श्रीगंगा होटल उज्जैन में देर रात दिल दहला देने वाली वारदात
श्रीगंगा होटल का चैंबर साफ करने उतरे 4 सफाईकर्मियों की मौत, 4 लाख की सहायता देंगे सीएम

उज्जैन में देवास मार्ग पर स्थित श्रीगंगा होटल में ओवरग्राउंड चैंबर की सफाई (Ujjain Shri Ganga Hotel Clean Tragedy) के दौरान 4 कर्मचारियों की दर्दनाक मौत। एक-दूसरे को बचाने के चक्कर में चैंबर के भीतर एक के बाद एक फंसते चले गए सफाईकर्मी। रेस्क्यू में उतरे दो अन्य लोगों की भी तबीयत बिगड़ी, पांचवां सफाईकर्मी घबराहट के कारण बाहर निकला। माधव नगर थाना पुलिस ने कटर से चैंबर का गेट काटकर डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद निकाला बाहर; पुलिसकर्मियों ने दिया 2 मिनट तक सीपीआर (CPR), लेकिन नहीं बच सकी जान।
उज्जैन। उज्जैन-देवास रोड स्थित श्री गंगा होटल से 31 अक्टूबर 2026 की देर रात करीब 12 बजे एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। होटल के ओवरग्राउंड चैंबर की सफाई करने उतरे चार कर्मचारियों की चैंबर के भीतर जहरीली गैस या दम घुटने के कारण मौत हो गई। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक कर्मचारी को मुसीबत में देखकर उसे बचाने के चक्कर में एक के बाद एक चार लोग चैंबर के अंदर फंसते चले गए। इसके अलावा उन्हें बचाने की कोशिश में उतरे दो अन्य लोगों की भी हालत गंभीर हो गई, जिन्हें तुरंत इलाज के लिए पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के परिजन को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, होटल के वेस्टेज और ओवरग्राउंड चैंबर की सफाई का काम चल रहा था। इसी दौरान सफाईकर्मी चैंबर के भीतर उतरे। मृतकों में कमलेश तंबोली, नितिन, वाहिद और मनोज मीणा शामिल हैं। जब पहला कर्मचारी अंदर अचेत होने लगा, तो उसे बचाने के लिए दूसरा उतरा। इसी तरह श्रृंखला बनती गई और चारों कर्मचारी अंदर ही फंसकर बेसुध हो गए। चार लोगों के फंसने के बाद हेमराज नाम का पांचवां सफाईकर्मी भी चैंबर में दाखिल हुआ था, लेकिन उसे तुरंत तेज घबराहट और बेहोशी महसूस होने लगी, जिसके बाद वह सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत बाहर निकल आया।

रेस्क्यू ऑपरेशन: कटर से काटा गया चैंबर का गेट
घटना की खबर मिलते ही माधव नगर थाना प्रभारी गजेंद्र पचोरिया पुलिस टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य (Rescue Operation) शुरू किया। रेस्क्यू के दौरान पुलिस और राहत टीम को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
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कटर मशीन से काटा गया गेट: चैंबर का प्रवेश द्वार (गेट) बेहद संकरा था और आसानी से नहीं खुल रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी पचोरिया ने पास में चल रहे एक कंस्ट्रक्शन साइट से कटर मशीन मंगवाई और गेट को कटवाकर रास्ता बनाया।
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फिसलन और जहरीली हवा: चैंबर के फर्श पर काफी ज्यादा फिसलन और कीचड़ था, जिससे बचाव दल को शवों और अचेत लोगों को बाहर निकालने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।

SI के सिर पर गिरा पिलर
सब-इंस्पेक्टर भी हुए घायल: करीब डेढ़ घंटे तक चले इस कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर के सिर में भी चोंट आई है।
पुलिसकर्मियों ने दिया 2 मिनट से ज्यादा तक CPR
जैसे ही चारों सफाईकर्मियों को बेसुध हालत में चैंबर से बाहर निकाला गया, मौके पर मौजूद माधव नगर थाना पुलिस के जवानों ने मानवता और तत्परता की मिसाल पेश की। पुलिसकर्मियों ने तत्काल जमीन पर लिटाकर चारों को 2 मिनट से अधिक समय तक सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation – CPR) दिया, ताकि किसी तरह उनकी सांसें वापस लौट सकें।


हालांकि, अत्यधिक जहरीली गैस के असर और ऑक्सीजन की कमी के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों द्वारा परीक्षण के बाद चारों को मृत घोषित कर दिया गया, जिसके बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है।

एसपी शर्मा पहुंचे मौके पर, पुलिस जांच में जुटी
हादसे की सूचना मिलते ही उज्जैन पुलिस अधीक्षक (SP) प्रदीप शर्मा भी दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशानिर्देश दिए।
पुलिस प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि:
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क्या सफाई कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण (जैसे गैस मास्क, सेफ्टी बेल्ट, ऑक्सीजन सिलेंडर) मुहैया कराए गए थे या नहीं?
