।

एमटेक की डिग्री पर गंभीर आरोप

प्रिंसिपल डॉ. जितेंद्र श्रीवास्तव ने प्रोफेसर लोकेंद्र सिंह ठाकुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रिंसिपल के मुताबिक, लोकेंद्र सिंह ठाकुर ने श्री सिंथेटिक में नौकरी करते हुए एमटेक की डिग्री हासिल की और खुद को अन-एम्प्लॉइड बताकर गेट स्कॉलरशिप भी ले ली। प्रिंसिपल डॉ. श्रीवास्तव ने इस मामले की शिकायत उच्च शिक्षा विभाग से की थी और लोकेंद्र सिंह ठाकुर को टर्मिनेट करने के लिए शासन को पत्र लिखा है। उन्होंने आरजीपीवी (राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय) भोपाल को भी प्रोफेसर ठाकुर की एमटेक की डिग्री निरस्त करने के लिए पत्र लिखा है।

रात 2:30 बजे फिर पहुंचे प्रोफेसर

प्राचार्य के अनुसार रात करीब 2:30 बजे प्रोफेसर पेंढ़ारकर के नेतृत्व में 8–10 लोग फिर से कॉलेज आए और गार्ड की मौजूदगी में पहले से सील किए गए कक्ष और बैग को दोबारा सील किया।

शिक्षकों की ‘तुच्छ राजनीति’ से अचरज में शहर

शहर को होनहार इंजीनियर देने वाले शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज (GEC) की प्रतिष्ठा इन दिनों शिक्षकों के बीच चल रही वर्चस्व की ‘तुच्छ राजनीति’ में दांव पर लग गई है। कॉलेज के ऊंचे कद के शिक्षकों के बीच चल रहा यह विवाद अब सड़क से होता हुआ पुलिस थाने तक पहुंच गया है, जिसने शिक्षाविदों के लिए गंभीर चिंता पैदा कर दी है। यह विवाद तब शुरू हुआ, जब शासन द्वारा डॉ. उमेश पेंढारकर की जगह डॉ. जेके श्रीवास्तव को प्राचार्य पद पर पदस्थ किया गया। अब, यह आंतरिक जंग रविवार देर रात उस समय चरम पर पहुंच गई, जब प्राचार्य ने तीन प्रोफेसरों को कॉलेज के मेन गेट पर ताला लगाकर अंदर बंद कर दिया। यह मामला अब दो गुटों के बीच खुलकर सामने आ गया है, जिसमें एक तरफ वर्तमान प्राचार्य और दूसरी तरफ पूर्व प्राचार्य व अन्य प्रोफेसर हैं।

वर्तमान प्राचार्य डॉ. जेके श्रीवास्तव का दावा:

  • सबूत मिटाने की कोशिश: प्राचार्य डॉ. श्रीवास्तव का आरोप है कि लोकेंद्र सिंह ठाकुर एक विभागीय जाँच में दोषी पाए गए हैं और उनकी सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। इसीलिए वह और उनके साथी प्रोफेसर दस्तावेज बदलने और सबूतों से छेड़छाड़ करने के इरादे से रात में कॉलेज में घुसे थे।

  • डुप्लीकेट चाबी का उपयोग: उन्होंने कहा कि नियम के अनुसार, कॉलेज छोड़ने से पहले चाबी जमा करानी होती है, लेकिन प्रोफेसरों ने कथित तौर पर डुप्लीकेट चाबी से ताला खोला और मैथेमेटिक्स विभाग में प्रवेश किया।

  • कार्रवाई जारी: प्राचार्य ने रात में ही मैथेमेटिक्स विभाग को सील करवाकर तीनों प्रोफेसरों के खिलाफ नानाखेड़ा थाने में लिखित आवेदन दिया है।

पूर्व प्राचार्य डॉ. उमेश पेंढारकर का पक्ष:

  • परीक्षा की तैयारी: पूर्व प्राचार्य डॉ. उमेश पेंढारकर ने प्राचार्य के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि 1 दिसंबर से कॉलेज में परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। संबंधित लेक्चरार परीक्षा के पेपर तैयार करने के लिए विभाग में बैठे थे, जो कोई नई बात नहीं है। परीक्षा की तैयारी के लिए कई बार रात में पेपर बनाए जाते हैं।

  • प्रताड़ना का आरोप: उन्होंने बताया कि इन लेक्चरारों ने वर्तमान प्राचार्य के खिलाफ प्रताड़ना का आवेदन भी दिया है।

पुलिस ने शुरू की जांच, अभी कोई कार्रवाई नहीं

नानाखेड़ा थाना के टीआई नरेंद्र यादव ने बताया कि पुलिस ने अभी तक इस मामले में कोई कागजी कार्रवाई (FIR) नहीं की है। टीआई के अनुसार, “रात में प्रिंसिपल ने तीन लेक्चरार के प्रवेश की जानकारी दी थी और एक लिखित आवेदन दिया है। हम इसकी जांच कर रहे हैं। साथ ही, दूसरे पक्ष (लेक्चरारों) ने भी एक आवेदन दिया है।”

व्याख्याताओं ने कहा-भोपाल से कागज मांगे थे

विवाद में फंसे प्रोफेसरों का कहना है कि उन लोगों से भोपाल से कुछ जानकारी के दस्तावेज मांगे गए थे। वे केवल वही कागज लेने कॉलेज पहुंचे थे। इसके बाद वे नियमित रूप से परीक्षा के पेपर सेट करने बैठ गए, क्योंकि कॉलेज में 1 दिसंबर से परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेज में सभी कर्मचारियों के अपने चैंबर हैं और प्रवेश के लिए किसी विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं होती।   गणित विभाग के एचओडी डॉ. एच.के. पटेल ने प्रिंसिपल के आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है, “हम लोग रिसर्च से संबंधित कार्य करने के लिए रात 8:30 बजे कॉलेज आए थे। हम सभी विषयों से संबंधित काम कर रहे थे। किसी भी लैब या डॉक्यूमेंट में कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।” उन्होंने यह भी बताया कि सभी चाबियाँ गार्ड के पास रहती हैं और वे सिक्योरिटी के सामने ही बाहर निकले थे। फिलहाल, प्रिंसिपल डॉ. श्रीवास्तव की शिकायत पर नानाखेड़ा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और कॉलेज में गणित विभाग को भी सील कर दिया गया है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

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