उज्जैन

उज्जैन के विकास का रोडमैप तैयार: 20 सदस्य देंगे सुझाव, CM लगाएंगे विकास कार्यों पर अंतिम मुहर

उज्जैन। जिले के विकास को नई गति देने के लिए गठित ‘विकास सलाहकार समिति’ के कामकाज का तरीका तय हो गया है। प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में समिति के 20 सदस्य जिले की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों के सुझाव देंगे। इन सुझावों के अनुमोदन के बाद कलेक्टर इन्हें मुख्यमंत्री (CM) को भेजेंगे, जहाँ से अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री इस समिति के अध्यक्ष हैं।

समिति की संरचना: कौन-कौन हैं शामिल?

योजना एवं आर्थिकी मंत्रालय के निर्देशानुसार उज्जैन जिले के लिए गठित इस समिति में समाज के विभिन्न वर्गों के 20 प्रतिनिधियों को स्थान दिया गया है:

  • प्रगतिशील किसान: सुबोध स्वामी (नागदा), दिलीप जैन गांधी (बड़नगर), शिवराज जाट (भैसलाखुर्द), सुमेरसिंह (कालूहेड़ा), अशोक कटारिया (पाटपाला), मदन सांखला (टुकराल) और केपी झाला (पचौला)।

  • समाजसेवी: लक्ष्मीनारायण संगीतला (खाचरौद), महेश परियानी, मुकेश रांका, अशोक प्रजापत और नरेश शर्मा (सभी उज्जैन)।

  • व्यापारी वर्ग: कैलाश राठी (महिदपुर), अजय रोहरा, जितेंद्र अग्रवाल और शैलेंद्र कलवाड़िया (सभी उज्जैन)।

  • उद्योग एवं प्रोफेशनल: राजेश गर्ग (उद्योगपति), आर.जी. पाठक (आर्किटेक्ट) और आदित्य नामजोशी (सीए)।

  • पत्रकारिता: निर्भयसिंह भाटी (महिदपुर)।

कैसे काम करेगी समिति?

समिति का ढांचा बेहद व्यवस्थित रखा गया है ताकि विकास की कार्ययोजना सीधे शासन तक पहुँच सके:

  • अध्यक्ष: मुख्यमंत्री (अंतिम फैसला लेंगे)।

  • उपाध्यक्ष: जिले के प्रभारी मंत्री।

  • सचिव: कलेक्टर (पदेन सचिव)।

  • पदेन सदस्य: सांसद, समस्त विधायक, महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष, और जिला/जनपद पंचायत अध्यक्ष।


मुख्य फोकस: ‘वोकल फॉर लोकल’ और लॉन्ग टर्म प्लानिंग

समिति की बैठक हर महीने आयोजित की जाएगी। सदस्यों का मुख्य कार्य जिले की जरूरतों को देखते हुए दीर्घकालीन (Long-term) योजनाएं तैयार करना होगा। समिति का विशेष ध्यान ‘वोकल फॉर लोकल’ पर रहेगा। स्थानीय पारंपरिक कौशलों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक विकास मॉडल के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जाएगी। सदस्य अपने सुझाव ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से दे सकेंगे।

“समिति के माध्यम से जिले के विकास की योजनाएं बनाई जाएंगी। हमारा मुख्य फोकस स्थानीय प्रतिभा और कौशल (Vocal for Local) को बढ़ावा देना होगा।”रौशन कुमार सिंह, कलेक्टर


विवाद: पैनल में डॉक्टर और वकील गायब, सोशल मीडिया पर नाराजगी

समिति का गठन होते ही शहर के प्रबुद्ध वर्ग ने इसमें चिकित्सा और विधि (कानून) क्षेत्र के प्रतिनिधियों को शामिल न किए जाने पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है।

प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. चिराग देसाई ने फेसबुक पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा— “शहर के विकास पैनल में एक भी डॉक्टर नहीं है। मैंने इसमें डॉ. सतिंदर सलूजा मैडम का नाम सुझाया था, जिन्होंने पूरी दुनिया घूमी है और वे बहुत उपयोगी सुझाव दे सकती थीं।” डॉ. देसाई की इस पोस्ट पर शहर के कई अन्य नागरिकों ने भी अपनी सहमति जताते हुए समिति के गठन पर सवाल उठाए हैं।

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