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होटल प्रबंधन द्वारा बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के कर्मचारियों को चैंबर में उतारने में क्या लापरवाही बरती गई?
मामले में होटल मालिक और जिम्मेदार प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
श्री गंगा होटल के मालिक का बयान: “त्योहार पर करा रहे थे ETP प्लांट की सफाई”
होटल के मालिक चेतन गुप्ता ने पूरी घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखते हुए बताया कि यह कोई सामान्य सेप्टिक टैंक नहीं, बल्कि होटल का ईटीपी (Effluent Treatment Plant) टैंक है, जिसकी नियमित सफाई कराई जाती है।
होटल मालिक चेतन गुप्ता का आधिकारिक बयान: “भैया, घटना कोई ऐसी साजिश नहीं है। हमारे यहाँ टैंक बना हुआ है, जिसके अंदर ईटीपी प्लांट लगा हुआ है। त्योहारों के मौके पर हम इसकी विशेष रूप से सफाई करवाते हैं। यह काम मोटर के द्वारा ही होता है और हादसे के वक्त भी सफाई का काम मोटर के जरिए ही किया जा रहा था। हम बाहर से आउटसोर्सिंग करके 3-4 अनुभवी लोगों को बुलाते हैं, जो डेढ़-दो घंटे में इसे साफ करके चले जाते हैं। घटना के समय कर्मचारी नीचे खड़े होकर सफाई कर रहे थे और ऊपर खड़ा एक आदमी बाल्टी के जरिए कुछ खींच रहा था। उसी दौरान अचानक उसका पैर स्लिप (फिसल) हो गया और वह नीचे गिर गया। उसे बचाने और खींचने के चक्कर में दो-तीन अन्य लोग भी एक के बाद एक अंदर चले गए।”
“घटना होटल परिसर में हुई है। इसमें फूड वेस्ट का एक टैंक है। उसी की साफ-सफाई चल रही थी। होटल के ही कुछ कर्मचारी काम कर रहे थे। दम घुटने से वो टैंक के अंदर गिर गए। बचाने के लिए एक-दो लोग और घुसे। कुल मिलाकर चार लोग हैं जिनकी मौत हुई है।” रोशन सिंह, कलेक्टर, उज्जैन
“होटल श्रीगंगा के ओवरग्राउंड वेस्ट चैंबर की सफाई के लिए होटल कर्मचारियों के साथ कुछ लोग भी नीचे उतरे थे। इस दौरान चैंबर के भीतर अचानक जहरीली गैस का रिसाव हुआ था। सूचना पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा।”
प्रदीप शर्मा, एसपी उज्जैन
होटल मैनेजमेंट की गंभीर लापरवाही
उज्जैन के श्री गंगा होटल में हुई यह घटना एक बार फिर सुरक्षा मानकों (Safety Norms) की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सेप्टिक टैंक या गहरे चैंबर में उतरना जानलेवा साबित होता है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सीपीआर देने की कोशिश सराहनीय रही, लेकिन समय पर सुरक्षा उपकरण न मिलना चार परिवारों के चिराग बुझा गया।
चैंबर एवं सेप्टिक टैंक सफाई के 7 प्रमुख व अनिवार्य नियम
किसी भी चैंबर, टैंक या सीवर की सफाई प्रक्रिया शुरू करने से पहले निम्नलिखित 7 सुरक्षा नियमों का पालन किया जाना अनिवार्य है:
1. मशीन से सफाई (Mechanical Cleaning)
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चैंबर या सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए इंसान को सीधे अंदर उतारने के बजाय आधुनिक सक्शन मशीन (Suction Machine), उच्च दबाव वाली जेटिंग मशीन (Jetting Machine) और अन्य यांत्रिक उपकरणों का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
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मशीन से सफाई करने पर कर्मचारियों का जहरीली गैसों से सीधा संपर्क नहीं होता और जानमाल का खतरा न के बराबर रहता है।
2. बिना सुरक्षा व्यवस्था नीचे उतरना पूरी तरह प्रतिबंधित
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सुप्रीम कोर्ट और सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी को बिना पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था, लाइफ सपोर्ट और इमरजेंसी बैकअप के चैंबर के अंदर उतारना पूरी तरह गैरकानूनी और प्रतिबंधित है।
