अध्यात्म

मकर संक्रांति पर ‘महासंयोग’: सुबह बाबा महाकाल को तिल का उबटन, शाम को महालोक में गूंजेगा ‘शिवोहम’ नाद

उज्जैन। सूर्य के उत्तरायण होने का महापर्व मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को एक अद्भुत महासंयोग के साथ मनाया जाएगा। इस वर्ष संक्रांति पर षटतिला एकादशी के साथ-साथ सर्वार्थसिद्धि और अमृतसिद्धि योग बन रहे हैं, जो इस दिन के आध्यात्मिक महत्व को कई गुना बढ़ा रहे हैं। उज्जैन में इस बार संक्रांति का उत्सव केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ‘श्री महाकाल महालोक’ में भव्य सांस्कृतिक महोत्सव की शुरुआत भी होगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे ‘महाकाल महोत्सव’ का शुभारंभ

संक्रांति की शाम उज्जैन के लिए ऐतिहासिक होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव श्री महाकाल महालोक में भव्य ‘महाकाल महोत्सव’ का शुभारंभ करेंगे। इस दौरान पूरा परिसर ‘शिवोहम’ के दिव्य नाद से गुंजायमान हो उठेगा। यह महोत्सव महाकाल की नगरी की कला और संस्कृति को विश्व पटल पर प्रदर्शित करने का एक बड़ा केंद्र बनेगा।

भस्म आरती में ‘तिल उत्सव’: बाबा का होगा दिव्य श्रृंगार

विश्व प्रसिद्ध भगवान महाकालेश्वर मंदिर में तड़के 4 बजे होने वाली भस्म आरती में संक्रांति का उल्लास दिखेगा:

  • तिल स्नान: बाबा महाकाल को विशेष रूप से तिल के उबटन से स्नान कराया जाएगा।

  • महाभोग: आरती के पश्चात बाबा को तिल से बने विभिन्न पकवानों और व्यंजनों का महाभोग लगाया जाएगा।

पंचांग का गणित: 14 को प्रवेश, 15 को स्नान-दान

ज्योतिष गणना के अनुसार:

  • संक्रमण: 14 जनवरी 2026 दोपहर 3:08 बजे सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

  • दान-पुण्य: 14 जनवरी को संक्रमण काल के साथ ही दान शुरू होगा।

  • विशेष सावधानी: इस दिन षटतिला एकादशी होने के कारण श्रद्धालु खिचड़ी का दान तो करेंगे, लेकिन शास्त्र सम्मत परंपरा के अनुसार चावल के सेवन से परहेज करेंगे।

  • स्नान पर्व: उदय तिथि की मान्यता के अनुसार, पवित्र नदियों में स्नान और विशेष दान-पुण्य 15 जनवरी को मनाया जाएगा।

सांदीपनि आश्रम और सूर्य मंदिरों में भी धूम

  • सांदीपनि आश्रम: भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली में तिल मिश्रित जल से अभिषेक होगा।

  • केशवादित्य मंदिर: मान्यता है कि 5000 साल पहले श्रीकृष्ण ने स्वयं कालियादेह क्षेत्र में केसवार्क सूर्य मंदिर की स्थापना की थी। यहाँ संक्रांति पर विशेष सूर्य साधना होगी।

  • नारादित्य मंदिर: शिप्रा तट पर स्थित इस प्राचीन मंदिर में भी श्रद्धालुओं का तांता लगेगा।

 मकर संक्रांति विशेष तालिका

आयोजन समय/स्थान
भस्म आरती तिल उत्सव सुबह 4:00 बजे, महाकाल मंदिर
सूर्य का मकर राशि प्रवेश 14 जनवरी 2026, दोपहर 3:08 बजे
महाकाल महोत्सव शुभारंभ शाम को, श्री महाकाल महालोक
स्नान-दान का महापर्व 15 जनवरी (उदय तिथि अनुसार)

श्री महाकाल महोत्सव: सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झलक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा शुभारंभ के बाद, महाकाल महालोक में होने वाले प्रमुख आकर्षण कुछ इस प्रकार होंगे:

  • शिवोहम् नाद: 100 से अधिक कलाकारों द्वारा शंख, डमरू और मृदंग का सामूहिक वादन।

  • लेजर एंड साउंड शो: महाकाल महालोक की दीवारों पर शिव विवाह और सूर्य के उत्तरायण होने की गाथा का जीवंत प्रदर्शन।

  • भजन संध्या: सुप्रसिद्ध लोक गायकों द्वारा बाबा महाकाल के भजनों की प्रस्तुति।

  • हस्तशिल्प प्रदर्शनी: मालवा की पारंपरिक कला और उज्जैन के हस्तशिल्प का विशेष बाजार।

षटतिला एकादशी व संक्रांति पर यह दान करें

चूंकि इस बार संक्रांति पर षटतिला एकादशी का संयोग है, इसलिए शास्त्रों के अनुसार छह प्रकार के तिल प्रयोग/दान का विशेष महत्व है। श्रद्धालु इन वस्तुओं का दान कर पुण्य लाभ कमा सकते हैं:

  1. तिल का उबटन: मंदिर या ब्राह्मणों को भेंट करना।

  2. तिल मिश्रित जल: स्नान के लिए जल में तिल मिलाकर दान।

  3. तिल का हवन: हवन सामग्री में तिल का उपयोग।

  4. तिल का तर्पण: पितरों के निमित्त तिल से तर्पण।

  5. तिल के व्यंजन: तिल के लड्डू, गजक और रेवड़ी का दान।

  6. गर्म वस्त्र व कंबल: मकर संक्रांति पर जरूरतमंदों को ऊनी वस्त्र देना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

विशेष टिप: एकादशी होने के कारण खिचड़ी दान में चावल के स्थान पर जौ या बाजरे का उपयोग करना श्रेष्ठ रहेगा यदि आप स्वयं चावल का परहेज कर रहे हैं।


महाकाल दर्शन के लिए विशेष गाइड (14-15 जनवरी)

  • लड्डू प्रसाद: मंदिर समिति ने संक्रांति के लिए 50 क्विंटल अतिरिक्त लड्डू तैयार किए हैं।

  • शिप्रा स्नान: रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट पर 15 जनवरी की सुबह भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और गोताखोरों की विशेष तैनाती रहेगी।

  • दर्शन व्यवस्था: महोत्सव के कारण महालोक में प्रवेश के मार्ग डायवर्ट किए जा सकते हैं।

 

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