लैंड पूलिंग योजना वापस: उज्जैन में किसानों ने ढोल-आतिशबाजी से मनाया जश्न
लैंड पूलिंग योजना में कांग्रेस ने सरकार के इस यू-टर्न पर गंभीर सवाल खड़े किए

उज्जैन: सिंहस्थ 2028 के लिए लाई गई विवादास्पद लैंड पूलिंग योजना को मध्य प्रदेश सरकार ने वापस ले लिया है। सोमवार देर रात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों के बीच चली दो घंटे की बैठक के बाद यह बड़ा फैसला घोषित किया गया। योजना वापस लिए जाने की घोषणा होते ही उज्जैन में किसानों ने सड़कों पर उतरकर ढोल की थाप पर नाचकर और आतिशबाजी कर अपनी खुशी का इजहार किया। किसानों ने सिंहस्थ की भूमि से मिट्टी लेकर ‘भूमि देवी’ मंदिर में अर्पित की और फिर कलेक्टर कार्यालय के बाहर जश्न मनाया।
कांग्रेस ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल
किसानों के जश्न के बीच, विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के इस यू-टर्न पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उज्जैन कांग्रेस शहर अध्यक्ष मुकेश भाटी और तराना विधायक महेश परमार ने कहा:
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विरोधाभास: “जब विधानसभा में सरकार ने इस योजना को सही बताया था, तो अब अचानक इसे किस आधार पर वापस लिया गया?”
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औपचारिकता: “क्या कैबिनेट बैठक में इस एक्ट को वापस लेने का औपचारिक निर्णय लिया गया है?”
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स्पष्टीकरण की मांग: कांग्रेस ने सरकार से पूछा कि क्या यह एक्ट केवल उज्जैन के लिए वापस हुआ है या इसे पूरे प्रदेश में समाप्त किया गया है।
किसानों के आंदोलन का दबाव
यह योजना पिछले 8 महीनों से भारतीय किसान संघ और किसान संघर्ष समिति के कड़े विरोध का सामना कर रही थी। किसान संघ ने मंगलवार से ‘घेरा डालो–डेरा डालो’ आंदोलन की घोषणा की थी, जिसके तहत किसान परिवार सहित राशन-पानी लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचने वाले थे। इसी दबाव के चलते, मुख्यमंत्री को देर रात बैठक बुलानी पड़ी और योजना वापस लेने का फैसला लेना पड़ा।
किसान संघ की प्रमुख मांगें थीं:
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सिंहस्थ क्षेत्र में लैंड पूलिंग एक्ट समाप्त हो।
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नगर विकास योजना (TDS 8,9,10,11) का गजट नोटिफिकेशन रद्द हो।
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किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं।
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सिंहस्थ क्षेत्र में कोई भी स्थायी निर्माण न हो।
सीएम और डिप्टी सीएम का बयान
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव: सीएम ने कहा कि सरकार के लिए सिंहस्थ विश्व का सबसे बड़ा मेला है। भविष्य में कोई बड़ी लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति पैदा न हो, इसके लिए प्रबंधन किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्य “किसानों की सहमति के आधार पर” ही किए जाएंगे।
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डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल: कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने कहा कि लैंड पूलिंग एक्ट को केवल सिंहस्थ क्षेत्र के लिए वापस लिया गया है, ताकि वहां चल रही सिक्स लेन, फोर लेन रोड, फ्लाइओवर और घाटों की तैयारियां बेहतर तरीके से हो सकें।
लैंड पुलिंग योजना वापस ले ली है, लेकिन रोड बनेंगे
भारतीय किसान संघ के भारत सिंह बेस ने बताया कि सरकार ने लैंड पुलिंग योजना वापस ले ली है, लेकिन रोड बनेंगे। उन्होंने बताया कि शिप्रा नदी किनारे बनने वाले 29 किमी के घाट की कनेक्टिविटी के लिए 120 हेक्टेयर भूमि पर एमआर-22 सड़क का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए किसानों का कोई विरोध नहीं है, क्योंकि 30 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए ये सड़क जरुरी है और घाटों से इस सड़क को जोड़ा जाना है।
ये थी लैंड पुलिंग स्कीम
50 प्रतिशत भूमि उज्जैन विकास प्राधिकरण लेता और बची 50% किसान या भूस्वामी के पास ही रहती। 25 प्रतिशत भूमि में रोड (सेंटर लाइटिंग, स्टॉर्म वाटर ड्रेन, सीवर एवं वाटर लाइन और अंडर ग्राउंड विद्युत लाइन) निर्माण होना था। 5 प्रतिशत भूमि पर पार्क (बच्चों के लिए झूले एवं स्लाइड्स, आम पब्लिक के लिए वॉकिंग पाथवे, ओपन जिम एवं लॉन व प्लांटेशन) विकसित किए जाने का प्लान था। 5 प्रतिशत भूमि पर आमजन की सुविधा के लिए पार्किंग, जनसुविधा केंद्र, हॉस्पिटल, स्कूल, विद्युत सब-स्टेशन आदि निर्माण होना था। प्राधिकरण ने 1806 किसानों की करीब 5000 सर्वे वाली किसानों की जमीन को लैंड पुलिंग कर इस पर हाईटेक कुंभ सिटी तैयारी की योजना तैयार की थी। अगर लैंड पुलिंग योजना सफल होती, तो ऐसा पहली बार होता, जब सिंहस्थ भूमि पर स्थायी सड़क बिजली के पोल और अन्य निर्माण कर सिंहस्थ की भूमि पर धार्मिक शहर को विकसित किया जाता। इतने बड़े क्षेत्र में 60 से 200 फीट तक की सड़कें बनेंगी जो इंटर कनेक्ट रहती। जिससे कुंभ में आने जाने वाले श्रद्धालुओं और समय रहते भीड़ बढ़ने पर शिफ्ट किया जा सकता था।



