रेलवे की TSV योजना बनी अवैध कमाई का जरिया
TSV योजना में बन रहे फर्जी वेंडर ID कार्ड; रतलाम मंडल के भोपाल रूट से हर महीने लाखों की धांधली

उज्जैन। भारतीय रेलवे की TSV (Train Side Vendor – ट्रेन साइड वेंडर) योजना यात्रियों की सुविधा और लोकल उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की थी। योजना अब ठेकेदारों और दलालों के लिए अवैध कमाई का बड़ा जरिया बन चुकी है। चलती ट्रेनों में मूंगफली, भेल, चना और पॉपकॉर्न बेचने के छोटे से कारोबार में भी भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी जम चुकी हैं।
समाचार आज की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट और खोजबीन में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। ट्रेनों में अधिकृत रूप से व्यापार करने के नाम पर केवल 300 से 500 रुपये रोजाना के खर्च पर फर्जी और असली की तरह दिखने वाले ‘डुप्लीकेट’ वेंडर आईडी कार्ड बांटे जा रहे हैं। रतलाम रेल मंडल के सिर्फ भोपाल लाइन (उज्जैन-बैरागढ़ रेल खंड) से रोजाना हजारों रुपये की अवैध कमाई की जा रही है, जबकि पूरे मंडल में यह आंकड़ा सालाना करोड़ों रुपये तक पहुंच रहा है। रेलवे आधिकारिक दस्तावेजों और रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले वर्ष रेलवे बोर्ड ने ट्रेनों में यात्रियों को ताजा और स्थानीय खान-पान का सामान मुहैया कराने के लिए टीएसवी (ट्रेन साइड वेंडर) योजना लागू की थी। इस योजना के तहत प्रीमियम ट्रेनों (जैसे राजधानी, शताब्दी, वंदे भारत) को छोड़कर अन्य एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों में कुल 125 वेंडरों को सामान बेचने की अनुमति दी जानी थी।
| विवरण | टेंडर व वित्तीय आंकड़े |
| ठेकेदार कंपनी | कौशल एंटरप्राइजेज |
| ठेके की अवधि | 3 वर्ष (29 दिसंबर 2025 से 28 दिसंबर 2028) |
| कुल टेंडर राशि | लगभग ₹90 लाख (1 जनवरी 2026 से प्रभावी) |
| रेलवे की रोजाना आधिकारिक फीस | ₹5,000 (पूरे मंडल के लिए) |
| सिर्फ भोपाल रूट पर रोज की अवैध वसूली | करीब ₹27,000 |
| एक रूट से महीने का अवैध मुनाफा | करीब ₹6.5 लाख |
‘समाचार आज’ की टीम ने जब इस पूरे नेटवर्क की पड़ताल की और भोपाल रूट पर चलने वाली लगभग एक दर्जन प्रमुख ट्रेनों में स्थिति का जायजा लिया, तो पाया कि केवल इसी एक रेल खंड पर रोजाना 55 से अधिक अवैध वेंडर खुलेआम सामान बेच रहे हैं। इन वेंडरों से ठेकेदार के गुर्गे प्रतिदिन 500 रुपये प्रति वेंडर के हिसाब से लगभग 27 हजार रुपये वसूलते हैं।
यदि इसमें से रेलवे की आधिकारिक दैनिक फीस (5,000 रुपये) घटा दी जाए, तो केवल भोपाल रूट से ही रोजाना 22 हजार रुपये और महीने के लगभग साढ़े छह लाख रुपये ठेकेदार की जेब में सीधे अवैध मुनाफे के रूप में जा रहे हैं। यदि पूरे रतलाम रेल मंडल (नागदा, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, चित्तौड़गढ़ आदि) के सभी रूटों का हिसाब लगाया जाए, तो यह धांधली सालाना 5 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े रेलवे घोटाले का रूप ले लेती है।
रेलवे ने जारी किए सिर्फ 62 कार्ड
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, रतलाम रेल मंडल के वाणिज्य विभाग (Commercial Department) ने ठेकेदार कंपनी कौशल एंटरप्राइजेज को मुख्यालय से कुल 62 अधिकृत वेंडर कार्ड ही जारी किए हैं।
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जांच से बचने का खेल: रेलवे द्वारा जारी किए गए असली रजिस्टर्ड वेंडर मुख्य रूप से रतलाम, नागदा और इंदौर जैसे बड़े स्टेशनों पर तैनात किए जाते हैं। इन स्टेशनों पर पश्चिम रेलवे (WR) के वरिष्ठ अधिकारियों, विजिलेंस टीम और कमर्शियल इंस्पेक्टरों की लगातार चेकिंग चलती रहती है।
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सुरक्षित भोपाल लाइन: उज्जैन से बैरागढ़ (भोपाल) के बीच चलने वाली ट्रेनों में बड़े स्तर की नियमित चेकिंग और विजिलेंस रेड बहुत कम होती है। इसी ढिलाई का फायदा उठाकर इस रूट पर लगभग सभी वेंडर फर्जी/स्कैन किए गए क्यूआर आईडी कार्ड पहनकर ट्रेनों में बेखौफ घूम रहे हैं।
