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सिंहस्थ कामों के साथ सोना-चांदी व बर्तन व्यापारियों के उज्जैन में बनेगा नया बाजार

सिंहस्थ चौड़ीकरण प्रभावित व्यापारियों को नजर अली मिल और कवेलु कारखाना में विस्थापित करने के सीएम के आदेश

वर्तमान में उज्जैन में 20 हजार करोड़ रुपये की लागत से 175 निर्माण कार्य प्रगति पर हैं; अक्टूबर 2027 तक सभी काम पूरे करने की समय-सीमा तय। सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित होने वाले बर्तन व सोना-चांदी व्यापारियों के पुनर्वास के लिए विक्रम क्लॉथ मार्केट की तर्ज पर नया बाजार विकसित करने के आदेश।

उज्जैन । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले  सिंहस्थ की तैयारियों एवं निर्माण कार्यों की सोमवार 19 अक्टूबर 2026 को समीक्षा की। जिसमें उन्होंने निर्देश दिए हैं कि  बर्तन सोना-चांदी सहित प्रभावित व्यापारियों को विक्रमादित्य क्लाथ मार्केट की तरह ही नया बाजार तैयार किया जाए। यह बाजार नजर अली मिल कंपाउंड और कवेलु कारखाना की जमीन पर तैयार होंगे।

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्यों से प्रभावित होने वाले स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों के हितों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में विकास कार्यों को लेकर नागरिकों का सकारात्मक सहयोग मिल रहा है, इसलिए प्रशासन की जिम्मेदारी है कि व्यापारियों के व्यवसाय को नुकसान न पहुंचे।

  • पुनर्वास योजना: सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित होने वाले व्यापारियों के रोजगार को पुनः स्थापित करने के लिए प्रभावी योजना बनाई जाएगी।

  • विशेष बाजारों के लिए नए स्थल: बर्तन बाजार और सोना-चांदी के व्यापारियों के पुनर्वास के लिए नजर अली मिल क्षेत्र, कवेलू कारखाना क्षेत्र या आसपास के स्थानों पर विक्रम क्लॉथ मार्केट की तर्ज पर सर्वसुविधायुक्त नया बाजार विकसित करने की संभावनाओं पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • जिन छोटे दुकानदारों के पास कोई वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं है, उन्हें भी नए विकसित बाजारों में प्राथमिकता से समायोजित किया जाएगा।

एक सप्ताह में मिलेंगे कई कर्मचारी-अधिकारी

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सिंहस्थ से जुड़े सभी निर्माण कार्य तय समय-सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं। जिन कार्यों की शासकीय स्वीकृति लंबित है, उन्हें आगामी नवंबर माह में अनिवार्य रूप से मंजूरी दिलाई जाए। तैयारियों को प्रशासनिक गति देने के लिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सिंहस्थ मेला कार्यालय, कलेक्ट्रेट और सिंहस्थ सेल में आवश्यक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति इसी सप्ताह में पूरी की जाए। इसके साथ ही, सभी संबंधित विभागों को सिंहस्थ के लिए समर्पित और पृथक अमला तैनात करने को कहा गया है ताकि किसी भी प्रोजेक्ट में प्रशासनिक ढिलाई या विलंब न हो। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जैसे-जैसे निर्माण कार्य पूरे होते जाएं, उन्हें तुरंत आम जनता के उपयोग के लिए खोल दिया जाए, ताकि नागरिकों को इसका लाभ समय पर मिल सके।

श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए व्यापक कार्ययोजना

सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन, ठहरने और प्राथमिक सुविधाओं के लिए व्यापक योजनाएं तैयार की जा रही हैं:

  1. स्कूल-कॉलेजों और सांदीपनि विद्यालयों का उपयोग: श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए शहर के आसपास के स्कूलों और कॉलेजों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां पीने का पानी, शौचालय निर्माण, मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। सांदीपनि विद्यालयों का उपयोग भी इस हेतु होगा।

  2. टेंट सिटी और होल्डिंग एरिया: घट्टिया, तराना और प्रमुख आवागमन मार्गों पर विशाल टेंट सिटी और होल्डिंग एरिया विकसित किए जाएंगे। इसके लिए किसानों और सामाजिक संस्थाओं को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

  3. होम स्टे का विस्तार: शहर में ‘होम स्टे’ (Home Stay) संस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि स्थानीय निवासियों को भी आर्थिक लाभ मिले और श्रद्धालुओं को घरेलू माहौल में ठहरने का अवसर मिले।

  4. जल आपूर्ति और सीवरेज: शहर के आंतरिक क्षेत्रों और मेला क्षेत्र में पेयजल की निर्बाध आपूर्ति और सीवरेज सिस्टम के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा गया है।

  5. पृथक सिंहस्थ विद्युत डिवीजन: सिंहस्थ के दौरान 24×7 बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अंतर्गत एक समर्पित सिंहस्थ डिवीजन स्थापित किया जाएगा।

  6. यातायात एवं पार्किंग: श्रद्धालुओं के वाहनों की पार्किंग के लिए पर्यटन विभाग और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से स्मार्ट ट्रैफिक और पार्किंग प्लान तैयार करेंगे।

20 हजार करोड़ रुपये के 175 प्रोजेक्ट्स: अक्टूबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

बैठक में संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह तथा कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने सिंहस्थ-2028 के विकास कार्यों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये की कुल लागत से 175 निर्माण कार्य संचालित हो रहे हैं। इन सभी बड़े प्रोजेक्ट्स को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए एक सख्त टाइमलाइन तय की गई है।

  • दिसंबर 2026 तक: 51 निर्माण कार्य पूरे किए जाएंगे।

  • जनवरी से मार्च 2027 तक: 36 कार्यों को पूर्ण करने का लक्ष्य है।

  • अप्रैल से जून 2027 तक: 61 प्रोजेक्ट्स पूरे होंगे।

  • जुलाई से अक्टूबर 2027 तक: शेष 23 निर्माण कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे।

पड़ोसी राज्यों से समन्वय और पंचक्रोशी यात्रा मार्ग का कायाकल्प

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिप्रा नदी के घाटों तक पहुंचने वाले मार्गों के चौड़ीकरण और विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके साथ ही, उज्जैन की प्रसिद्ध पंचक्रोशी यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूर्व निर्धारित योजना के तहत स्थायी डोम (Shelters) विकसित किए जाएं।

सिंहस्थ के दौरान देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए मध्य प्रदेश प्रशासन पड़ोसी राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय बैठकें आयोजित कर अंतरराज्यीय परिवहन की अग्रिम कार्ययोजना बनाएगा। इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मध्य प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान, विधायक सतीश मालवीय, उज्जैन महापौर मुकेश टटवाल, सिंहस्थ प्राधिकरण के अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) अध्यक्ष रवि सोलंकी, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष ओम जैन, भाजपा नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल सहित भोपाल से आए प्रमुख सचिव, सचिव स्तर के प्रशासनिक अधिकारी तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

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