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उज्जैन में मिलावटी मावा, दूध, पनीर बेच रहे दुकानों को जानिए, जांच में खुलासा

मिलावटी मावा, दूषित पनीर और बिना लाइसेंस कारोबार करने वालों पर 7.21 लाख रुपये का भारी जुर्माना

उज्जैन (मध्य प्रदेश): मिलावटी सामान बेचने वाले  खाद्य कारोबारियों के खिलाफ उज्जैन जिला प्रशासन ने एक बार फिर बेहद सख्त और कड़ा रुख अपनाया है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक चलाए जा रहे विशेष खाद्य सुरक्षा और जांच अभियानों के तहत प्रशासन ने अमानक (सबस्टैंडर्ड), मिथ्याछाप (मिसब्रांडेड), दूषित खाद्य सामग्री बेचने और बिना वैध लाइसेंस के खाद्य व्यापार करने वाले विभिन्न कारोबारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले कुल मिलावटखोरों और कारोबारियों पर कुल 7 लाख 21 हजार रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया है।

प्रशासन की इस कठोर कार्रवाई से खाद्य कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का साफ तौर पर कहना है कि नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी इस तरह के मिलावटखोरों के खिलाफ ताबड़तोड़ और निरंतर अभियान जारी रहेगा।

सेहत से खिलवाड़ करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे

इस संपूर्ण मामले में न्याय निर्णयन अधिकारी एवं अपर कलेक्टर (एडीएम) अतेंद्र सिंह गुर्जर ने खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले मामलों की गंभीरता से सुनवाई की। उन्होंने अपने कड़े निर्णय में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी कारोबारी को बख्शा नहीं जाएगा। एडीएम अतेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि त्योहारी सीजन हो या आम दिन, शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।

उन्होंने बताया कि जिन प्रतिष्ठानों और फर्मों ने मानकों के विपरीत जाकर मिलावटी मावा, दूध, मिठाई, पानी और अन्य खाद्य पदार्थों का विक्रय किया है, उन्हें न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत आर्थिक दंड से दंडित किया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई से यह संदेश साफ है कि खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSAI) का उल्लंघन करने वालों पर कानून का डंडा पूरी सख्ती से चलता रहेगा।

इन प्रमुख फर्मों और कारोबारियों पर गिरी गाज? 

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट प्रयोगशाला से अमानक और मिथ्याछाप आने के बाद प्रशासन ने निम्नलिखित प्रमुख फर्मों और प्रतिष्ठानों पर भारी जुर्माना लगाया है:

1. मावा एवं डेयरी उत्पाद (दूध और मावे में मिलावट):

दूध और मावा हमारी दैनिक उपयोग की ऐसी वस्तुएं हैं, जिनका सेवन बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बड़े पैमाने पर करते हैं। इनमें मिलावट होना सीधा जनता की जान से खिलवाड़ है। प्रशासन ने इन पर शिकंजा कसा है:

  • नाकोड़ा मावा भंडार और मां कृपा कोल्ड स्टोरेज: इन दोनों प्रतिष्ठानों पर अमानक मावा (Substandard Mawa) बेचे जाने का गंभीर दोष पाया गया, जिसके चलते इन पर आर्थिक जुर्माना लगाया गया।

  • शिव मावा भट्टी (महिदपुर): इस भट्टी पर जांच के दौरान अमानक लूज मावा पाया गया, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता था।

  • न्यू सिंध डेयरी: डेयरी उत्पादों में शुद्धता के दावों के विपरीत यहां अमानक मिक्स मिल्क (मिलावटी दूध) का कारोबार पकड़ा गया।

  • जोधपुर स्वीट्स: इस प्रतिष्ठित मिष्ठान प्रतिष्ठान पर मावा बर्फी की जांच रिपोर्ट ‘मिथ्याछाप’ (Misbranded) आई, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।

