सरोकार

सनातन धर्म की विकृति रोकने के लिए श्री महाकाल विद्वत परिषद का गठन

विद्वत परिषद करेगी शास्त्र सम्मत निर्णय और सनातन धर्म पर टिप्पणी करने वालों का विरोध

उज्जैन। उज्जैन के विद्वानों ने शुक्रवार 17 अक्टूबर 2025 को महत्वपूर्ण  निर्णय लेते हुए श्री महाकाल विद्वत परिषद का गठन किया है। वर्तमान में देश में सनातन धर्म की मान्यताओं, परंपराओं, वेदों और शास्त्रों में निहित बातों पर हो रही अनर्गल टिप्पणियों और धर्म को मनोरंजन का साधन मात्र समझने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

युवा ब्राह्मण समाज अध्यक्ष गोपाल पुजारी ने बताया कि चाणक्य पुरी स्थित श्री परशुराम मंदिर पर अखिल भारतीय पुजारी महासंघ, अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज और महाकाल सेना की संयुक्त बैठक हुई। इसमें संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी की अध्यक्षता में श्री महाकाल विद्वत परिषद का गठन किया गया।

यह विद्वत परिषद देश में सनातन धर्म के विपरीत निर्णय देने वाले और कार्य करने वाले लोगों को रोकेगी। इसका मुख्य उद्देश्य  शास्त्र, वेद, पुराण एवं अन्य ग्रंथों में निहित प्रमाणित निर्णय सनातन धर्मावलंबियों को बताना है।

इसलिए किया विद्वत परिषद का गठन

धर्मशास्त्र युक्त निर्णय-लोगों में फैले असमंजस को दूर करने के लिए त्योहारों की असमानता में धर्म शास्त्र युक्त निर्णय देना।

  • एक तिथि एक त्योहार- एक तिथि पर एक ही त्योहार मनाने की व्यवस्था बनाना।
  • विसर्जन में विकृति- गणेश विसर्जन और देवी विसर्जन में आ रही विकृति को रोकना और समय पर विसर्जन सुनिश्चित करना, ताकि आयोजकों, भक्तों को जन-धन का नुकसान न हो और धर्म की हानि रुके।
  • धूमिल होती परंपरा- देश में आए दिन सनातन धर्म पर बयानबाजी करने वाले और मंदिरों की परंपरा को धूमिल करने वाले लोगों का पुरजोर विरोध करना (जैसे महाकाल पर चढऩे वाली भांग को शास्त्र विरुद्ध बताना या नवरात्रि में नगर पूजा की परंपरा को रोकना)।

विद्वत परिषद के सदस्य

विद्वत परिषद में देश के विभिन्न स्थानों के प्रतिष्ठित आचार्य और विद्वानों को शामिल किया गया है, जिनमें आचार्य पं. गोपाल शुक्ल (उज्जैन), आचार्य पं. आशीष अग्निहोत्री (उज्जैन), आचार्य पं. संजय शर्मा (दमन दीव), आचार्य पं. नरेंद्र त्रिपाठी (इंदौर), आचार्य पं. अभिषेक पण्डा (काशी) और आचार्य पं. मनोज शास्त्री (उज्जैन) को सदस्य बनाया गया है।

रावण दहन के विरोध का संकल्प

बैठक में रावण दहन पर भी विस्तृत चर्चा हुई। उपस्थित सभी सदस्यों और ब्राह्मणों ने एक मत से रावण दहन का विरोध किया और इसे बंद कराने का संकल्प लिया। इसके लिए आगामी समय में काली पट्टी बांधकर विरोध करना, धरना प्रदर्शन, पुतले दहन और आवश्यकता पडऩे पर न्यायालय की शरण भी ली जाएगी। शीघ्र ही इन विषयों को लेकर देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर धर्मानुसार और शास्त्रानुसार पक्ष बताते हुए रावण दहन बंद करने की मांग की जाएगी। बैठक में राकेश जोशी (राका गुरु), रूपेश मेहता, सुरेश शर्मा, महेंद्र सिंह बैंस, राहुल व्यास, राहुल जोशी, कन्हैया पहलवान, मनोहर भैया, घनश्याम दीक्षित, अमृतेश त्रिवेदी, राम शर्मा, आशीष ठक्कर, गोविंद व्यास, नंदन गुरु, चंद्रमोहन गुरु, अरुण गुरु, आदित्य गुरु, हिमांशु, सोनू, नारायण, भोजराज, अरुण, मनोज भैया, देवकीनंदन, चंद्र मोहन, अजय दुबे, विजय दुबे मुख्य रूप से उपस्थित थे।

-हरिओम राय
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