उज्जैन के कॉस्मेटिक कारोबारियों को इंदौरी ठग ने लगाई 40 लाख की चपत
इंदौरी ठग रातों-रात दुकान बढ़ाकर फरार; भरोसा जीतने के लिए पहले किया 'नकद' काम,फर्जी आधार कार्ड से लिया था कमरा

उज्जैन, समाचार। शहर के थोक कॉस्मेटिक व्यापारियों के साथ इंदौरी ठग द्वारा लाखों रुपये की ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इंदौर से आए एक शातिर ठग ने पहले व्यापारियों का भरोसा जीता और फिर करीब 10 से ज्यादा कारोबारियों से 40 लाख रुपये का माल समेटकर रफूचक्कर हो गया। ठग ने इंदौर में भी ढाई करोड़ रुपये की ठगी की है, ऐसी जानकारी सामने आ रही है।
ठग ने अपना नाम हनिसिंह (या शंकरसिंह) बताया था। उसने कुशलपुरा में त्रिमूर्ति टॉकीज के सामने रामेश्वर सोनगरा की दुकान 10 हजार रुपये महीने पर किराए पर ली।
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व्यवसाय का तरीका: उसने ‘रेखा इंटरप्राइजेस’ के नाम से फर्म बनाई। शुरुआत में देवासगेट और इंदौरगेट के थोक व्यापारियों से 2 से 5 लाख रुपये का माल (डायपर, क्रीम, हेयर ऑयल, साबुन) खरीदा और तुरंत नकद भुगतान किया।
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बड़ी ठगी: जब व्यापारियों को उस पर भरोसा हो गया, तो पिछले हफ्ते उसने सभी से लाखों रुपये का माल उधार उठाया और रातों-रात दुकान बढ़ाकर भाग निकला। पिछले 8 दिनों से उसका मोबाइल बंद है और दुकान पर ताला लटका है।
फर्जी आधार कार्ड और ‘किराये’ की पत्नी
दुकान मालिक रामेश्वर सोनगरा ने बताया कि एग्रीमेंट के समय वह रेखा नाम की एक महिला को साथ लाया था, जिसे उसने अपनी पत्नी बताया।
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संदेह के घेरे में दस्तावेज: एग्रीमेंट के लिए इंदौर के विजय नगर निवासी रेखा के आधार कार्ड की फोटोकॉपी दी गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इस आधार कार्ड में पिता या पति का नाम दर्ज नहीं है, जिससे इसके फर्जी होने की पूरी आशंका है।
इंदौर में भी किया ढाई करोड़ का ‘हाथ साफ’
उज्जैन के व्यापारियों ने जब अपने स्तर पर पड़ताल की, तो पता चला कि यह शातिर ठग पहले इंदौर के काछी मोहल्ला इलाके में भी इसी तरह की फर्म डाल चुका है। वहां भी इसने व्यापारियों को करीब 2.50 करोड़ रुपये का चूना लगाया और फरार हो गया। इंदौर पुलिस भी इसकी तलाश कर रही है।
व्यापारियों ने देवासगेट थाने में की शिकायत
ठगी का शिकार हुए व्यापारियों ने देवासगेट थाने पहुँचकर अपनी पीड़ा सुनाई है। पुलिस अब दुकान मालिक द्वारा दिए गए सीसीटीवी फुटेज और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरोपी की तलाश में जुट गई है।
ठगी से बचने का रामबाण इलाज: पुलिस वेरिफिकेशन
उज्जैन और इंदौर जैसे शहरों में बढ़ते व्यापारिक फ्रॉड को देखते हुए, किसी भी नए किरायेदार या व्यापारिक पार्टनर का वेरिफिकेशन कराना अब कानूनी रूप से भी अनिवार्य और सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है।
1. ऑनलाइन प्रक्रिया (सबसे आसान):
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MP Police Citizen Portal: मध्य प्रदेश पुलिस की वेबसाइट citizen.mppolice.gov.in पर जाएं।
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वहां ‘Tenant/Character Verification’ विकल्प चुनें।
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किरायेदार/व्यापारी का आधार कार्ड, फोटो और स्थायी पते की जानकारी अपलोड करें।
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मामूली शुल्क जमा करने के बाद पुलिस उनके मूल निवास (जैसे इंदौर या अन्य शहर) से रिकॉर्ड की जांच कर रिपोर्ट देती है।
2. ऑफलाइन प्रक्रिया:
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अपने नजदीकी थाने से ‘किरायेदार सूचना फॉर्म’ प्राप्त करें।
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उसमें व्यक्ति की फोटो, आईडी प्रूफ और उसके दो पहचानकर्ताओं (Guarantors) के नाम-नंबर भरें।
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फॉर्म की एक कॉपी रिसीविंग के तौर पर अपने पास जरूर रखें।
3. व्यापारियों के लिए ‘प्रो-टिप’:
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जीएसटी (GST) नंबर की जांच: यदि कोई नई फर्म बड़ा ऑर्डर दे रही है, तो उसके GST नंबर को gst.gov.in पर जाकर ‘Search Taxpayer’ में चेक करें। इससे पता चल जाएगा कि फर्म कितनी पुरानी है और उसका पता सही है या नहीं।
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फिजिकल पते की जांच: केवल फोन पर बात न करें, एक बार उनकी पेढ़ी या गोदाम पर अपने किसी कर्मचारी को जरूर भेजें।
अगर आपने वेरिफिकेशन नहीं कराया तो…
यदि आपका किरायेदार किसी अपराध में संलिप्त पाया जाता है और आपने पुलिस को सूचना नहीं दी है, तो धारा 188 (सरकारी आदेश की अवहेलना) के तहत मकान मालिक पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
-हरिओम राय, समाचार आज (samacharaaj.com)
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