हाल ही में विजिलेंस चेकिंग के दौरान ट्रेन में पकड़े गए कुछ वेंडरों के जब कार्ड जांचे गए, तो वे सभी कार्ड फर्जी और अनधिकृत पाए गए। हालांकि, उच्च स्तर पर सांठगांठ और रसूख के बल पर जिम्मेदार अधिकारियों ने मामला दबा दिया और पकड़े गए वेंडरों को दूसरे रूट पर शिफ्ट कर मामले को रफा-दफा कर दिया।
टेंडर में जोड़ी गई ‘एक लाइन’ ने खोला मनमानी का रास्ता
टीएसवी योजना में इस बड़े पैमाने पर हो रही गड़बड़ी के पीछे टेंडर की शर्तों में किया गया एक संदिग्ध बदलाव भी सामने आया है।
मूल टेंडर दस्तावेजों में स्पष्ट निर्देश था कि वेंडर केवल यात्रियों की सामान्य जरूरतों से जुड़ी स्थानीय और स्वीकृत वस्तुएं ही बेच सकेंगे, जिनकी कुल सूची में 88 तय आइटम्स शामिल थे। लेकिन बाद में जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडर शर्तों में एक नई पंक्ति (Clause) चुपचाप जोड़ दी गई:
“निविदाकर्ता (ठेकेदार) यात्रियों की सुविधा, मौसम और मांग के अनुसार अन्य गैर-सूचीबद्ध सामान भी अपनी मर्जी से बिक्री सूची में शामिल कर सकता है।”
इसी एक शर्त का फायदा उठाकर अब ट्रेन साइड वेंडर निर्धारित गुणवत्ता के बिना, एक्सपायरी डेट वाला और घटिया क्वालिटी का सामान भी यात्रियों को ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। पानी की बोतलों से लेकर स्नैक्स तक, सब कुछ बिना किसी खाद्य सुरक्षा (FSSAI) मानक के ट्रेनों में परोसा जा रहा है।
सुरक्षा और राजस्व दोनों पर उठ रहे गंभीर सवाल
रेलवे ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़े-बड़े दावे करता है। हर वेंडर का पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) होना अनिवार्य है ताकि कोई आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति ट्रेन में यात्रियों के बीच न पहुंचे। लेकिन 500 रुपये रोज लेकर बांटे जा रहे फर्जी आईडी कार्डों ने ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (Train Safety & Security) की धज्जियां उड़ा दी हैं।
बिना किसी पुलिस सत्यापन के फर्जी कार्ड पहनकर घूम रहे ये अवैध वेंडर यात्रियों के सामान की चोरी, जहरखुरानी और अन्य आपराधिक गतिविधियों का भी कारण बन सकते हैं। इसके साथ ही, रेलवे को मिलने वाले जायज राजस्व पर भी हर दिन डाका डाला जा रहा है।
उज्जैन-भोपाल रेल खंड पर चल रहा यह फर्जी वेंडर खेल केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि यह रेल यात्रियों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ है। जब 125 की क्षमता के मुकाबले केवल एक ही रूट पर फर्जी वेंडर दौड़ रहे हों, तो यह साफ दर्शाता है कि नीचे से लेकर ऊपर तक सिस्टम में कहीं न कहीं गहरी साठगांठ है। अब देखना यह होगा कि रतलाम रेल मंडल और पश्चिम रेलवे के उच्च अधिकारी इस खुलासे के बाद क्या कदम उठाते हैं या फिर यह अवैध वसूली ऐसे ही जारी रहेगी।
पक्ष और प्रतिक्रियाएं (Officials & Contractor Response)
इस पूरे मामले पर जब ‘समाचार आज’ ने संबंधित पक्षों से सवाल किए, तो उनके जवाब इस प्रकार रहे:
“हम सब काम नियम से कर रहे हैं”
“हम रेलवे के तय नियमों और टेंडर की शर्तों के मुताबिक ही व्यापार कर रहे हैं। हमारे स्तर पर कोई धांधली या फर्जी कार्ड नहीं बांटे जा रहे हैं। असल धांधली और अवैध वेंडिंग तो आईआरसीटीसी (IRCTC) के ठेकेदार और उनके वेंडर करते हैं।”
— संदीप अग्रवाल, प्रतिनिधि, कौशल एंटरप्राइजेज (ठेकेदार कंपनी)
“गड़बड़ी पाई गई तो होगी सख्त जांच”
“रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार सभी मंडलों में यात्रियों की सुविधा के लिए टीएसवी (ट्रेन साइड वेंडर) योजना लागू की गई है। रतलाम मंडल में सभी कार्य नियमानुसार संचालित हो रहे हैं। यदि फर्जी कार्ड बांटने या तय संख्या से ज्यादा वेंडर चलाने जैसी कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।”
— मुकेश कुमार, जनसंपर्क अधिकारी (PRO), रतलाम रेल मंडल


