
उज्जैन, समाचार आज। उज्जैन के महाकाल मंदिर में इस समय आस्था का ऐसा ज्वार उमड़ा है जिसने प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है। 25 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ यह सिलसिला 5 जनवरी 2026 तक जारी रहने वाला है। 12 लाख श्रद्धालुओं का अनुमान यह बताने के लिए काफी है कि महाकाल की नगरी इस समय देश का सबसे बड़ा धार्मिक केंद्र बनी हुई है।
VIP और प्रोटोकॉल दर्शन बंद
महाकाल मंदिर समिति ने एक बहुत बड़ा निर्णय लेते हुए 27 दिसंबर से 5 जनवरी तक VIP और प्रोटोकॉल दर्शन को पूरी तरह बंद कर दिया है।
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किसे नहीं मिलेगा लाभ: जन प्रतिनिधि (विधायक, सांसद), अधिकारी, न्यायाधीश, पत्रकार और यहाँ तक कि साधु-संतों को मिलने वाली विशेष प्रोटोकॉल सुविधा भी स्थगित कर दी गई है।
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अपवाद: केवल अति-विशिष्ट (VVIP) जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को ही यह सुविधा मिलेगी।
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कारण : इस निर्णय का सीधा लाभ आम श्रद्धालुओं को मिलेगा, क्योंकि VIP आवाजाही रुकने से सामान्य कतारें तेज़ी से आगे बढ़ेंगी।
₹250 शीघ्र दर्शन: सुविधा जारी रहेगी
भले ही VIP दर्शन बंद हैं, लेकिन ₹250 की रसीद वाला ‘शीघ्र दर्शन’ मार्ग अभी भी खुला है। शनिवार को हुई स्थिति यह दर्शाती है कि ‘शीघ्र’ दर्शन चाहने वालों की संख्या इतनी अधिक हो गई कि वहां भगदड़ जैसी स्थिति निर्मित हो गई। सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया को खुद भीड़ के बीच उतरकर मोर्चा संभालना पड़ा।
पुलिस की ‘हवा निकालो’ मुहीम: जाम से निपटने का कड़ा तरीका
उज्जैन पुलिस इस समय ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। मंदिर के आसपास के क्षेत्रों (कोट मोहल्ला, महाकाल घाटी, गेट नंबर 4) में यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं:
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अवैध पार्किंग पर कार्रवाई: जो लोग सड़कों पर गाड़ियां खड़ी कर जाम लगा रहे हैं, पुलिस उनकी गाड़ियों की हवा निकाल रही है। यह सुनने में कड़ा लग सकता है, लेकिन 10,000 गाड़ियों के प्रतिदिन प्रवेश को देखते हुए सड़कों को खाली रखना अनिवार्य है।
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अतिक्रमण हटाओ: सड़कों के किनारे लगी अस्थायी दुकानों और ठेले वालों को भी हटाया जा रहा है ताकि पैदल चलने वालों को रास्ता मिल सके।
भस्म आरती सिर्फ ऑफलाइन (Offline Only)
भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति ने भस्म आरती की ऑनलाइन अनुमति को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। अब केवल ऑफलाइन मोड (जो मंदिर के काउंटर से मिलता है) ही विकल्प है। हालांकि, इस भीड़ में ऑफलाइन अनुमति मिलना “लोहे के चने चबाने” जैसा है, क्योंकि इसके लिए रात-रात भर लाइन में लगना पड़ता है।
यातायात और पार्किंग का संकट
प्रतिदिन 6 से 8 हजार बाहरी वाहन उज्जैन में प्रवेश कर रहे हैं, और विशेष दिनों में यह संख्या 10 हजार के पार जा रही है।
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पार्किंग फुल: मंदिर के पास की सभी अधिकृत पार्किंग फुल चल रही हैं।
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सुझाव: यदि आप इंदौर या किसी और शहर से अपनी निजी कार से आ रहे हैं, तो बेहतर होगा कि आप मंदिर से 2-3 किलोमीटर दूर ही अपनी गाड़ी पार्क करें और वहां से ई-रिक्शा या ऑटो का उपयोग करें।
अगले 5 दिनों के लिए आपकी ‘सर्वाइवल गाइड’ (Survival Guide for Devotees):
यदि आप 5 जनवरी 2026 तक दर्शन करने जा रहे हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
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धैर्य सबसे बड़ा मंत्र: सामान्य दर्शन में आपको 4 से 7 घंटे तक का समय लग सकता है। अपने साथ पानी की बोतल और बच्चों के लिए हल्का नाश्ता रखें।
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भारी सामान से बचें: मंदिर के क्लॉक रूम (लॉकर) में लंबी लाइनें हैं। अपने साथ बैग या कीमती सामान न ले जाएं, उन्हें अपने होटल में ही छोड़ दें।
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भीड़ वाले क्षेत्रों से बचें: मालीपुरा, दौलतगंज, तोपखाना, कोट मोहल्ला और महाकाल घाटी वाला इलाका सबसे ज्यादा जाम वाला है। यहाँ पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है। इस मार्ग से जाने से बचें।
- सीधे महाकाल लोक पहुंचे: वर्तमान में ज्यादा भीड़ के कारण मंदिर समिति ने मंदिर में एंट्री के लिए महाकाल लोक का गेट (त्रिवेणी द्वार) तय किया है। इस कारण हरिफाटक ब्रिज या जयसिंहपुरा क्षेत्र से सीधे त्रिवेणी द्वार पहुंचे और वहां से मंदिर में प्रवेश करें।
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प्रशासन का सहयोग करें: पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए अपनी गाड़ी केवल अधिकृत पार्किंग में ही खड़ी करें, वरना आपको गाड़ी की हवा निकली हुई या टो (Tow) की हुई मिल सकती है।
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शीघ्र दर्शन का समय: यदि संभव हो, तो सुबह जल्दी (6 से 10 बजे के बीच) या रात को देरी से (8 से 10 बजे के बीच) दर्शन के लिए जाएं, दोपहर में भीड़ चरम पर रहती है।
यह भीड़ इस बात का प्रमाण है कि महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन की लोकप्रियता वैश्विक स्तर पर बढ़ी है। लेकिन वर्तमान इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी 12 लाख की भीड़ को एक साथ संभालने में संघर्ष कर रहा है। यही कारण है कि ‘फेज 2’ के जो कार्य 2026 में पूर्ण होंगे (जैसे रोपवे और चौड़ी सड़कें), वे भविष्य में ऐसी स्थितियों को और भी बेहतर ढंग से संभालने में मदद करेंगे।
-हरिओम राय, उज्जैन
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