उज्जैन के नेशनल जिम्नास्ट उजैर अली की मौत
खेलो इंडिया का 'सितारा' बुझा : नेशनल जिम्नास्ट कलकत्ता में प्रैक्टिस के दौरान हुआ था घायल

उज्जैन। महाकाल की नगरी के एक उभरते हुए सितारे और मध्यप्रदेश के टॉपर नेशनल जिम्नास्ट उजैर अली (17 वर्ष) का ओलंपिक खेलने का सपना अधूरा रह गया। कोलकाता में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप के दौरान घायल हुए उजैर ने 14 दिनों तक अस्पताल में मौत से जूझने के बाद दम तोड़ दिया। शुक्रवार 30 जनवरी 2026 की सुबह खिलाड़ी की पार्थिव देह उज्जैन पहुंची, जहां गमगीन माहौल में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
डबल जंप के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा
स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) द्वारा कोलकाता में आयोजित 69वीं नेशनल चैंपियनशिप के लिए उजैर 11 जनवरी 2026 को मध्यप्रदेश की टीम के साथ रवाना हुए थे।
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कैसे हुई घटना: 16 जनवरी 2026 को प्रतियोगिता शुरू होने से मात्र 10 मिनट पहले उजैर ‘बीएनआर सेंटर’ में वार्मअप कर रहे थे। डबल जंप का अभ्यास करते समय उनका हाथ फिसला और वे सीधे सिर के बल गिरे। इस हादसे में उनकी गर्दन की हड्डी टूट गई और वे लकवाग्रस्त (Paralyzed) हो गए। उन्हें तत्काल कोलकाता के पीजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनके दो ऑपरेशन हुए लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
परिजनों का गंभीर आरोप: “अस्पताल में तड़पता छोड़ आए खेल अधिकारी”
उजैर के मामा डॉ. साकिब और आकिब अली ने मीडिया के समक्ष मध्यप्रदेश के खेल दल के कोच और मैनेजर पर संवेदनहीनता के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि उजैर को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद कोच सुंदर लाल और मैनेजर रामसिंह बनिहार अन्य खिलाड़ियों के साथ वापस लौट आए। जब परिजन कोलकाता पहुंचे, तो वहां कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था। अधिकारियों के असहयोग और कागजी खानापूर्ति की कमी के कारण मौत के बाद शव का पोस्टमार्टम होने में 25 घंटे लग गए। शुक्रवार 30 जनवरी 2026 की सुबह फ्लाइट से पार्थिव देह इंदौर और फिर सड़क मार्ग से उज्जैन लाई गई।
मैनेजर की सफाई: “42 बच्चों की जिम्मेदारी थी”
वहीं, टीम मैनेजर रामसिंह बनिहार ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए मीडिया से कहा कि उनके ऊपर 43 बच्चों की जिम्मेदारी थी और उन्हें प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद टीम को लेकर लौटना था। उन्होंने बताया कि बंगाल सरकार और SGFI ने पूरा सहयोग किया और परिजनों के आने तक हर संभव मदद की गई।
ओलंपिक का सपना और पिता की मजदूरी
भार्गव मार्ग सब्जी मंडी क्षेत्र में रहने वाले मजहर अली का बेटा उजैर बचपन से ही जिम्नास्टिक्स के प्रति जुनूनी था। स्टडी होम स्कूल में पढ़ने वाले उजैर ने राज्य स्तर पर कई स्वर्ण पदक जीते थे और उन्हें ‘एमपी टॉपर जिम्नास्ट’ का खिताब मिला था। मजदूरी करने वाले पिता ने पेट काटकर बेटे को नेशनल लेवल तक पहुंचाया था, ताकि वह एक दिन देश के लिए ओलंपिक पदक जीत सके।
घटना के बाद सुलगता सवाल
क्या नेशनल लेवल की स्पर्धाओं में खिलाड़ियों के साथ जाने वाले कोच और मैनेजर की जिम्मेदारी केवल मैदान तक सीमित है? एक 17 साल का बच्चा जो प्रदेश के लिए खेलने गया था, उसे जीवन और मौत के बीच कोलकाता जैसे अनजान शहर में किसके भरोसे छोड़ा गया? खेल विभाग को इस मामले में जवाबदेही तय करनी होगी।
श्रद्धांजलि: उजैर अली केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि उज्जैन की उम्मीद थे। खेलते हुए ही दुनिया को अलविदा कह देने वाले इस ‘शहीद’ खिलाड़ी को समाचार आज की पूरी टीम सादर नमन करती है।