2. होटल एवं रेस्टोरेंट (अमानक पनीर और पैक्ड वाटर):

शहर के नामचीन होटलों और रेस्टोरेंटों में परोसे जाने वाले खान-पान की गुणवत्ता पर भी प्रशासन की पैनी नजर रही है:

  • विक्रमादित्य होटल: इस होटल में उपभोक्ताओं को अमानक और खुले में रखे गए संदिग्ध पनीर का उपयोग परोसा जा रहा था, जो नियमों के विरुद्ध है।

  • बांसुरी वाला रेस्टोरेंट और सोनम इंडस्ट्रीज: इन दोनों स्थानों पर बिकने वाला पैक्ड ड्रिंकिंग Water (बोतलबंद पानी) ‘मिथ्याछाप’ पाया गया, जिस पर प्रशासन ने कड़ा जुर्माना ठोका।

  • बेमिसाल बेकर्स (देवास रोड): बेकरी उत्पादों के निर्माण और बिक्री में खाद्य सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन का मामला सामने आने पर इस बेकर्स पर गाज गिरी।

3. किराना एवं नमकीन कारोबारी 

थोक और खुदरा किराना दुकानों पर बिकने वाले मसालों और स्नैक्स की गुणवत्ता भी जांच के घेरे में आई:

  • मालवा किराना स्टोर: यहां प्रसिद्ध ‘अग्रवाल 420 पापड़’ की गुणवत्ता जांच में मिथ्याछाप पाई गई।

  • पोरवाल जी नमकीन: अपने चटपटे स्वाद के लिए लोकप्रिय ‘रतलामी नमकीन’ के नमूने अमानक व नियमों के विपरीत पाए जाने पर कार्रवाई की गई।

  • पारस किराना (महिदपुर): इस दुकान पर बिकने वाली ‘ब्लैक डायमंड काली मिर्च’ की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी।

  • लक्ष्मी ट्रेडर्स (बड़नगर): यहां बिकने वाली ‘स्पेशल लवली रेवड़ी’ को मिथ्याछाप सामग्री बेचने का दोषी पाया गया।

4. प्रतिबंधित उत्पाद और बिना लाइसेंस कारोबार:

बिना पंजीकरण के धड़ल्ले से चल रही दुकानों और प्रतिबंधित वस्तुओं पर भी प्रशासन का बुलडोजर जैसी सख्त कार्रवाई देखने को मिली:

  • महाकाल किराना (इंगोरिया) और शिवम इंटरप्राइजेज (घट्टिया): इन दोनों प्रतिष्ठानों पर शासन द्वारा प्रतिबंधित धनिया पाउडर बेचा जा रहा था। प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री पर प्रशासन ने कड़ा संज्ञान लिया।

  • राजा मटन शॉप और राधिका किराना: इन कारोबारियों द्वारा बिना किसी वैध लाइसेंस या पंजीकरण (Without Valid License/Registration) के खाद्य पदार्थों का व्यापार किया जा रहा था, जिस पर प्रशासन ने कड़ा डंडा चलाया।

क्यों जरूरी है इस तरह की प्रशासनिक कार्रवाई?

त्योहारों के दिनों या आम दिनों में मिलावटखोर अधिक मुनाफे के चक्कर में लोगों की सेहत से खिलवाड़ करते हैं। मावा, पनीर, दूध और मसालों में मिलावट के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां, पेट के संक्रमण, लीवर और किडनी खराब होने का खतरा बना रहता है। जिला प्रशासन द्वारा उठाये गए इस कदम से न केवल मिलावटखोरों में डर पैदा हुआ है, बल्कि यह आम नागरिकों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल है।

जारी रहेगा अभियान

मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। अगर किसी को किसी खाद्य पदार्थ पर शंका है तो वो इसकी शिकायत खाद्य सुरक्षा एवं प्रशासन विभाग में कर सकता है।

-बसंतदत्त शर्मा, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी

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