
उज्जैन (मध्य प्रदेश)। धार्मिक नगरी उज्जैन में आगामी सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों और भूमि संरक्षण को लेकर प्रशासनिक अमला पूरी तरह सख्त रुख अपनाए हुए है। सिंहस्थ क्षेत्र की आरक्षित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के अभियान के तहत रविवार 18 अक्टूबर 2026 तड़के नगर निगम की टीम ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।
जयसिंहपुरा क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध नरसिंह घाट के पास बने महासिद्ध आश्रम (एमएस सुकृत ट्रस्ट) के अवैध निर्माण पर नगर निगम का बुलडोजर और पोकलैंड मशीनें तड़के ही गरज उठीं।
सुबह 5 बजे पहुंची रिमूवल टीम, 3 पोकलैंड से ध्वस्तीकरण
मिली जानकारी के अनुसार, रविवार तड़के करीब 5 बजे जब पूरा शहर सो रहा था, तब नगर निगम की रिमूवल गैंग भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंची। टीम के साथ 3 बड़ी पोकलैंड मशीनें थीं।
अधिकारियों ने बिना वक्त गंवाए आश्रम परिसर में सिंहस्थ की जमीन पर बिना अनुमति बनाए गए नए भवन को ढहाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। देखते ही देखते पोकलैंड की मदद से नवनिर्मित पक्के भवन के प्रमुख अवैध हिस्सों को पूरी तरह ज़मींदोज़ कर दिया गया।
दो बार नोटिस जारी, तय समय सीमा खत्म होने पर एक्शन
नगर निगम के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि सिंहस्थ क्षेत्र के लिए सुरक्षित की गई सरकारी जमीन पर हाल के दिनों में तीन अलग-अलग पक्के भवनों का निर्माण कर लिया गया था। यह पूरी तरह से नियमों का उल्लंघन और अवैध कब्जा था।
सामान खाली करने के लिए दी गई मोहलत
कार्रवाई के दौरान जब पोकलैंड की मदद से ढांचे को तोड़ा जा रहा था, तब प्रशासनिक अधिकारियों को जानकारी मिली कि इस नवनिर्मित भवन के भीतर आश्रम की काफी मूल्यवान सामग्री, फर्नीचर और अन्य सामान रखा हुआ है।
संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई को अस्थायी रूप से रोक दिया। आश्रम के प्रतिनिधियों को भवन के भीतर से सारा सामान सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक निश्चित समय सीमा दी गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि दी गई समय सीमा जैसे ही समाप्त होगी, निगम की टीम दोबारा मौके पर पहुंचेगी और शेष बचे अवैध निर्माण को ढहाने का काम पूरा किया जाएगा।
दो दिन पहले भी आश्रम पर चला था बुलडोजर
गौरतलब है कि उज्जैन नगर निगम प्रशासन सिंहस्थ भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए पिछले कुछ समय से एक व्यापक और चरणबद्ध अभियान चला रहा है।
इसी कड़ी में मात्र दो दिन पहले भी निगम की टीम ने महासिद्ध आश्रम के पास ही स्थित सत्यगिरि महाराज (हरियाणा वाले) के आश्रम पर बड़ी कार्रवाई की थी। वहां भी सिंहस्थ की आरक्षित भूमि पर बिना इजाजत पक्का निर्माण खड़ा कर लिया गया था, जिसे पोकलैंड और जेसीबी की मदद से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया था।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, उज्जैन में सिंहस्थ क्षेत्र की आरक्षित जमीनों का सैटेलाइट और मैपिंग सर्वे कराया जा रहा है। आने वाले दिनों में कई अन्य अवैध ढांचों पर भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
भवन अधिकारी राजकुमार राठौर का बयान:
“सिंहस्थ क्षेत्र की भूमि महापर्व के दौरान देश-दुनिया से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधाओं, टेंट सिटी और बुनियादी ढांचे के लिए आरक्षित है। इस जमीन पर किसी भी तरह का स्थायी या अस्थायी अवैध निर्माण स्वीकार्य नहीं होगा। आश्रम प्रबंधन को निर्माण स्वयं हटाने के लिए पहले भी दो बार औपचारिक नोटिस जारी किए जा चुके थे। लेकिन समयावधि समाप्त होने के बाद भी जब निर्माण नहीं हटाया गया, तब निगम को यह कदम उठाना पड़ा।”
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