उज्जैन का बजा डंका: सम्राट विक्रमादित्य विवि अब देश में सर्वश्रेष्ठ, ‘इमर्जिंग यूनिवर्सिटी’ का प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार मिला
कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने बेंगलुरु में ग्रहण किया सम्मान

बेंगलुरु के ‘सेंचुरी क्लब’ में आयोजित भव्य समारोह में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन को मिला ‘द बेस्ट इमर्जिंग यूनिवर्सिटी ऑफ द ईयर 2026’ का सम्मान। कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने वर्ल्ड ग्लोबल ह्यूमन राइट्स काउंसिल, नेशनल प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और द न्यूजपेपर्स एसोसिएशन ऑफ कर्नाटक के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में पुरस्कार ग्रहण किया। पीएम मेरु (PM MERU) योजना के तहत 100 करोड़ रुपये के 19 अनुसंधान प्रोजेक्ट्स और ‘ज्ञान भारतम्’ योजना के अंतर्गत 26 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर चमका विश्वविद्यालय।
उज्जैन । धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी उज्जैन ने अब उच्च शिक्षा एवं आधुनिक अनुसंधान के क्षेत्र में भी देश-विदेश में अपनी सफलता का परचम लहरा दिया है। उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व नवाचार, उत्कृष्ट शैक्षणिक माहौल और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘द बेस्ट इमर्जिंग यूनिवर्सिटी ऑफ द ईयर 2026’ (The Best Emerging University of the Year 2026) का प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया है।
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित ‘सेंचुरी क्लब’ के नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार हॉल में 16 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक गरिमामय राष्ट्रीय समारोह में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने यह प्रतिष्ठित ‘वर्ल्ड ग्लोबल एजुकेशन एक्सीलेंस अवार्ड’ सहर्ष ग्रहण किया। इस भव्य आयोजन का आयोजन वर्ल्ड ग्लोबल ह्यूमन राइट्स काउंसिल, नेशनल प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और द न्यूजपेपर्स एसोसिएशन ऑफ कर्नाटक के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के कई दिग्गज शिक्षाविद्, शोधकर्ता, नीति निर्माता और वरिष्ठ राजनयिक गवाह बने।
करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट्स और शोध कार्यों से मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने इस गौरवमयी उपलब्धि पर जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय को यह राष्ट्रीय सफलता अचानक नहीं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में किए गए निरंतर नवाचारों, शानदार शैक्षणिक प्रगति और वृहद अनुसंधान परियोजनाओं के दम पर हासिल हुई है।
वर्तमान में विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व की कई उच्च स्तरीय परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं:
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पीएम मेरु (PM MERU) योजना: इस योजना के तहत विश्वविद्यालय को 100 करोड़ रुपये का भारी-भरकम अनुदान प्राप्त हुआ है, जिसके माध्यम से 19 बहु-विषयक अनुसंधान परियोजनाओं (Multi-disciplinary Research Projects) पर काम चल रहा है।
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ज्ञान भारतम् योजना: उज्जैन की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए ‘ज्ञान भारतम्’ योजना के अंतर्गत 26 करोड़ रुपये की लागत से सिंधिया प्राच्य विद्या शोध संस्थान स्थित विश्वविद्यालय संग्रहालय का कायाकल्प और जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
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आईआईटी के सहयोग से ‘सक्षम’ प्रोजेक्ट: एएनआरएफ-पयेर (ANRF-PAIR) कार्यक्रम के तहत आईआईटी (IIT) के तकनीकी सहयोग से 13.58 करोड़ रुपये के अनुदान वाली 18 उच्च-स्तरीय अनुसंधान परियोजनाएं संचालित हो रही हैं।
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एमपीसीएसटी (MPCST) प्रोजेक्ट्स: मध्य प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के तहत 12 लाख रुपये के अनुदान से 2 महत्वपूर्ण विज्ञान अनुसंधान परियोजनाएं जारी हैं।
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नेशनल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया के साथ अनुबंध: अकादमिक एवं प्राचीन ज्ञान संसाधनों के डिजिटल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में राष्ट्रीय पुस्तकालय के साथ मिलकर महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है।
युवाओं को उद्यमी बना रहा MSME इन्क्यूबेशन सेंटर
विश्वविद्यालय केवल पारंपरिक पढ़ाई तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को व्यावहारिक, व्यावसायिक और उद्यमशीलता (Entrepreneurship) के क्षेत्र में भी नए अवसर प्रदान कर रहा है।
विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित एमएसएमई इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर (MIIC) को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों तथा नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए 80 लाख रुपये का कार्य अनुदान प्राप्त हुआ है। इस परियोजना में मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड की सीधी सहभागिता है। इन्क्यूबेशन सेंटर के माध्यम से विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं अपने बिजनेस आइडियाज को वास्तविक स्टार्टअप्स में बदलकर नए युग के सफल उद्यमी बन रहे हैं।
पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम
कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने आगे बताया कि सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय आज पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणालियों (Traditional Indian Knowledge Systems) और आधुनिक तकनीकी शोध का एक बेहतरीन संतुलन प्रस्तुत कर रहा है।
विश्वविद्यालय को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं व उपलब्धियों के आधार पर मिला है:
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अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर पहचान: विद्यार्थियों का अध्ययन हेतु निरंतर विदेश प्रवास और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इनोवेशन का प्रदर्शन।
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खेल और प्रतिस्पर्धात्मक सफलताएं: राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का चयन तथा खेल के मैदान में अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां।
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सह-शैक्षणिक नवाचार: बिजनेस इन्क्यूबेशन सेंटर (BIC) के माध्यम से नवाचारों को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय मंचों पर लगातार सम्मान प्राप्त करना।
समारोह में जुटीं देश-विदेश की प्रमुख हस्तियां
बेंगलुरु में आयोजित इस शिक्षा क्रांति सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका को वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ करना और भारत के शिक्षा मॉडल को एक विश्वस्तरीय मंच प्रदान करना था।
समारोह में कर्नाटक की पूर्व मुख्य सचिव एवं यू बी यू एन टी यू (UBUNTU) कंसोर्टियम की संस्थापक डॉ. के. रत्ना प्रभा (सेवानिवृत्त IAS) मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। इसके अलावा विभिन्न देशों के राजनयिकों, शीर्ष शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और वरिष्ठ पत्रकारों ने विश्वविद्यालय के इस मॉडल की सराहना की।
सामूहिक समर्पण और टीम वर्क की सफलता
विश्वविद्यालय को मिली इस ऐतिहासिक और गौरवशाली उपलब्धि पर कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार कार्यपरिषद के सम्मानित सदस्यों डॉ. राजेश सिंह कुशवाह, प्रो. संजय वर्मा, श्री रूप चंद पमनानी, डॉ. मंजूषा मिमरोट, डॉ. वरुण गुप्ता, कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा, शिक्षकों, शोधार्थियों और पूरे विश्वविद्यालय परिवार की दिन-रात की मेहनत और सामूहिक समर्पण का परिणाम है।
इस पुरस्कार के मिलने से उज्जैन न केवल धार्मिक पर्यटन बल्कि उच्च शिक्षा, अनुसंधान और इनोवेशन के एक प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित हो गया है।



