
उज्जैन, समाचार आज। मौत और जिंदगी के बीच फासला महज चंद मिनटों का होता है, और सोमवार रात नागदा में इस फासले को अपनी तत्परता से पाट दिया थाना प्रभारी (TI) अमृतलाल घावरी ने। गश्त के दौरान टीआई ने न केवल बहादुरी दिखाई, बल्कि अपनी ट्रेनिंग का सही इस्तेमाल कर एक घर का इकलौता चिराग बुझने से बचा लिया। फंदे से उतारे गए युवक का शरीर कड़ा पड़ चुका था, लेकिन टीआई की दी गई सीपीआर (CPR) ने उसकी धड़कनें वापस लौटा दीं।
घटना सोमवार 29 दिसंबर 2025 देर रात करीब 12:45 बजे की है। नागदा टीआई अमृतलाल घावरी अपनी टीम के साथ रात्रि गश्त पर थे। जब वे इमली तिराहा स्थित पुरानी पानी की टंकी के पास पहुंचे, तभी एक शख्स (प्रवीण यादव) बदहवास हालत में दौड़ता हुआ आया और टीआई के पैर पकड़ लिए। उसने रोते हुए कहा— “साहब, मेरे बेटे ने खुद को कमरे में बंद कर लिया है, वह फांसी लगा रहा है।”
टीआई घावरी बिना एक पल गंवाए मौके पर पहुंचे। कमरा अंदर से बंद था। टीआई ने लात मारकर दरवाजा तोड़ा। अंदर 20 साल का युवक धैर्य फंदे पर लटका हुआ था।
फरिश्ता बनकर आए टीआई: 2 मिनट तक दी CPR
टीआई ने तुरंत फंदा काटकर युवक को नीचे उतारा। उस वक्त युवक की सांसें थम चुकी थीं और शरीर कड़ा पड़ने लगा था। परिजन उसे मृत समझकर विलाप करने लगे थे, लेकिन टीआई घावरी ने उम्मीद नहीं छोड़ी। उन्होंने तुरंत अपनी पुलिस ट्रेनिंग में सीखी गई सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) तकनीक का इस्तेमाल किया। करीब डेढ़ से दो मिनट तक लगातार चेस्ट कंप्रेशन (सीना दबाना) देने के बाद अचानक युवक के शरीर में हलचल हुई और उसकी सांसें लौट आईं।
डॉक्टर बोले- “समय पर CPR मिलना ही टर्निंग पॉइंट रहा”
युवक को तुरंत अपने वाहन से पास के अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के संचालक डॉ. प्रमोद बाथम ने बताया कि जब युवक को लाया गया, वह अचेत अवस्था (Unconscious) था और उसका ऑक्सीजन लेवल काफी कम था। डॉक्टरों ने माना कि अगर मौके पर टीआई ने सीपीआर न दिया होता, तो उसे बचाना नामुमकिन था। प्राथमिक उपचार के बाद युवक अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
क्यों उठाया आत्मघाती कदम?
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि प्रवीण यादव का बेटा धैर्य (20) परिवार का इकलौता बेटा है। घर में पैतृक संपत्ति को लेकर चल रहे आपसी विवादों के कारण वह काफी समय से अवसाद (Depression) में था। इसी मानसिक तनाव के चलते उसने सोमवार रात आत्महत्या का प्रयास किया। टीआई ने युवक के स्वस्थ होने के बाद उसकी काउंसलिंग भी की और उसे जीवन का महत्व समझाया।
DGP ने किया 10 हजार के इनाम का ऐलान
टीआई अमृतलाल घावरी की इस जांबाजी और सूझबूझ की खबर जब पुलिस मुख्यालय तक पहुँची, तो DGP कैलाश मकवाना ने उनकी सराहना की। डीजीपी ने टीआई घावरी को 10,000 रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित करने के आदेश जारी किए हैं।
पहले भी बचा चुके हैं एक जवान की जान
यह पहली बार नहीं है जब टीआई घावरी ने किसी की जान बचाई हो। करीब 6 महीने पहले भी एक सड़क हादसे के दौरान उन्होंने अपने ही विभाग के ड्राइवर (सिपाही भारत) को गंभीर हालत में सीपीआर देकर नई जिंदगी दी थी।
समाचार आज विशेष—एक मिनट में सीखें जान बचाने वाली CPR तकनीक
जैसा कि नागदा टीआई ने किया, आप भी किसी की जान बचा सकते हैं। अगर आपके सामने कोई व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाए या उसकी सांसें रुक जाएं, तो ये कदम उठाएं:
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होश चेक करें: व्यक्ति के कंधे थपथपाएं और जोर से पूछें “क्या आप ठीक हैं?” अगर कोई जवाब न मिले तो तुरंत मदद के लिए चिल्लाएं।
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मदद बुलाएं: किसी को तुरंत 100 या 108 नंबर डायल करने को कहें।
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सांसें जांचें: 5-10 सेकंड तक देखें कि क्या व्यक्ति का सीना ऊपर-नीचे हो रहा है।
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चेस्ट कंप्रेशन (सीना दबाना):
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अपनी एक हथेली को व्यक्ति के सीने के बीचों-बीच रखें और दूसरी हथेली को उसके ऊपर रखकर उंगलियां लॉक कर लें।
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अपनी कोहनियों को सीधा रखें और अपने शरीर के वजन का इस्तेमाल करते हुए सीने को कम से कम 2 इंच नीचे दबाएं।
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रफ़्तार: एक मिनट में 100 से 120 बार दबाएं (जैसे किसी तेज धुन पर)।
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रुकें नहीं: जब तक एम्बुलेंस न आ जाए या व्यक्ति में कोई हलचल न हो, तब तक इसे जारी रखें।
समाचार आज (samacharaaj.com) की विशेष रिपोर्ट।



