उज्जैन में खड़े हनुमान को लेकर प्रशासन का रुख स्पष्ट, जानिए क्या कहते हैं अफसर
खड़े हनुमान प्रतिमा की वैज्ञानिक रिपोर्ट और जनसंवाद के बिना नहीं होगी कोई कार्रवाई, राष्ट्रीय स्तर पर गूंजा मामला

उज्जैन (मध्य प्रदेश): उज्जैन में स्थित प्राचीन श्री खड़े हनुमान मंदिर के विस्थापन और सड़क चौड़ीकरण के मामले को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रहे असमंजस और विरोध के बीच आखिरकार जिला प्रशासन ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जनभावनाओं, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का पूरा सम्मान किया जाएगा। विशेषज्ञों की तकनीकी व वैज्ञानिक राय और संत समाज तथा आम जनता के साथ व्यापक जनसंवाद के बिना प्रतिमा को हटाने या विस्थापित करने की दिशा में कोई भी एकतरफा कदम नहीं उठाया जाएगा।
हम आपको बता दें कि रोड चौड़ीकरण के कारण श्री खड़े हनुमान मंदिर के यहां से विस्थापित किया जाना है। कागजी खानापूर्ति के बाद जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मंदिर का स्ट्रक्चर तोड़ा गया था। लेकिन प्रतिमा जमीन में गहराई तक होने के कारण नहीं हट सकी। इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, संत समाज और हिंदू संगठनों के बयानों के बाद अब यह मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया और रील्स के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है।
क्यों नहीं उठी प्रतिमा?
प्रशासन द्वारा मंदिर की प्रतिमा को सुरक्षित रूप से हटाने का प्रयास 4 सितंबर से शुरू किया गया था। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर प्रतिमा को फोम और कपड़ों से अच्छी तरह सुरक्षित किया गया था। इसी दौरान प्रतिमा की गहराई जांची तो यह बात सामने आई कि प्रतिमा जमीन के भीतर गहराई तक है और एक विशिष्ट ‘लॉक’ पद्धति से जुड़ी हुई है।
लगभग 1000 वर्ष पुरानी है प्रतिमा
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रोफेसर रमण सोलंकी के अनुसार, खड़े हनुमानजी की यह प्राचीन प्रतिमा लगभग 1000 वर्ष पुरानी हो सकती है। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में बड़ी प्रतिमाओं को स्थापित करने के लिए ‘इंटरलॉक तकनीक’ का उपयोग किया जाता था, और इस प्रतिमा के भी इसी तकनीक से निर्मित होने की संभावना है। यह प्रतिमा मालवा क्षेत्र में पाए जाने वाले अत्यंत मजबूत बेसाल्ट पत्थर से बनी है। राजा भोज और परमार वंश के कालखंड में ऐसे पत्थरों पर उत्कृष्ट कलाकृतियां गढ़ी जाती थीं। हालांकि, लंबी अवधि से सिंदूर का लेप चढ़े होने के कारण इसकी मूल बनावट और भाव-भंगिमा स्पष्ट नहीं दिखती है। प्राचीन काल में बड़ी और भारी मूर्तियों को बिना किसी सहारे के सदियों तक अडिग रखने के लिए ‘इंटरलॉक तकनीक’ का उपयोग किया जाता था। इसी तकनीकी बनावट के कारण प्रतिमा जमीन के भीतर मजबूती से लॉक है, जिसे साधारण तरीके से नहीं निकाला जा सकता।
प्रशासन का स्पष्टीकरण: “आस्था और विकास दोनों हमारी प्राथमिकता”
सोशल मीडिया पर प्रतिमा को हटाने को लेकर फैल रही विभिन्न भ्रामक खबरों और अफवाहों के बीच एसडीएम एलएन गर्ग ने बुधवार को स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया। मीडिया से चर्चा में उन्होंने प्रशासन की ओर से यह विश्वास दिलाया है कि उज्जैनवासियों की धार्मिक भावनाएं, प्रतिमा की सुरक्षा और शहर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत प्रशासन के लिए सर्वोपरि है।
एसडीएम एलएन गर्ग ने स्पष्ट किया “सोशल मीडिया पर यह खबर प्रसारित की जा रही है कि प्रशासन द्वारा श्री खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को विस्थापित करने के कई प्रयास किए जा चुके हैं, जो कि पूरी तरह भ्रामक और असत्य है। अभी तक प्रतिमा को विस्थापित करने या हटाने संबंधी कोई भी प्रयास किसी भी मशीन या मानवीय युक्तियों के माध्यम से नहीं किया गया है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शासन ने यह भी रेखांकित किया कि आगामी सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर शहर में सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्य अत्यंत आवश्यक हैं, लेकिन विकास के साथ-साथ उज्जैन की प्राचीन आस्था और धार्मिक विरासत का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
प्रशासन ने यह प्रतिबद्धता जताई है कि सभी संबंधित पक्षों (संत समाज, श्रद्धालुओं और नागरिकों) को विश्वास में लेकर ही आगे का रास्ता तय किया जाएगा।

संत समाज, राजनीतिक दलों और हिंदू संगठनों का कड़ा रुख एवं प्रदर्शन
खड़े हनुमान मंदिर के विस्थापन की आहट मिलते ही उज्जैन के साधु-संतों, विभिन्न राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों में रोष और चिंता देखने को मिली। 10 सितंबर 2026 को दिनभर मंदिर परिसर में भक्तों, संतों और नेताओं का तांता लगा रहा:
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संत समाज की पहल: 10 सितंबर को शाम संत समाज के प्रतिनिधियों ने गोपाल मंदिर से पैदल मार्च निकालते हुए खड़े हनुमान मंदिर तक यात्रा की। संतों ने यहां हनुमानजी की विधि-विधान से आरती-पूजन की और समाजजनों के साथ चर्चा की। संतों का स्पष्ट कहना है कि यह स्थान सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है, इसलिए प्रशासन को कोई भी कदम उठाने से पहले इसके धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को अवश्य ध्यान में रखना चाहिए।
