इलाज के नाम पर हैवानियत : माथे पर गर्म सिक्का चिपकाया, हथेलियां जलाईं

उज्जैन: धर्मनगरी उज्जैन में इलाज और कथित ‘प्रेत आत्मा’ से मुक्ति दिलाने के नाम पर एक 22 वर्षीय महिला के साथ अमानवीयता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़िता उर्मिला की दोनों हथेलियों और सिर को गर्म सिक्के से बुरी तरह जला दिया गया। असहनीय दर्द के कारण वह वहीं बेहोश हो गई थी।
नवरात्रि की सप्तमी को हुई घटना, 10 दिन बाद FIR
यह भयावह घटना 29 सितंबर 2025 को खाचरोद के श्रीवच्छ गांव में हुई थी। गंभीर रूप से जलने और प्रताड़ना सहने के 10 दिन बाद गुरुवार (9 अक्टूबर) को पीड़िता ने महिला थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में 8 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है, जिसमें कथित तौर पर झाड़-फूंक करने वाली महिला और उसके सहयोगी शामिल हैं।

प्रताड़ना की पूरी घटना?
जूना सोमवारिया की रहने वाली उर्मिला कुछ समय से बीमार चल रही थी। डॉक्टर से इलाज के बावजूद जब तबीयत ठीक नहीं हुई, तो उसकी मां हंसा को पता चला कि श्रीवच्छ गांव में सुधा बाई नाम की महिला के शरीर में ‘माता’ आती हैं और वह प्रेत आत्माओं से मुक्ति दिलाती हैं।
नवरात्रि की सप्तमी के दिन उर्मिला अपनी मां और दो अन्य परिजनों के साथ गांव पहुंची। उर्मिला की मां को बाहर ही रोक दिया गया। इसके बाद:
- कमरे में ले जाकर पीटा: सुधा बाई, उसके बेटे कान्हा और 6 अन्य लोगों ने उर्मिला को अकेले कमरे में ले जाकर जंजीरों से पीटा और बांध दिया।
- हथेलियां जलाईं: उन्होंने घी में लगी रूई की बत्ती से उर्मिला की दोनों हथेलियां तब तक जलाईं जब तक कि वह जल नहीं गईं।
- सिर पर चिपकाया गर्म सिक्का: इसके बाद महिला के माथे पर एक गर्म सिक्का चिपका दिया गया, जिससे सिर की चमड़ी निकल गई। इस भयानक यातना से उर्मिला वहीं बेहोश हो गई थी।
8 लोगों पर केस दर्ज, तीन हिरासत में
गुरुवार 9 अक्टूबर शाम को पीड़िता ने थाने पहुंचकर जब अपनी जली हुई हथेलियां और सिर दिखाया तो महिला थाने की टीआई लीला सोलंकी भी हैरान रह गईं। शुरुआती जांच में पता चला कि श्रीवच्छ गांव में सुधा बाई इस तरह के टोटके और पूजन पाठ करती है।
महिला की शिकायत पर सुधा बाई, उसका बेटा कान्हा, मनोहर भील, संतोष चौधरी, राजू चौधरी, कान्हा चौधरी और रितेश चौधरी सहित आठ लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया है।
पीड़िता, जो अपने पति से अलग होकर अगरबत्ती बनाकर अपनी दो साल की बेटी का गुजारा चलाती है, ने बताया कि खराब स्वास्थ्य के कारण ही उन्होंने पूजा-पाठ का सहारा लिया था। टीआई ने बताया कि घटना के 10 दिन बाद भी महिला के हाथों में गंभीर छाले हैं। यह घटना दिखाती है कि अंधविश्वास और झाड़-फूंक के नाम पर समाज में किस हद तक क्रूरता और प्रताड़ना दी जा सकती है।