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यदि विषम परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को अंदर उतारना अनिवार्य हो, तो सभी सुरक्षा अनुमतियाँ और मानक पूरे होने चाहिए।
3. जहरीली गैसों और ऑक्सीजन की जांच (Gas Testing & Monitoring)
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चैंबर का ढक्कन या गेट खोलने के तुरंत बाद उसमें किसी को भी प्रवेश नहीं करने देना चाहिए।
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सबसे पहले गैस डिटेक्टर (Gas Detector Meter) के जरिए चैंबर के भीतर विषैली गैसों—विशेषकर हाइड्रोजन सल्फाइड ($H_2S$), मीथेन ($CH_4$)—और ऑक्सीजन ($O_2$) के स्तर की जांच की जानी चाहिए।
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यदि ऑक्सीजन का स्तर मानक (कम से कम 19.5%) से कम हो या जहरीली गैस मौजूद हो, तो अंदर जाना पूरी तरह वर्जित है।
4. पर्याप्त वेंटिलेशन (Ventilation Process)
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सफाई प्रक्रिया शुरू करने से पहले चैंबर में पर्याप्त ताजी हवा के आवागमन (Ventilation) की व्यवस्था की जानी चाहिए।
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चैंबर का ढक्कन खोलने के बाद काफी समय तक उसे खुला छोड़ें या ब्लोअर/एग्जॉस्ट फैन (Exhaust Blower) का उपयोग करके अंदर फंसी हानिकारक गैसों को बाहर निकालें और ताजी हवा अंदर भेजें।
5. प्रमाणित सुरक्षा उपकरण (PPE & Safety Gear)
चैंबर में उतरने वाले कर्मचारी के लिए निम्नलिखित व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (Personal Protective Equipment – PPE) उपलब्ध कराना अनिवार्य है:
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श्वसन उपकरण (Self-Contained Breathing Apparatus – SCBA / Mask): ताकि गैस रिसाव की स्थिति में भी सांस ली जा सके।
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सुरक्षा बेल्ट व हार्नेस (Safety Belt & Body Harness): आपात स्थिति में कर्मचारी को तुरंत बाहर खींचने के लिए लाइफ-लाइन रस्सी से जुड़ा हार्नेस।
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हेलमेट, गमबूट्स और दस्ताने: फिसलन से बचने के लिए एंटी-स्किड गमबूट्स, सिर की सुरक्षा के लिए हेलमेट और हाथों के लिए केमिकली-रेसिस्टेंट दस्ताने।
6. केवल प्रशिक्षित एवं अधिकृत कर्मचारी (Trained Workforce)
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सफाई का कार्य केवल उन्हीं कर्मचारियों से कराया जाना चाहिए जो चैंबर सफाई, जहरीली गैसों के खतरों और आपातकालीन सुरक्षा उपायों में प्रशिक्षित व अधिकृत (Certified & Trained) हों।
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किसी भी अप्रशिक्षित, नए या बिना जानकारी वाले व्यक्ति को ऐसे जोखिम भरे काम में नहीं लगाया जाना चाहिए।
7. आपातकालीन व्यवस्था और रेस्क्यू प्रोटोकॉल (Emergency Setup & Rescue Protocol)
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तैयार टीम: किसी भी संभावित दुर्घटना की स्थिति से निपटने के लिए बाहर एक प्रशिक्षित बचाव टीम (Rescue Team) और जरूरी प्राथमिक चिकित्सा उपकरण (First Aid Kit) हमेशा तैनात रहने चाहिए।
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गलती न दोहराएं (गोल्डन रूल): यदि चैंबर के अंदर कोई कर्मचारी बेहोश होता है या किसी मुसीबत में फंसता है, तो बाहर मौजूद दूसरे व्यक्ति को बिना किसी सुरक्षा उपकरण और SCBA मास्क के उसे बचाने के लिए सीधे चैंबर में नहीं उतरना चाहिए।
