पेटी कॉन्ट्रैक्ट के फेर में फंसा सिंहस्थ के लिए बन रहा हरिफाटक ब्रिज प्रोजेक्ट
हरिफाटक ब्रिज 10 महीने में 15% की बना, सुस्त रफ्तार पर एजेंसी पर 5 लाख का जुर्माना

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उज्जैन के बहुप्रतीक्षित हरिफाटक फोरलेन ब्रिज निर्माण के 10 महीने बीतने के बाद भी केवल 15 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। 156 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को रवि इंफ्रा कंपनी ने 35% कम यानी 102 करोड़ में लिया था और बाद में काम पेटी (Sub-contract) पर दे दिया। तय डेडलाइन अक्टूबर 2027 है, लेकिन धीमी गति के कारण सिंहस्थ 2028 से पहले निर्माण पूरा होने पर संशय बना हुआ है।
उज्जैन। साल 2028 में होने वाले सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर भले ही प्रशासन बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की सुस्त रफ्तार अधिकारियों की नींद उड़ा रही है। उज्जैन के व्यस्ततम मार्गों में शुमार हरिफाटक पर बनने वाले नए फोरलेन ब्रिज का भूमिपूजन हुए 10 महीने बीत चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य अब तक महज 15 प्रतिशत ही हो पाया है।
अधिकारियों के लगातार निर्देशों और फटकार के बावजूद काम करने वाली निर्माण एजेंसी काम की स्पीड बढ़ाने को तैयार नहीं है। कंपनी अपने लिखित टेंडर एग्रीमेंट और नियमों का हवाला देकर अपनी मर्जी से काम करने की बात कह रही है। यही वजह है कि इसी साल जनवरी में मुख्यमंत्री के हाथों भव्य भूमिपूजन होने के बावजूद ठेकेदार तय समय सीमा के भीतर प्रोजेक्ट पूरा करने को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है।
156 करोड़ का प्रोजेक्ट 102 करोड़ में देने पर उठे थे सवाल
गौरतलब है कि हरिफाटक ब्रिज निर्माण के लिए जब वर्कऑर्डर जारी हुए थे, तभी मीडिया ने जिम्मेदारों को इसकी सुस्त कार्यप्रणाली और वित्तीय विसंगतियों को लेकर आगाह किया था।
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कम दर पर ठेका: विभाग द्वारा इस ब्रिज के निर्माण की अनुमानित लागत 156 करोड़ रुपये आंकी गई थी। लेकिन रवि इंफ्रा नामक कंपनी ने निर्धारित लागत से करीब 35 प्रतिशत कम यानी मात्र 102 करोड़ रुपये में इस टेंडर को हासिल कर लिया। यानी सरकार के अनुमान से 54 करोड़ रुपये कम दर पर यह काम लिया गया।
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पेटी कॉन्ट्रैक्ट का खेल: कम दर पर टेंडर लेने के बाद मुख्य कंपनी ने निर्माण की यह बड़ी जिम्मेदारी भोपाल के किसी अन्य ठेकेदार को ‘पेटी’ (Sub-contract) पर सौंप दी। कम लागत पर काम लेने और फिर उसे दूसरे ठेकेदार से कराने के इसी वित्तीय गणित के चक्कर में ब्रिज का निर्माण आज तक रफ्तार नहीं पकड़ पाया है।
सिंहस्थ 2028 से पहले निर्माण पूरा न हुआ तो बढ़ेंगी मुश्किलें
टेंडर की शर्तों के हिसाब से इस ब्रिज का निर्माण कार्य अक्टूबर 2027 तक पूरा किया जाना है। हालांकि, मौजूदा 15% की धीमी प्रगति को देखते हुए यह असंभव प्रतीत हो रहा है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चिंता सिंहस्थ 2028 को लेकर है। तय शेड्यूल के मुताबिक, जनवरी 2028 के बाद प्रशासन और पुलिस का पूरा फोकस मेला क्षेत्र को व्यवस्थित करने और श्रद्धालुओं की व्यवस्था संभालने पर रहेगा। ऐसे में ब्रिज निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग करना असंभव हो जाएगा। यदि तय समय तक काम अधूरा रह गया, तो देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सिक्सलेन से सीधे महाकाल मंदिर तक पहुंचने के लिए मजबूरन उसी पुराने और संकरे हरिफाटक ब्रिज से गुजरना पड़ेगा, जिससे शहर में भारी ट्रैफिक जाम और व्यवस्थाएं चरमराने का खतरा पैदा हो जाएगा।
एजेंसी पर 5 लाख की पेनल्टी
सिंहस्थ तैयारियों को लेकर शनिवार 17 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में हरिफाटक ब्रिज निर्माण में हो रही अत्यधिक देरी का मुद्दा प्रमुखता से उठा।
मप्र रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन (MPRDC) के अधिकारियों से प्रोजेक्ट की प्रगति की रिपोर्ट लेने के बाद संभागायुक्त ने कार्य में लापरवाही और देरी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तत्काल प्रभाव से निर्माण एजेंसी पर 5 लाख रुपये की पेनल्टी लगाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी गई है कि यदि काम की गति नहीं सुधारी गई, तो और भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
उज्जैन आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए हरिफाटक फोरलेन ब्रिज का समय पर तैयार होना बेहद जरूरी है। लेकिन ठेकेदार की मनमानी, पेटी कॉन्ट्रैक्ट की संस्कृति और प्रशासनिक मॉनिटरिंग की ढिलाई के चलते यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अपनी तय समय-सीमा से पिछड़ता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की इस पेनल्टी और सख्ती के बाद क्या निर्माण एजेंसी अपनी रफ्तार बढ़ाती है या उज्जैनवासियों और सिंहस्थ के श्रद्धालुओं को ट्रैफिक की भीषण समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।