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कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन: सड़क चौड़ीकरण के दौरान मंदिर का ढांचा प्रभावित होने और प्रतिमा विस्थापन की योजना के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने भी मोर्चा खोल दिया। विधायक एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेश परमार, पूर्व विधायक दिलीप गुर्जर और शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी, नेता प्रतिपक्ष रवि राय के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता हाथों में भगवा ध्वज लेकर राम धुन गाते हुए मंदिर पहुंचे। कांग्रेस कार्यालय से कंठाल होते हुए निकले इस मार्च के दौरान ढोल-धमाकों के बीच मंदिर पहुंचकर नेताओं ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और प्रशासन से जनभावनाओं का सम्मान करने की पुरजोर मांग की।
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विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की मांग: वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने महाकाल नीलकंठ द्वार पर एकत्र होकर पैदल मार्च निकाला और खड़े हनुमान मंदिर पहुंचकर अपनी मांग रखी। मालवा प्रांत संगठन मंत्री खगेंद भार्गव, प्रांत मंत्री विनोद शर्मा, प्रांत संयोजक नितिन पाटीदार और जिला अध्यक्ष राजेश आंजना ने संयुक्त रूप से मांग की कि इस प्राचीन स्थान को हटाने के बजाय एक ‘नए तीर्थ’ के रूप में भव्य रूप से विकसित किया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई वैकल्पिक डिजाइन और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका बेहद अहम रही। आम नागरिकों और डिजाइनर्स ने सोशल मीडिया पर कई तरह के रचनात्मक सुझाव साझा किए हैं। इंटरनेट पर एक ‘वैकल्पिक मंदिर की डिजाइन’ तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें सुझाव दिया गया है कि प्रतिमा को उसके मूल स्थान पर ही यथावत सुरक्षित रखते हुए एक छोटा और सुंदर मंदिर विकसित किया जाए, जिससे यातायात भी सुचारू रूप से चलता रहे और आस्था भी आहत न हो।
सोशल मीडिया के जरिए 5 करोड़ लोगोें तक पहुंचा मामला
खड़े हनुमान मंदिर को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं और वायरल रील्स का असर अब मैदानी स्तर पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। स्थिति यह है कि सती गेट और उसके आसपास के स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने पिछले कई वर्षों में इस मंदिर पर इतनी भारी भीड़ कभी नहीं देखी। इसके साथ ही, यह स्थानीय धार्मिक मुद्दा अब उज्जैन की भौगोलिक सीमाओं को लांघकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। देश के कई प्रसिद्ध भजन गायकों, कथावाचकों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स (जैसे कन्हैया मित्तल और पुण्डरीक गोस्वामी आदि) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए इस विषय को उठाया है। विभिन्न रील्स, वीडियो और पोस्ट के माध्यम से खड़े हनुमान मंदिर का यह घटनाक्रम देश के कोने-कोने तक पहुंच चुका है। दावों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर इन तमाम वीडियो और पोस्ट की कुल पहुंच (Reach) लगभग 5 करोड़ (50 मिलियन) लोगों तक आंकी जा रही है, जिसके चलते प्रशासन और शासन स्तर पर भी इस मामले की गंभीरता और अधिक बढ़ गई है। इन दिनों मंदिर में प्रतिदिन सुबह से लेकर रात तक भक्तों का तांता लगा रहता है। लोग लंबी-लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं और बजरंगबली के दर्शन कर रहे हैं।
दूर-दराज के राज्यों से पहुंच रहे हैं भक्त
देश के विभिन्न हिस्सों से आ रहे पर्यटकों और श्रद्धालुओं में खड़े हनुमान मंदिर के दर्शन करने की होड़ सी लग गई है:
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नासिक से आए अनिल: नासिक से उज्जैन पहुंचे अनिल ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर खड़े हनुमान मंदिर की रील देखी थी। उस वीडियो ने उन्हें इतना आकर्षित किया कि वे खुद खींचे चले आए। उन्होंने कहा कि वे यहां दर्शन करने आए हैं और अब खुद भी मंदिर परिसर से जुड़ी रील्स बनाकर अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर करेंगे।
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नागपुर से आए पंकज इंदुरकर : नागपुर से आए श्रद्धालु पंकज इंदुरकर ने साझा किया कि वे पिछले दो दिनों से लगातार सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार चैनलों पर हनुमानजी से जुड़ी खबरें और अपडेट्स देख रहे थे। अब उज्जैन आकर मंदिर पहुंचकर दर्शन किए।
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अजमेर से आए राजेश पोरवाल : राजस्थान के अजमेर से महाकाल बाबा के दर्शन के लिए उज्जैन आए राजेश पोरवाल ने बताया कि जब वे अपने घर पर सोशल मीडिया पर रील्स स्क्रॉल कर रहे थे, तभी उन्हें खड़े हनुमान मंदिर के इस पूरे घटनाक्रम के बारे में पता चला। महाकाल दर्शन के साथ-साथ वे खड़े हनुमान मंदिर के दर्शन करने भी विशेष रूप से पहुंच गए।
फिलहाल, प्रशासन द्वारा वैज्ञानिक परीक्षण की रिपोर्ट आने तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या विस्थापन की कार्रवाई पर रोक लगा दिए जाने से श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली है, लेकिन सबकी निगाहें अब IIT इंदौर की उस रिपोर्ट और प्रशासन तथा संत समाज के बीच होने वाली आगामी बैठकों के नतीजों पर टिकी हुई हैं।