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अक्सर एक को बचाने के चक्कर में दूसरा व्यक्ति भी विषैली गैस का शिकार हो जाता है। ऐसे समय में तुरंत रस्सी/हार्नेस से खींचने या विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम की मदद लेने का नियम है।
मैनहोल और चैंबर की सफाई के लिए हैं कड़े सरकारी नियम
1. काम शुरू करने से एक घंटा पहले खोलना होगा मैनहोल
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नियम के मुताबिक, सफाई कार्य शुरू करने से कम से कम एक घंटे पहले मैनहोल या चैंबर का ढक्कन खोल देना चाहिए। ऐसा करने से चैंबर के भीतर जमा होने वाली जहरीली गैसें (जैसे हाइड्रोजन सल्फाइड, मीथेन) बाहर निकल जाती हैं और अंदर ताजी हवा का संचार (Ventilation) शुरू हो जाता है।
2. कम से कम तीन कर्मचारियों की मौजूदगी अनिवार्य (सुपरवाइजर सहित)
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किसी भी स्थिति में अकेले व्यक्ति को सफाई कार्य के लिए नहीं भेजा जाना चाहिए। मौके पर कम से कम तीन कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य है, जिसमें एक प्रशिक्षित सुपरवाइजर का होना जरूरी है ताकि वह बाहर से पूरी प्रक्रिया की निगरानी और आपातकालीन प्रबंधन संभाल सके।
3. ऑक्सीजन लेवल की सटीक जांच (19.5% से 21% का मानक)
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चैंबर के भीतर उतरने से पहले एयर क्वालिटी मीटर से ऑक्सीजन के स्तर की जांच की जानी चाहिए। यदि चैंबर के भीतर ऑक्सीजन का लेवल 19.5% से कम या 21% से अधिक हो, तो किसी भी कर्मचारी को अंदर प्रवेश नहीं करना चाहिए। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।
4. दिन के उजाले में ही होना चाहिए सफाई का काम
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नियमों के अनुसार, सीवर और मैनहोल की सफाई का कार्य हमेशा दिन के उजाले में ही किया जाना चाहिए। रात के समय विजिबिलिटी (Visibility) कम होने और आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद मिलने में कठिनाई होने के कारण रात में सफाई से बचने के निर्देश हैं।
5. एक बार में अधिकतम 90 मिनट का काम और 30 मिनट का अंतराल
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कोई भी कर्मचारी लगातार लंबे समय तक चैंबर के अंदर काम नहीं करेगा। नियम यह है कि एक बार में 90 मिनट (डेढ़ घंटे) से अधिक काम नहीं होना चाहिए। इसके तुरंत बाद कर्मचारियों को बाहर निकालकर 30 मिनट का अनिवार्य अंतराल (Break) दिया जाना चाहिए ताकि वे तरोताजा हो सकें।
6. बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य
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दुर्घटनाओं से बचाव के लिए मैनहोल के चारों ओर सुरक्षित बैरिकेडिंग (Barricading) की जानी चाहिए। इसके साथ ही आसपास के लोगों और वाहनों को सतर्क करने के लिए ‘सफाई कार्य जारी है’ से जुड़े चेतावनी बोर्ड (Warning Signs) प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाने चाहिए।
7. अंदर जाने वाले कर्मचारी की लगातार निगरानी
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चैंबर के अंदर काम कर रहे कर्मचारी पर बाहर मौजूद टीम की लगातार नजर (Continuous Monitoring) होनी चाहिए। संवाद बनाए रखने के लिए इंटरकॉम, वॉकी-टॉकी या मजबूत लाइफ-लाइन रस्सी का उपयोग किया जाना चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत एक्शन लिया जा सके।
-हरिओम राय @ उज्जैन

