आंखों की नकली दवा बनाकर बेच रहे चार कारोबारियों को 3-3 वर्ष की कैद
2016 के बहुचर्चित नकली दवा केस में जिला एवं सत्र न्यायालय का सख्त फैसला

उज्जैन। शहर में आंखों की नकली दवाई बनाकर बेचने वाले चार कारोबारियों को जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीन-तीन साल की सजा सुनाई है।
मंगलवार 17 दिसंबर 2025 को यह फैसला प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीसी गुप्ता की अदालत ने सुनाया। न्यायालय ने संतोष कुमार धींग पिता समरतमल निवासी शिवाजी पार्क कॉलोनी उज्जैन, राजेन्द्र शर्मा पिता छिंगाराम निवासी विजय नगर इंदौर, प्रवीण शाह निवासी इंदौर और शांतिलाल निवासी बेंगलूरु को यह सजा सुनाई है।
21 सितंबर 2016 को खाद्य एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने नागझिरी देवास रोड रोड स्थित सिमको ऑर्गेनिक्स फैक्ट्री पर छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान बिना लाइसेंस निर्मित एलोपैथिक दवाएं, क्लोरामफेनिकॉल आई ऑइंटमेंट, सॉफ्ट जिलेटिन कैप्सूल, 2.6 किग्रा प्रिंटेड एल्यूमीनियम लेबल, पैकिंग सामग्री, मशीनें और फर्जी लेबल जब्त किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि एक साल के भीतर करीब 24 लाख रुपए व नकली दवाओं का अवैध विक्रय किया गया। मामले में अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक उमेशसिंह तोमर ने पैरवी की।
चार फर्म मिलकर कर रहे थे नकली दवा का कारोबार
- संतोष कुमार धींग की फर्म मेसर्स सिमको ऑर्गेनिक्स, उज्जैन में बिना लाइसेंस दवाओं का भंडारण और पैकिंग की जा रही थी, जहां से आपत्तिजनक सामग्री जब्त हुई।
- राजेन्द्र शर्मा, मेसर्स सॉफ्ट मेडिकेप्स लिमिटेड, देवास के नाम पर प्रतिबंधित तरीके से एलोपैथिक दवाओं का निर्माण करवा रहा था।
- प्रवीण शाह की मेसर्स अल्फा एनालिटिकल लैबोरेटरी, इंदौर ने अधिनियम के विपरीत फर्जी जांच रिपोर्ट जारी कर खेल को वैध दिखाने का प्रयास किया।
- शांतिलाल, मेसर्स शांतिलाल एंड कंपनी, बेंगलूरु ने बिना वैध अनुमति 24 लाख रुपए की एलोपैथिक दवाएं सिमको ऑर्गेनिक्स को बेचकर अवैध कारोबार को हवा दी।


